मोदी यूपी में बिगाड़ेंगे 'सबका' खेल, लगाएंगे अर्धशतक!
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अलग-अलग ओपिनियन पोल के मुताबिक मोदी अगले आम चुनाव में पार्टी की नैया पार लगा सकते हैं जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की किस्मत बदलने में नाकाम रह सकते हैं।
इंडिया टुडे ग्रुप-सी वोटर के ताजा सर्वे के मुताबिक लोकसभा चुनाव-2014 में यूपी में कांग्रेस का सफाया हो सकता है जबकि बिहार में बीजेपी को फायदा हो सकता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी बीजेपी को फायदा हो सकता है।
कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले यूपी के अमेठी और रायबरेली को छोड़कर पूरे सूबे में कांग्रेस की नैया डूबती दिख रही है। सर्वेक्षण के मुताबिक अगर अभी चुनाव हुए तो यूपी में कांग्रेस केवल चार सीटों तक सिमट सकती है। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में पार्टी को 21 सीटें मिली थीं।
ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक यूपी में बीजेपी की सीटें 10 से बढ़कर 30 होने का अनुमान है। सपा को पिछली बार की 23 की तुलना में 20 सीटें मिल सकती हैं वहीं, बीएसपी की सीटें 20 से बढ़कर 24 हो सकती हैं। अमेठी में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास से कोई खतरा नहीं है।
बीजेपी को मिलेगी 49 सीटें?
लोकसभा चुनाव-2014 के होने से पहले ही ओपिनियन पोल की आई बाढ़ में बीजेपी ने अपना परचम लहरा दिया है।
देश की सियासी नब्ज टटोलने के लिए आईबीएन7 और CSDS का देशव्यापी सर्वे लाया है। 5 से 15 जनवरी के बीच CSDS ने देश के 18 राज्यों में ये सर्वे किया। 1081 स्थानों पर जाकर कुल 291 सीटों पर 18591 लोगों के बीच यह सर्वेक्ष्ाण्ा किया गया। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के नतीजे देखें।
सीएसडीएस के सर्वे में पता चलता है कि अगर अभी चुनाव हों तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी बाकी सभी पार्टियों को पीछे छोड़ती नजर आ रही है। आईबीएन7 के लिए सीएसडीएस ने सर्वे किया।
यूपी में अगर अभी चुनाव हों तो 80 सीटों में से बीजेपी को 41 से 49 सीटें मिल सकती है। कांग्रेस 4 से 10 सीटों पर सिमट जाएगी। समाजवादी पार्टी महज 8 से 14 सीटें पाएगी, जबकि बीएसपी के हाथ 10 से 16 सीटें लगेंगी। इसके अलावा अन्य के खाते में 2 से 6 सीटें जा सकती है।
गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटों वाला राज्य यूपी से बीजेपी के पास केवल 10 सीटें हैं। जबकि 2009 में सपा को 22, बसपा को 20 और कांग्रेस के हाथ 21 सीटें लगी थी। वहीं बीजेपी को मोदी के मिशन 272 को सबसे अधिक उम्मीद यूपी से ही है।
तो क्या मोदी पीएम बनने वाले हैं?
वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों में यूपी की अहमियत को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियों में रस्साकशी जारी है। सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों की नज़रें इस राज्य की 80 सीटों पर टिकी हैं।
एबीपी न्यूज-नीलसन द्वारा 28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच राज्य में कराए गए ओपिनियन पोल के नतीजे के मुताबिक, 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी का जादू चलता दिख रहा है। बीजेपी को यहां भारी जीत मिलती दिख रही है। सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को राज्य में 35 सीटें मिल सकती हैं।
एबीपी न्यूज-नीलसन के ताजा सर्वे के मुताबिक, अगर अभी चुनाव हुए तो बुंदेलखंड की 4 सीटों में से 2 पर बीजेपी, जबकि 1-1 सीट पर एसपी-बीएसपी का कब्जा होगा। यहां आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाएंगी। मालूम हो कि 2009 में बीजेपी यहां खाता तक नहीं खोल पाई थी।
यानी पिछले साल हुई नरेंद्र मोदी की झांसी रैली का बीजेपी को जबर्दस्त फायदा मिलने वाला है। उधर, दिल्ली विधानसभा चुनाव में जोरदार प्रदर्शन कर पहली बार में ही सत्ता हथियाने वाली 'आप' का यहां कोई असर नहीं दिख रहा है।
यूपी में यहां-यहां जीतेगी भाजपा?
