महिलाओं के लिए मोदी सरकार का प्लान तैयार
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आधी आबादी को सशक्त बनाने के मोदी सरकार के वादे के अगले पांच साल में पूरा होने का संकेत राष्ट्रपति ने सोमवार को अपने अभिभाषण में दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण उपलब्ध कराने के प्रति वचनबद्ध है।
वहीं, लड़कियों को बचाने और उनकी शिक्षा के लिए व्यापक अभियान शुरू करने के साथ इस संदर्भ में योजनाएं भी तैयार होंगी। महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वारदातों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे मामलों को सरकार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
वहीं, न्याय प्रणाली को मजबूत करने की बात भी उन्होंने अपने अभिभाषण में की है। हालांकि पिछले दो दशकों में महिला आरक्षण का मुद्दा उठाने वाली यह सातवीं सरकार है।
संसद में मिलेगी जल्द मंजूरी
यूपीए के पहले कार्यकाल में इस विधेयक को संसद में पेश किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद यह पारित नहीं हो पाया। यूपीए-दो में इसे राज्यसभा में पेश कर पारित कराया गया।
लोकसभा से हरी झंडी मिलने का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। बताते चले ही मोदी सरकार बनने के बाद सरकारी महकमे से लेकर कारपोरेट जगत तक में कामकाज के तौर तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की गैर जिम्मेदराना रवैये से महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले कम नहीं हुए हैं।
यही वजह है कि राष्ट्रपति को अभिभाषण में हिंसा की वारदातों पर जीरो टॉलरेंस का जिक्र करना पड़ गया।
राष्ट्रपति ने भाषण में सुनाएं सरकार के वादे
राष्ट्रपति ने सुलभ, किफायती और प्रभावशाली स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली के लिए नई स्वास्थ्य नीति तैयार करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए नेशनल हेल्थ इंश्योरेंश मिशन शुरू करेगी। योग और आयुष को प्रोत्साहित किया जाएगा।
हेल्थकेयर प्रोफेशनल की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा और प्रशिक्षण में बदलाव किये जाएंगे। प्रत्येक राज्य में एम्स जैसे संस्थान खोल कर आम आदमी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।