मोदी की सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ कागजों पर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 22 जनवरी को बड़े जोश से जिस सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की थी, उसके तहत अभी तक बैंकों में खाता खुलने ही शुरू नहीं हुए हैं। बैंक से जुड़े सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय की लेटलतीफी की वजह से अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि इस योजना में किस-किस बैंक को भागीदार बनाया जाएगा और उनके कितनी शाखाओं में इसके तहत खाता खुल सकेंगे। हालांकि ये खाते डाकघरों में खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ करते हुए सुकन्या समृद्धि खाता की घोषणा की थी। लेकिन लोग जब बैंक की शाखाओं में जाते हैं तो उन्हें जवाब मिलता है कि अभी इसके लिए कोई सर्कुलर नहीं आया, इसलिए खाता नहीं खुलेगा।
देखा जाए तो इस योजना के लिए काम तो बीते साल ही शुरू हो गया था। तभी तो वित्त मंत्रालय ने 2 दिसंबर 2014 को ही सुकन्या समृद्धि खाता नियम 2014 अधिसूचित कर दिया था। अच्छी बात यह है कि इसमें कन्या के 21 वर्ष पूरा होने से पहले पैसा नहीं निकाल सकते हैं। हां, पढ़ाई के लिए जरूरत है तो 18 वर्ष के बाद कुछ राशि निकाली जा सकती है। इसमें जमा की गई रकम पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत छूट भी मिलेगी।
पीपीएफ की तरह है यह योजना
एक अग्रणी सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुकन्या समृद्धि खाता तो पीपीएफ की तरह है जिसे वित्त मंत्रालय में छोटी बचत को देखने वाला विभाग विनियमित करता है।
अभी जबकि दीर्घकालीन मियादी जमा (एफडी) खाता पर करीब 8 फीसदी ब्याज मिलता है और ब्याज दर में लगातार कमी ही हो रही है, इस खाता में चालू वर्ष के दौरान 9.1 फीसदी का ब्याज मिलेगा।
हर वर्ष इसके लिए अलग से ब्याज दर की घोषणा होगी। बचत संगठन के सूत्र बताते हैं कि अभी इस पर काम चल रहा है और एक-आध सप्ताह में बैंकों को इसके लिए नामित कर दिया जाएगा।