मध्य-उत्तर प्रदेश (अवध क्षेत्र) की 12 सीटों में से बीजेपी को 5, बीएसपी को 3, एसपी को 2 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलेंगी। वहीं, 'आप' को यहां से एक भी सीट नहीं मिलेगी।
पश्चिमी यूपी की 29 सीटों में बीजेपी को 11, कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन को 6, एसपी को 5, बीएसपी को 4 और अन्य के खाते में 1 सीट जाएगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां से 'आप' को 2 सीटें मिलने का अनुमान है।
जानकारों की मानें तो मुजफ्फरनगर दंगों से निपटने में नाकाम रही राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी एसपी से लोग खासे नाराज हैं। वहीं, जनता के बीच कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की करप्शन और महंगाई से निपटने में फेल होने वाली सरकार की इमेज बनी है।
पूर्वी यूपी की 35 सीटों में से 17 बीजेपी को, एसपी को 6, बीएसपी को 7, कांग्रेस को 4 जबकि अन्य के खाते में एक सीट जाएगी।
कौन होगा किंग और कौना होगा किंगमेकर?
वहीं पूरे देश में भी एक अलग तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। उत्तराखंड में कांग्रेस को चार सीटों का नुकसान तो बीजेपी को इतनी ही सीटों का फायदा होता दिख रहा है।
पिछले चुनाव में कांग्रेस को पांच सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था।
सर्वे के मुताबिक बिहार में सत्तारुढ़ जेडी(यू) से अलग होने का फायदा बीजेपी को मिल सकता है। पिछले आम चुनाव में बीजेपी और जेडी(यू) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस वक्त बीजेपी के खाते में केवल 12 सीटें जबकि जेडी(यू) के खाते में 20 सीटें गई थीं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
अगर आज की तारीख में चुनाव हुए तो बीजेपी को 22 सीटें मिलती हैं जबकि जेडी(यू) के सीटों की संख्या घटकर महज चार तक चली जाएगी।
बिहार में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी को सात सीटों का फायदा होता दिख रहा है और यह आंकड़ा 11 तक पहुंचने का अनुमान है। लोक जनशक्ति पार्टी का खाता खुल सकता है। लेकिन उसे एक ही सीट से संतोष करना पड़ सकता है। कांग्रेस की संख्या (2) में कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा है।
किसकी लहर आएगी काम?
छत्तीसगढ़ में बीजेपी को 2 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है और पार्टी की सीटें 10 से घटकर आठ रह सकती हैं। राज्य में कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है और उसकी सीटें 1 से बढ़कर तीन होने का अनुमान है।
झारखंड में मोदी का जादू चलता नहीं दिख रहा है और पार्टी की सीट संख्या आठ की आठ ही रहने का अनुमान है। यही हालत झारखंड मुक्ति मोर्चा (2) और कांग्रेस (1) की रहने वाली है। झारखंड विकास मोर्चा को एक सीट का फायदा होता दिख रहा है और उसे दो सीटें मिल सकती हैं।
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को भारी नुकसान होता दिख रहा है। पार्टी की सीटें 33 से घटकर 7 रह सकती हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसदों की संख्या 2 से बढ़कर 13 होने का अनुमान है जबकि वाईएसआर कांग्रेस को 13 सीटें मिल सकती हैं।
तेलुगु देशम पार्टी को दो सीटों का फायदा हो सकता है और यह आठ तक पहुंच सकता है। बीजेपी का खाता खुलना मुश्किल लग रहा है।
कांग्रेस का सूपड़ा होगा साफ?
सर्वे के मुताबिक दिल्ली में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत विधानसभा चुनाव की तरह रहने वाली है। यहां कांग्रेस का सूपड़ा साफ होता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक दिल्ली में कांग्रेस का खाता खुलना भी मुश्किल है।
आम आदमी पार्टी के खाते में पांच सीटें जबकि बीजेपी की झोली में दो सीटें जा सकती हैं।
पंजाब में कांग्रेस को दो सीटों का नुकसान होने का अनुमान है और यह छह तक सिमट सकती है। शिरोमणि अकाली दल के खाते में एक सीट बढ़कर पांच होने का अनुमान है। बीजेपी को भी एक सीट का फायदा होता दिख रहा है और यह दो हो सकता है।
हरियाणा में कांग्रेस की सीटें 9 से घटकर एक तक सिमट सकती हैं। सूबे में बीजेपी का खाता खुल सकता है और इसे छह सीटें मिल सकती हैं। 'आप' और इनेलो के खाते में एक-एक सीटें जाने का अनुमान है। एक सीट हरियाणा जनहित कांग्रेस के खाते में जा सकती है।
गुजरात में सत्तारुढ़ बीजेपी को छह सीटों का फायदा हो सकता है और यह आंकड़ा 21 तक पहुंचने का अनुमान है। कांग्रेस को छह सीटों का नुकसान हो सकता है और पार्टी के खाते में केवल पांच सीटें ही रह सकती हैं।
महराष्ट्र में कौन जीतेगा जंग?
