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अहम मुकदमों पर मोदी सरकार की नजर

Thu, 26 Jun 2014 07:42 AM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 07:42 AM IST
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modi's government an eye on important cases pending in apex court

सुप्रीम कोर्ट में लंबित अहम मामलों पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नजर है। सरकार के निर्देश पर कानून मंत्रालय इस संबंध में सूची तैयार करने में सक्रिय हो गया है।

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मंत्रालय ने कोयला घोटाला, गैस विवाद, रामसेतु, जाट आरक्षण, समलैंगिकता समेत अन्य महत्वपूर्ण लंबित मुकदमों की सूची, उनकी स्थिति और आगे की प्रक्रिया के विधि अधिकारियों को ताकिद कर दिया है।
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अधिकारियों के मुताबिक कई मामलों में सरकार को अपना रुख बदलना है। शायद इसी के चलते पीएमओ भी लंबित मामलों पर रुचि ले रहा है।

कई महत्वपूर्ण मामले हैं अदालत में

modi's government an eye on important cases pending in apex court

कानून मंत्रालय की ओर से सर्वोच्च अदालत परिसर में स्थित सेंट्रल एजेंसी (केंद्र का विधि विभाग) को सभी खास मामलों की सूची अदालत के अवकाश खत्म होने से पहले मुहैया कराने को कहा है। उस सूची के साथ विधि अधिकारियों लंबित मामलों पर अन्य बयौरा भी देना है।

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार के सामने तमाम ऐसे मामले सर्वोच्च अदालत का अवकाश खत्म होते ही मुंह बाए खड़े होंगे। इसमें पिछली सरकार में हुए घोटालों से जुड़े मामले, समलैंगिकता, लोकपाल की नियुकित जैसे कई मामले हैं।

कई मामलों में सरकार का पक्ष और रुख बदलना काफी जटिल है, कयोंकि मुकदमे की स्थिति के मुताबिक ऐसा करना प्रक्रियागत नहीं होगा। जैसे कि जनवरी में कोल बलाक आवंटन पर सुरक्षित किए गए मुद्दे पर चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की पीठ जल्द फैसला दे सकती है। इस फैसले में अदालत आवंटनों की वैधता और भविष्य में आवंटन की प्रक्रिया तय कर सकती है। इसका प्रभाव नई सरकार पर भी पड़ेगा।

प्रधानमंत्री का कार्यालय हुआ सक्रिय

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मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ताकिद किए जाने के बाद ही कानून मंत्रालय इस मामले में सक्रिय हुआ है। कयोंकि सरकार कानूनी मामले को कोताही नहीं चाहती और हरेक कदम सही दिशा में उठाना चाहती है।

ताकि पिछली सरकार की गलतियों का खामियाजा उसे नहीं भुगतना पड़े। सीपीआई नेता गुरुदास दास गुप्ता की ओर से गैस मूल्य को लेकर दायर किया गया मामला भी नई सरकार के गले की हड्डी बन सकता है।

ऐसे में सरकार को अंतरराष्ट्रीय मूल्यों के फेरबदल की नीति अदालत के समक्ष बारीकी से रखनी होगी। क्‍योंकि एक तरफ महंगाई को रोकना है तो दूसरी ओर अदालत को भी अपने सटीक रुख से एनडीए सरकार को संतुष्ट करना है।

सूत्रों की माने तो ओ.फर्नांडीस (रामसेतु) के मामले में सरकार को रुख बदलने में खासी परेशानी नहीं होगी। सेंट्रल एजेंसी के अधिकारी सूची तैयार करने में जुट गए हैं और जल्द ही महत्वपूर्ण मुद्दों की सूची कानून मंत्रालय को भेज दी जाएगी।

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