यूएस में मुसलमानों पर क्या बोले मोदी?
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अमेरिका दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत पिछले चार दशक से आतंकवाद से पीड़ित है और यह आतंकवाद बाहर से आया है। उन्होंने देश के मुसलमानों को संदेह से परे बताते हुए कहा कि भारत का मुसलमान अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों की सोच को विफल कर देगा।
अलकायदा भारत में कामयाब नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवाद बुरा या अच्छा नहीं होता। कई देश आतंकवाद के रूप को नहीं समझ पाए हैं। इसके खात्मे के लिए सभी देशों को गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है।
न्यूयॉर्क में प्रमुख थिंक टैंक ‘काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ को संबोधित करते हुए मोदी ने पड़ोसी देशों के साथ संबंध, विकास और अर्थव्यवस्था सहित तमाम मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उनका इरादा भारत को एक विकसित देश बनाना है। इसके लिए हर घर में बिजली पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
चीन से विवाद सुलझाने में किसी मध्यस्थता से इनकार
उन्होंने कहा कि बिजली कोई विलासिता की चीज नहीं बल्कि मूलभूत जरूरत है। उन्होंने मेक इन इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी योजना देश के हाथ नागरिक को हुनरमंद बनाना है। उन्होंने कि आज समय की मांग है कि खाद्य सुरक्षा के साथ दुनिया में व्यापार के क्षेत्र में हर देश को बराबरी का मौका मिले। उन्होंने डब्ल्यूटीओ में खाद्य सब्सिडी पर भारत के कड़े रुख के कारण अटकी वार्ता में नरमी के संकेत देते हुए कहा कि उनकी सरकार व्यापार में सहूलियत पर वार्ता के लिए राजी है।
प्रधानमंत्री ने सार्क देशों के साथ बेहतर संबंध की जरूरत बताते हुए कहा कि भारत ने इन देशों के लिए एक कॉमन सेटेलाइट की योजना बनाई है। उन्होंने इराक और अफगानिस्तान की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका को अफगानिस्तान से अभी सेना नहीं हटाना चाहिए। उन्होंने कहा भारत और अमेरिका को करीब लाने में अफगानिस्तान का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने चीन से साथ किसी प्रतिस्पर्धा से इनकार करते हुए कहा कि भारत का चीन के साथ व्यापारिक रिश्ता है और दोनों देश आपसी मुद्दों के सुलझाने में सक्षम हैं।
उन्होंने चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए किसी तरह की मध्यस्थता से इनकार किया। प्रधानमंत्री ने दुनिया में गरीबी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि विकास का मुख्य मकसद निम्न तबके तक इसका लाभ पहुंचा है। उन्होंने सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी अपनी सरकारी की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि समाज के विकास के लिए लड़कियां की शिक्षा बहुत जरूरी है। उनकी सरकार हर बच्ची के शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी कैबिनेट में 25 फीसदी महिलाएं हैं।
भारत-इस्राइल रिश्तों में अपार संभावनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी सरजमीं पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा, कृषि समेत ईरान और आतंकी गुट आईएसआईएस से उत्पन्न खतरे पर चर्चा की। इस्राइल के प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे आपसी रिश्तों में अपार संभावनाएं हैं।
मुलाकात के दौरान नेतन्याहू ने मोदी को इस्राइल आने का निमंत्रण दिया। मोदी ने इस प्रस्ताव पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि इस पर गौर किया है। फलस्तीन मुद्दे के चलते किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने अभी तक इस्राइल का दौरा नहीं किया है। मोदी ने 2006 में बतौर गुजरात के सीएम के तौर पर इस्राइल का दौरा किया था।
न्यूयॉर्क के लिए निकलने से ठीक पहले इस्राइली अधिकारियों ने यरूशलम में कहा था कि भारत के साथ संबंध उनके लिए बहुत मायने रखते हैं और दोनों देशों के पीएम की मुलाकात को लेकर काफी आशान्वित हैं। इस्राइली पक्ष की तुलना में मोदी की प्रतिक्रिया उत्साहहीन रही। हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की न्यूयॉर्क में एक अक्तूबर को अपने इस्राइली समकक्ष से होने वाली मुलाकात में कुछ सकारात्मक प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
मेक इन मुहिम पर मोदी-नेतन्याहू में हुई बात
रक्षा संबंधों के संदर्भ में भारत के लिए इस्राइल एक अहम साझीदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हो रही है और वर्तमान में यह 6 बिलियन डॉलर है। मोदी और नेतन्याहू ने कृषि क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत कृषि क्षेत्र में इस्राइल से तकनीक का इच्छुक है। इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच वाटर मैनेजमेंट पर भी बात हुई। इस्राइल इस क्षेत्र में मास्टर है और इसने इसमें काफी प्रगति भी की है। इस्राइल के इस हुनर का भारत फायदा उठा सकता है। मोदी ने नेतन्याहू के साथ मेक इन इंडिया मुहिम के मद्देनजर खासकर रक्षा सेक्टर पर बात की। भारत साइबर सुरक्षा पर भी इस्राइल से मदद चाहता है।
जब मोदी वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करेंगे तो भी इस मसले पर चर्चा होगी। इसके अलावा मोदी और नेतन्याहू ने मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा की। इराक और सीरिया में आतंकी गुट आईएसआईएस के उभार से इस क्षेत्र में और अधिक अशांति का माहौल बन गया है। लगभग सभी देश आईएसआईएस के बारे में भारत के रुख को जानने के लिए उत्सुक हैं।
दोनों देशों के नेताओं ने ईरान को लेकर भी चर्चा की। इस्राइल ईरान को जहां अपना दुश्मन मानता है, वहीं दूसरी ओर भारत के तेहरान से काफी अच्छे संबंध हैं। इसकी वजह ईरान का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता होना है। इस्राइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सशंकित है। बातचीत के दौरान इस्राइली पीएम ने ईरान के साथ पी-5प्लस वन वार्ता की बात भी कही। इसके अलावा मोदी ने अमेरिकन यहूदी नेताओं के समूह से भी मुलाकात की। भारतीय पीएम का अमेरिकी यहूदी नेताओं से मिलना एक परंपरा सी बन गई है।
क्लिंटन दंपति से मिले मोदी, गंगा अभियान को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सोमवार को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने मुलाकात की। इस दौरान बिल क्लिंटन ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनसे पहले अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ऐसा ज्ञान किसी के पास नहीं था। उन्होंने गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए मोदी के अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे एशिया में दूसरे देशों को भी संदेश मिलेगा।
क्लिंटन दंपति के साथ हुई 45 मिनट की मुलाकात के दौरान पीएम मोदी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद थीं। पीएम और स्वराज ने क्लिंटन दंपति का स्वागत किया और दोनों को नाना-नानी बनने की बधाई दी। क्लिंटन की बेटी चेलसी ने हाल ही में एक बेटी को जन्म दिया है।
सुषमा ने हिलेरी को गले मिलकर मुबारकबाद दी। भारत प्रेम के लिए चर्चित बिल और हिलेरी ने भारत-अमेरिकी रिश्तों पर बात की और इस संदर्भ में भारत की नई सरकार से उसकी प्राथमिकताएं जानीं। पीएम मोदी की हिलेरी से यह मुलाकात उन खबरों की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें कहा जा रहा है कि हिलेरी 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकती हैं।