महाराष्ट्र में कांग्रेस को आठ सीटों का नुकसान होता दिख रहा है और यह नौ तक सिमटने का अनुमान है। शिवसेना को तीन सीटों का फायदा हो सकता है और पार्टी के सीटों की संख्या 14 तक पहुंच सकती है। बीजेपी के सीटों की संख्या बढ़कर नौ से 14 होने का अनुमान है।
एनसीपी को तीन सीटों का नुकसान होता दिख रहा है और यह पांच तक सिमट सकती है। आरपीआई और एमएनएस के खाते में दो-दो सीटें आ सकती हैं। 'आप' को भी एक सीट मिल सकती है।
येदियुरप्पा की वापसी के बावजूद कर्नाटक में बीजेपी को घाटा होता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक राज्य में पार्टी की लोकसभा सीटों की संख्या 19 से घटकर 13 हो सकती है। कांग्रेस को छह सीटों का फायदा होने का अनुमान है और यह 12 तक पहुंच सकती है।
यहां होगा कांग्रेस को फायदा?
ओडिशा में सत्तारुढ़ बीजू जनता दल को एक सीट का नुकसान होता दिख रहा है और पार्टी 13 सीटों तक सिमट सकती है। कांग्रेस को दो सीटों का फायदा होता दिख रहा है और यह आठ तक पहुंच सकती है। बीजेपी का इस बार भी खाता खुलता नहीं दिख रहा है। सीपीआई का इस बार खाता खुलना मुश्किल है।
हिमाचल में बीजेपी और कांग्रेस की सीटों में कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा है। पिछले आम चुनाव में बीजेपी के खाते में तीन जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट गई थी।
जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस को दो सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। अब्दुल्ला की पार्टी इस बार एक सीट तक सिमट सकती है। कांग्रेस को भी एक सीट का नुकसान होता दिख रहा है और यह एक सीट तक सिमट सकती है। बीजेपी का इस बार खाता खुल सकता है और इसे दो सीटें मिलने का अनुमान है। पीडीपी का भी बीजेपी जैसा हाल हो सकता है।
तो क्या इस बार भी बनेगी गठबंधन की सरकार?
तमिलनाडु में डीएमके को 13 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक पार्टी को केवल पांच सीटें ही मिल सकती हैं।
राज्य की सत्तारुढ़ एआईडीएमके को 20 सीटों का फायदा होने का अनुमान है और यह आंकड़ा 29 तक पहुंच सकता है। कांग्रेस का सूपड़ा साफ होता दिख रहा है और इस बार उसका खाता खुलना भी मुश्किल है। अनुमान है कि कांग्रेस के खाते की 8 में एक भी सीट नहीं बच पाएगी।
असम में कांग्रेस की सीटों में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है। पार्टी की सीटें सात ही रह सकती हैं। बीजेपी को एक सीट का फायदा हो सकता है और यह पांच तक पहुंच सकती है। पिछले चुनाव में एक सीट पाने वाली असम गण परिषद का इस बार खाता भी नहीं खुलता दिख रहा है।
कौन जीतेगा लोकसभा चुनावा-2014 का रण?
सर्वे के मुताबिक अगर आज की तारीख में आम चुनाव हुए तो एनडीए के खाते में 207 से 217 सीटें आ सकती हैं। वहीं, यूपीए को 98 से 108 सीटें मिल सकती हैं।
झामुमो-इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 2-2 जबकि नेशनल कांफ्रेंस और केरल कांग्रेस को एक-एक सीट मिल सकती है।
2010 के बाद पहली बार एनडीए के खाते में 200 से अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके बाद से एनडीए के साथ साथ थर्ड फ्रंड की सीटों की संख्या और वोट शेयर में बढोतरी होती गई।
एनडीए के सहयोगी दलों में शिव सेना को 14 सीटें मिलने का अनुमान है जो पिछले चुनाव की तुलना में तीन अधिक है। शिरोमणि अकाली दल को पांच सीटें, आरपीआई को 2, नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी को एक, हरियाणा जनहित कांग्रेस को 1 और स्वाभिमानी पक्ष को एक सीट मिल सकती है।
यूपीए के सहयोगियों में एनसीपी को चार सीटों का नुकसान हो सकता है और यह पांच तक सिमट सकती है। रालोद को भी चार सीटों का नुकसान हो सकता है और यह एक तक सिमट सकती है।