अब चीन को भी लुभाएगा मोदी का मेक इन इंडिया
प्रधानमंत्री मोदी 14 मई को बतौर पीएम अपनी पहली चीन यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरे को मेक इन इंडिया मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री चीनी निवेशकों को लुभाने का भरसक प्रयास करेंगे। उनकी कोशिश द्विपक्षीय व्यापार के भारी अंतर को पाटने की भी होगी।
उनका चीन दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में भारत की आपत्तियों के बावजूद 46 अरब डॉलर के चीन-पाक आर्थिक गलियारे पर समझौता हुआ। यह गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगा।
मोदी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गांव शिआन भी जाएंगे। अमेरिका के मेडिसन स्क्वॉयर की तरह शंघाई में वह करीब चार हजार भारतीयों को संबोधित कर सकते हैं। चीन के अलावा मोदी मंगोलिया व दक्षिण कोरिया भी जाएंगे।
'प्रधानमंत्री को वियतनाम, तिब्बत पर आपत्तियों और जम्मू-कश्मीर में चीन के व्यवहार व घुसपैठ को ध्यान में रखना होगा। इसका मतलब यह भी नहीं कि सामरिक क्षेत्र में चिंताओं का समाधान न हो रहा हो तो आर्थिक सहयोग और सुधार की अनदेखी की जाए' -शशांक, पूर्व विदेश सचिव।
मोदी चीन से इन मुद्दों पर करेंगे बात
•द्विपक्षीय व्यापार में भारत का सालाना घाटा 35 अरब डॉलर।
•चीन जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल के लोगों को देता है नत्थी वीजा।
•अरुणाचल और लद्दाख के भारतीय भूभाग को चीन अपना बताता है और उसके सैनिक भारतीय सीमा में घुसपैठ करते हैं।
•ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध, हिमालय पर्यावरण के मामले में भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करना।
•सीमा का स्पष्ट निर्धारण न होना।
•समुद्री सिल्क रोड के निर्माण में भारत को राजी करना। ताकि अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका सहित दुनिया भर में निवेश का जाल बिछा सके।
•भारत के सेवा उद्योग और चीन के उत्पादन उद्योग को एक साथ लाना।
•श्रीलंका, पाक समेत अन्य पड़ोसी देशों के विकास में सहयोग कर भारत पर दबाव बनाना।
भारत और चीन की अर्थव्यवस्था एक नजर में-
अर्थव्यवस्था के लिहाज से चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि भारत 10वें नंबर पर है।
चीन का सकल घरेलू उत्पाद 9.2 खरब डॉलर है जबकि भारत का सकल घरेलू उत्पाद 1.9 खरब डॉलर है।
चीन का निर्यात 2.3 खरब डॉलर का है तो भारत का निर्यात 317 अरब डॉलर है।
चीन के पास विदेशी मुद्रा भंडार चार खरब डॉलर का है तो भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार 343 अरब डॉलर का है।