किशोर अपराधियों को होगी बड़ों जैसी सजा
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मोदी सरकार ने गंभीर अपराधों में शामिल 16 से 18 साल के किशोरों को वयस्कों की तरह सख्त सजा दिलाने का ऐतिहासिक फैसला कर लिया है।
लंबे समय से इस मुद्दे पर छिड़े विवाद को दरकिनार करते हुए कैबिनेट ने बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2014 के मसौदे पर अपनी मुहर लगा दी है। इससे गंभीर अपराध के मामले में जेजे बोर्ड नाबालिगों का मुकदमा सामन्य कोर्ट में चलाने का निर्णय ले सकेगा।
तमाम मंत्रालयों और समाज के अलग-अलग वर्गों से मिले सुझाव के आधार पर तैयार किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट)-2014 के मसौदे को कैबिनेट की हरी झंडी के बाद अब बजट सत्र के दौरान ही संसद में पेश किया जा सकता है।
बड़े मामलों में मिलेगी सख्त सलाह
पिछले माह इस संदर्भ में 14 मंत्रालयों को भेजे गए कैबिनेट नोट पर कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय समेत ज्यादातर मंत्रालयों ने इस पर अपनी सहमति जताई थी।
इस प्रस्ताव के कानून की शक्ल लेने के बाद 16 से 18 साल के बीच के अपराधियों को दुष्कर्म, तेजाब हमले, डकैती जैसे जघन्य अपराध में शामिल होने पर सामान्य कोर्ट तक मामला ले जाने का विकल्प मिल जाएगा।
दामिनी हादसे के बाद तेज हुई थी बहस
मालूम हो कि दिसंबर, 2012 में दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद से किशोर की उम्र सीमा घटाने की मांग तेज हो गई थी। इस मामले में दोषी किशोर को सिर्फ तीन साल बाल सुधार गृह में बिताने की मामूली सजा मिलने के बाद इस कानून में बदलाव की बहस छिड़ गई थी।
पिछली सरकार में इस कानून में बदलाव को लेकर विचार विमर्श हुआ था, लेकिन सहमति नहीं बन पाई थी। नए मसौदे के प्रावधान के तहत अब जघन्य अपराध में शामिल किशोर को किसी भी मामले में फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं दी जा सकेगी।
अब तक ये हैं प्रावधान
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 (संशोधित) के तहत किशोर अपराधी की उम्र 18 वर्ष है। संशोधित एक्ट के तहत किशोर होने का दावा करने वाले को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष ही भेजा जाता है।
इसके तहत-
- 18 साल से कम उम्र के आरोपी को तीन वर्ष से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती है।
- ऐसे बच्चे को सामान्य जेल में भी नहीं रखा जा सकता है।
- छोटे अपराधों में पुलिस स्टेशन में तैनात अफसर किशोर के मां-बाप को उसके अपराध के बारे में बताकर छोड़ सकता है।
- पुलिस को अगर बच्चे का अपराध गंभीर लगता है तो डीडी इंट्री कर उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।
बाल अपराध से जुड़े सनसनीखेज मामले
2 मई 2005 : लखनऊ में 6 रईसजादों (जिनमें कुछ नाबालिग थे) ने एक युवती का अपहरण कर चलती कार में बलात्कार किया
16 दिसंबर, 2007 : गुड़गांव में 10वीं व 12वीं के चार छात्र गिरफ्तार, उन्होंने खिलौना पिस्टल दिखाकर कार लूट ली थी
16 फरवरी, 2008 : गाजियाबाद में 12वीं कक्षा के एक छात्र ने अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी
3 अक्तूबर, 2011 : सहारनपुर में अध्यापक के डांटने पर गुस्साए छात्र ने उन्हें चाकू से हमला कर लहूलुहान कर डाला
16 दिसंबर, 2012 : चलती बस में युवती के साथ गैंगरेप व हत्या, पांच आरोपियों में से एक नाबालिग भी था
अन्य देशों में कानून
मिस्र : 15 साल से कम उम्र के किशोर को हिरासत में नहीं लिया जा सकता है।
अल्बानिया : 18 साल, कैसे भी अपराध के लिए कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता है।