भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए मोदी का खास फॉर्मूला
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मोदी सरकार में न तो भाजपा कार्यकर्ताओं की जायज मांगों की अनदेखी होगी और न ही कार्यकर्ता बिना वजह पार्टी मुख्यालय के साथ-साथ मंत्रियों के यहां डेरा डालेंगे।
कार्यकर्ताओं की समस्याओं के निपटारे के लिए पार्टी ने अलग से एक प्रकोष्ठ बनाने का फैसला लिया है। हालांकि प्रकोष्ठ का अभी नाम नहीं दिया गया है, मगर इसकी जिम्मेदारी नवीन सिन्हा को सौंपी गई है।
इस प्रकोष्ठ के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ता सरकार से संबंधित अपनी तथा क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित मंत्री तक पहुंचाएंगे। प्रकोष्ठ न केवल कार्यकर्ताओं की समस्याओं और मांग को मंत्री तक पहुंचाएगा, बल्कि संबंधित मंत्री से बातचीत कर समस्या का निदान तलाशने के साथ ही इसकी जानकारी तत्काल संबंधित कार्यकर्ता को मुहैया कराएगा।
शिकायतों का निपटारा करेंगे केंद्रीय मंत्री
नई परंपरा के सामने कोई बाधा उत्पन्न न हो, इसलिए इसी हफ्ते से पार्टी मुख्यालय में प्रतिदिन एक केंद्रीय मंत्री के बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
इस दौरान संबंधित मंत्री न केवल पार्टी नेताओं को अपने मंत्रालय से संबंधित कार्यक्रमों से अवगत कराएंगे, बल्कि कार्यकर्ताओं की शिकायतों का निपटारा भी करेंगे। फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि इस दौरान संबंधित मंत्री मीडिया से मुखातिब होंगे या नहीं।
दरअसल वर्ष 2004 में जब भाजपा को आम चुनाव में करारी हार मिली थी, तब इसके लिए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को सबसे बड़ा कारण माना गया था।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच समन्वय के लिए प्रकोष्ठ बनाए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहते कि नई सरकार में भी कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस करे।
लिखित में दर्ज होंगी शिकायतें
उक्त नेता के मुताबिक दरअसल अपनी सरकार बनने पर कार्यकर्ताओं में स्वाभाविक उमंग है। इस कारण यह संभावना बन रही थी कि कार्यकर्ता कहीं अपनी समस्याओं के लिए मुख्यालय और मंत्रियों के यहां बड़ी संख्या में डेरा न डालने लगें। इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए प्रकोष्ठ के गठन का फैसला किया गया।
कार्यकर्ताओं को अब अपनी शिकायत और समस्याओं को लिखित में प्रकोष्ठ में दर्ज कराना होगा। प्रकोष्ठ इसे संबंधित मंत्रालय के मुखिया को भेजने के साथ ही इसका समाधान सुनिश्चित करने के बाद इसकी सूचना संबंधित कार्यकर्ता को मुहैया कराएगा।
पार्टी का मानना है कि चूंकि सारा कुछ लिखित में होगा, इसलिए न तो कार्यकर्ता अनुचित पैरवी कर पाएंगे और न ही मंत्री उचित मामले में आनाकानी कर पाएंगे।