मोदी की नई टीम में कौन-कौन होंगे शामिल?
नए साल में भाजपा संगठन की नई टीम तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के बजट सत्र से पहले अपनी टीम यानि मंत्रिमंडल को नया लुक देंगे। इस संदर्भ में भाजपा की नई टीम के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार को ले कर उच्च स्तर पर लगातार मंथन का दौर जारी है।
दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शीर्ष स्तर पर सरकार में रफ्तार भरने के साथ-साथ संगठन के लिए भी ठोस जमीन तैयार करने का रास्ता ढूंढा जा रहा है।
माना जा रहा है कि इस क्रम में सरकार में शामिल कुछ दिग्गज चेहरों को संगठन में भेजे जाने, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन और सरकार में चुनावी राज्यों के साथ-साथ भागीदारी न पाने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का भी रास्ता ढूंढा जा रहा है।
सरकार के कामकाज में तेजी लाने के लिए खुद प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल को सीधे सांसदों से जोड़ने का रास्ता तलाशने का निर्देश दे चुके हैं।
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि भाजपा की नई टीम नए साल के जनवरी महीने के तीसरे हफ्ते में तैयार हो जाएगी। नई टीम पर सहमति के साथ ही टीम मोदी की मंत्रिमंडल फेरबदल का खाका भी तैयार हो जाएगा।
बजट सत्र से पहले पीएम मोदी करेंगे मंत्रिमंडल में फेरबदल
भाजपा सूत्रों के मुताबिक बिहार के नतीजे आने के बाद से ही लगातार संगठन और सरकार को नया लुक देने पर मंथन चल रहा है।
इसमें संगठन में शक्तियों का विकेंद्रीकरण करने, प्रधानमंत्री पर संगठन कार्यों का दबाव कम करने और मंत्रिमंडल में चुनावी तथा अब तक जगह बनाने में नाकाम रहे राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का रास्ता ढूंढा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक नया लुक देने की कवायद के तहत संगठन और सरकार में बड़े बदलावों पर सहमति बन सकती है। हालांकि इस क्रम में सरकार से छुटकारा पाने वालों को संगठन में निश्चित रूप से जगह दी जाएगी।
खासतौर से इस बदलाव का व्यापक असर बिहार की राजनीति पर देखने को मिलेगा। क्योंकि इस राज्य के दूसरी पंक्ति के नेताओं को पहले ही सूबे से बाहर निकाल कर केंद्रीय संगठन में लाने की भूमिका तैयार की जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री की मुख्य चिंता मंत्रियों के प्रदर्शन को ले कर भी है। सरकार की ज्यादातर उपलब्धियां अकेले वित्त मंत्रालय से ही जुड़ी हैं। विदेश मंत्रालय और सड़क एवं परिवहन मंत्रालय भी सकारात्मक चर्चा में है तो गृह मंत्रालय की उपलब्धि अब तक बड़ा वारदात न होने देने तक सीमित है।
इसके अलावा सरकार का एक भी मंत्रालय सरकार के लिए सकारात्मक माहौल खड़ा करने में नाकाम रहा है। यही कारण है कि फेरबदल में मंत्रियों की छुट्टी से ले कर बड़े स्तर पर विभागों में बदलाव किए जाने की भी चर्चा है।