मोदी को बनारस में ये पांच योद्धा देंगे चुनौती
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नरेंद्र मोदी के बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर काफी दिनों से चर्चा चल रही थी। कुछ नेता ऐसे थे, जिन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर भाजपा के पीएम पद के दावेदार इस सांस्कृतिक नगरी से चुनाव लड़ते हैं, तो वो उन्हें चुनौती देंगे। इनमें अरविंद केजरीवाल भी शामिल रहे।
भाजपा में लंबे वक्त तक चली पसोपेश के बाद यह ऐलान कर दिया गया कि मोदी बनारस से चुनाव लड़ेंगे, जबकि लखनऊ सीट से राजनाथ सिंह जिम्मा संभालेंगे।
अब देश की निगाहें इस सीट पर टिक गई हैं। जैसा कि उम्मीद थी कि बनारस में कई तरफा मुकाबला देखने को मिल सकता है और ऐसा कहा जा रहा है कि इसका सीधा फायदा मोदी को होगा। पहले खबर आ रही थी कि गैर-भाजपा दल साझा उम्मीदवार उतार सकते हैं या केजरीवाल को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन अब इसकी संभावना कम हैं।
केजरीवाल, चौरसिया और जायसवाल
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह बनारस से मोदी को चुनौती देंगे, वहीं समाजवादी पार्टी ने मिर्जापुर से अपने विधायक और अखिलेश यादव सरकार में राज्य मंत्री कैलाश चौरसिया को इस सीट से मौका देने का मन बनाया है।
मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी दौड़ में शामिल है। सूत्रों ने खुलासा किया कि पार्टी दिग्गज कारोबारी विजय जायसवाल को टिकट देने की तैयारी कर रही है।
ऐसी खबरें आ रही थीं कि कांग्रेस मोदी के खिलाफ किसी एक उम्मीदवार को समर्थन दे सकती हैं और पार्टी नेता अनिल शास्त्री ने इसका इशारा दिया था। लेकिन अब यह साफ हो गया कि सभी बड़े दल मोदी के खिलाफ अपना-अपना दावेदार उतारेंगे।
कांग्रेस उतारेगी बड़ा नाम
संभावना है कि कांग्रेस मोदी के खिलाफ किसी बड़े नाम को उतारना चाहती है। ऐसा माना जा रहा है कि यह शख्स क्रिकेट या फिल्मी दुनिया से हो सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो मामला और दिलचस्प हो जाएगा।
इन तमाम लोगों के अलावा बनारस की सीट पर भीड़ बढ़ाने के लिए मुख्तार अंसारी भी हैं, जो कौमी एकता दल की तरफ से लढ़ सकते हैं। दबंग की छवि रखने वाले अंसारी इलाके के मुस्लिमों में अच्छी पैठ रखते हैं। उन्होंने पिछली दफा बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और मुरली मनोहर जोशी से मामूली अंतर से हारे थे।
साथ ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की तरफ से इंदिरा तिवारी मैदान में हैं और वह अखिल भारत हिंदू महासभा की महासचिव के रूप में सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि मामले से जुड़ी रही हैं।
ममता बनर्जी भी देंगी चुनौती
इंदिरा तिवारी ने फरवरी में इस पद से इस्तीफा दिया है। नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल का मुकाबला करने लिए तैयार हो रही तृणमूल की उम्मीदवार ने मोदी के बारे में कहा कि वह और उनका दल 'अछूत' में यकीन नहीं रखता। उन्होंने कहा, "देश्ा में लोकतंत्र है।"
यह पूछने पर कि क्या चुनावों के बाद वह मोदी का समर्थन करेंगी, उन्होंने जवाब दिया, "यह काल्पनिक सवाल है।" राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि जितने ज्यादा उम्मीदवार मैदान में होंगे, मोदी को उतना फायदा होगा।
ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा होने पर 'सेकुलर' वोट बंट सकते हैं। हालांकि, दो स्थानीय वैश्य - चौरसिया और जायसवाल - भाजपा की वह योजना बिगाड़ सकते हैं, जिसके तहत उसने समुदाय के एकतरफा समर्थन की उम्मीद की है।
भाजपा के लिए क्यों अहम है बनारस?
भाजपा ने नरेंद्र मोदी को बनारस से इसलिए उतारा है, क्योंकि उसका मानना है कि ऐसा करने से उसे पूर्वांचल की सीटों पर मदद मिल सकती है। उत्तर प्रदेश में कुल 80 लोकसभा सीटें हैं और यहां सबसे ज्यादा सीट जीतने वाली पार्टी केंद्र में कुर्सी के करीब पहुंच सकती है।
बनारस हमेशा से हिंदुत्व मुद्दे के लिए खास स्थान रहा है। यहां विश्वनाथ हैं, जो 12 पूजनीय ज्योर्तिलिंग में से एक है। इनमें से एक लिंग गुजरात के सोमनाथ में है और भाजपा अतीत में सोमनाथ से विश्वनाथ के तार जोड़ती रही है।
बनारस की सीट मोदी के चुनाव लड़ने से अहम हुई और केजरीवाल के मैदान में उतरने से इसकी दिलचस्पी और बढ़ गई। लेकिन अब मुकाबले में कई नेता हैं, ऐसे में काशी की कशमकश पर पैनी निगाह रखनी होगी।