गोधरा पर पहली बार खुलकर बोले मोदी
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चुनावों के दौर में भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी इन दिनों रैलियों में खूब बोलते दिख रहे हैं, लेकिन इंटरव्यू देने की जब बात आती है, तो उन पर कई सवाल खड़े होते हैं।
विरोधियों का कहना है कि मोदी इंटरव्यू नहीं देते, क्योंकि ऐसा करने पर उनकी पोल खुल जाएगी। लेकिन चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में मोदी को इंटरव्यू भी देना पड़ा। इससे पहले वो एक इंटरव्यू छोड़कर बीच में रवाना हो गए थे, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ।
लेकिन चुनावों से ठीक पहले मोदी ने सोमवार को समाचार चैनलों को दिए इंटरव्यू में काफी कुछ कहा। वो दंगों पर बोले, गोधरा कांड पर अपनी बात रखी और चुनावों पर भी खूब बोले। आइए जानें, मोदी ने अलग-अलग मुद्दों पर क्या-क्या कहा?
सोची समझी साजिश थी गोधरा कांडः मोदी
सोमवार रात न्यूजएक्स चैनल पर प्रसारित एक दुर्लभ इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार और भाजपा की अगुवाई वाली गुजरात सरकार के खिलाफ सोची-समझी साजिश रची गई।
वो गोधरा कांड और उसके बाद इलाके में फैले तनाव की चर्चा कर रहे थे। इस साक्षात्कार में उन्होंने 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस पर हुए हमले के बारे में खूब चर्चा की, जिसके कारण गुजरात में कौमी दंगे भड़के थे।
न्यूजएक्स के मुताबिक यह अंश उस फुटेज से लिए गए हैं, जिसकी रिकॉर्डिंग आकादमिशियन और लेखिका मधु किश्वर ने की थी। मोदी ने कहा कि जैसे ही उन्होंने इस खबर के बारे में सुना, उन्हें अंदाजा हो गया कि यह गंभीर मामला है। हालांकि मधु किश्वर को मोदी समर्थक कहा जाता है और उन्हें मोदी के इंटरव्यू पर भी सवाल उठते रहे हैं।
'गोधरा में कर्फ्यू के आदेश दिए'
नरेंद्र मोदी के मुताबिक उन्होंने गोधरा में कर्फ्यू के आदेश दिए और अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी इस ट्रेन के बाकी सभी मुसाफिरों को अहमदाबाद सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा संभाला जाए।
इस घटना में 59 यात्री मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। मोदी का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को सभी स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के आदेश भी दिए।
गुजरात के मुख्यमंत्री का कहना है कि उस वक्त अधिकारियों का यह मानना था कि वो ओवररिएक्ट कर रहे हैं। उस वक्त विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था।
विवादित ईमेल का भी जिक्र किया
नरेंद्र मोदी ने बताया कि वो सिंगल इंजन हेलिकॉप्टर से गोधरा पहुंचे और अधिकारियों ने चेताया था कि वीआईपी मूवमेंट के लिए यह हेलिकॉप्टर सही नहीं है। मोदी के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वो वीआईपी नहीं हैं।
गोधरा से मोदी अहमदाबाद लौटे और एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया है कि गुजरात सरकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार और गुजरात सरकार के खिलाफ साजिश रची गई।
अपने दावों को सही ठहराने के लिए मोदी ने कहा कि गोधरा हादसे के कुछ घंटे के भीतर यह ईमेल वायरल हुआ, जिसमें कहा गया था कि कुछ कारसेवकों ने एक महिला के साथ बदसलूकी की है।
'बताया गया कि सेना गुजरात से दूर है'
दंगों के वक्त सेना की मदद मांगने में देर करने का इल्जाम झेलने वाले मोदी ने कहा कि वो जल्द से जल्द सुरक्षाबलों की तैनाती चाहते थे, ताकि बढ़ते तनाव पर काबू पाया जा सके।
मोदी के मुताबिक उनसे कहा गया कि सेना जोधपुर बॉर्डर पर है। उन्होंने कहा कि पहले दिन से वो सूबे में अमन कायम करना चाहते थे। मोदी ने कहा कि मीडिया ने उनके विरोधियों के नजरिए को खूब उछाला।
इससे पहले एक किताब में मोदी ने कहा कि वह दंगों को लेकर दुखी थे और मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते थे। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वो खुद को दोषी नहीं मानते।
उम्मीदों का चुनाव है यहः मोदी
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने हाल में ईटीवी को भी इंटरव्यू दिया। मोदी ने इस बार के लोकसभा चुनावों को ‘उम्मीदों का चुनाव’ बताया है। मोदी ने कहा कि वह देश को कांग्रेस के पोषित कुशासन, वोट बैंक की राजनीति, वंशवादी शासन, भ्रष्टाचार और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग से छुटकारा दिलाना चाहते हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि देश के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि आज जनता का न केवल प्रधानमंत्री पद से भरोसा उठ गया है बल्कि सरकार रूपी संस्था पर भी विश्वास नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नकारात्मकता की कोई गुंजाइश नहीं है। यह उम्मीदों का चुनाव है। ऐसा देश में पहली बार हो रहा है। ईटीवी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान मोदी ने अपनी प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया।
'बीते दस साल में भ्रष्टाचार का नंगा नाच'
नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी प्राथमिकताएं नौकरियों का ज्यादा से ज्यादा सृजन करना, कौशल विकास, कृषि उत्पादन बढ़ाने, औद्योगिक उत्पादन में तेजी लाना, स्वास्थ्य, महिलाओं का सशक्तिकरण तथा आरक्षण और उनकी सुरक्षा के लिए उपाय करना है।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह कांग्रेस मुक्त भारत का जिक्र करते हैं तो इसका मतलब है कि वह कांग्रेस की उस कार्यप्रणाली से आजादी की बात कहते हैं जो उसने 60 साल के शासन के दौरान देश में लागू की।
यह कार्य संस्कृति कांग्रेस द्वारा पोषित है। पिछले 10 साल के दौरान भ्रष्टाचार का जैसा नंगा नाच यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ, वैसा देश में कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत नारे का मतलब है, कुशासन से मुक्ति, वंशवादी शासन से आजादी, संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग से मुक्ति, महंगाई से छुटकारा और अन्य तरह के संकटों से आजादी।