गंगा में 'मोदी जहाज' चला तो होगा फायदा ही फायदा
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अगर संगम से लेकर सिरसा तक गंगा में गाद की सफाई हो सकी और माल वाहक जहाज कार्गो की आवाजाही शुरू हुई तो संगमनगरी इलाहाबाद के उद्योग और व्यापार का कायापलट हो सकता है। इस जलमार्ग से कार्गो जहाज सिरसा, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, पटना, भागलपुर, फरक्का होते हुए कोलकाता और फिर हल्दिया पहुंचेंगे। ऐसे में इन जगहों से कारोबारी रिश्ते जुड़ेंगे।
कारोबारी मानते हैं कि कार्गो के संचालन से सामान एक जगह से दूसरी जगह तक सहज और सस्ती दरों पर पहुंचाया जा सकेगा। रेलवे या सड़क मार्ग से माल की ढुलाई पर एक रुपया खर्च होने की तुलना में कार्गों जहाज पर उसी माल की ढुलाई पर सिर्फ एक चौथाई यानी महज 25 पैसे ही खर्च होंगे। कार्गो का परिवहन चार गुना सस्ता पड़ेगा।
जलमार्ग के लिए नैनी के लवायन खुर्द में टर्मिनल बनाने के लिए विभाग ने वर्ष 2004 में 35 लाख रुपये की लागत से 9.87 एकड़ जमीन खरीदी थी। यहां आधुनिक उपकरण लगाए जाने के साथ प्लेटफार्म, गोडाउन भी बनेगा। ऐसे में टर्मिनल पर माल चढ़ाने-उतारने के लिए बड़ी संख्या में श्रमिकों और व्यवस्था के लिए कर्मचरियों की जरूरत तो होगी ही, टर्मिनल के करीब चाय, पान, होटल, रेस्टोरेंट सहित बाजार विकसित होगा और टेंपो-टैक्सी वालों को भी काम मिलेगा।
खास वर्ग नहीं, सबको पहुंचेगा फायदा
प्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा के मुताबिक जलमार्ग के संचालन से आम वर्ग से लेकर खास वर्ग तक सभी को फायदा पहुंचेगा। कोलकाता रेडीमेड कपड़ों से लेकर साड़ी, कुर्ता, पार्टीवियर कपड़ों के लिए बड़ा बाजार है, माल ढुलाई के लिए सस्ता साधन होने से इसका फायदा सभी वर्ग के कारोबारियों को मिल सकेगा। शहर का विकास तो होगा ही।
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष फूलचंद दुबे इसे नैनी की कंपनियों और उद्योगों के लिए यह अच्छी खबर मान रहे हैं। जीईसी, सेल जैसी कंपनियां अपने उत्पाद जलमार्ग से आसानी से भेज सकेंगी। कई बार बड़ी गाड़ियों से सामान लाने में रेलवे के क्रासिंग या ओवरब्रिज बाधा बनते थे, जल मार्ग से ऐसी दिक्कत नही होगी। वहीं टर्मिनल के पास चौबीस घंटे रोजगार की संभावनाएं बनेंगी।
‘सिक इंडस्ट्री’ को पुनर्जीवन, नई कंपनियां भी
ईस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कामर्स ऐंड इंडस्ट्री के सचिव विनय कुमार टंडन का कहना है कि बजट का बड़ा हिस्सा इलाहाबाद में खर्च होने से शहर का विकास तो होगा ही, सड़क या रेलमार्ग सेसीमेंट, लोहा, स्टील, कोयला, खाद, ट्रांसफार्मर आदि की ढुलाई पर जो व्यय और समय लगता था, उसमें भी बचत होगी। और तो और इस सुविधा के बाद जहां ‘सिक इंडस्ट्री’ को पुनर्जीवन मिलेगा, वहीं नई कंपनियों की संभावनाएं भी बनेंगी। उम्मीद है कि टर्मिनल इलाहाबाद के विकास के लिए टर्निंग प्वाइंट बनेगा।