विवादों के बादशाह अमित शाह से जुड़ी अनसुनी बातें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साफ-स्वच्छ छवि वाली सरकार चलाने वाले नेता के लिए हत्या और फिरौती के आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति का अहम सहयोगी के रूप में काम करना एक भारी बोझ जैसा लग सकता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है।
यहां नेता देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब सजाने वाले नरेंद्र मोदी हैं और यह शख्स अमित शाह है। राष्ट्रीय चुनावों में भाजपा की नुमाइंदगी कर रहे मोदी और पूर्व स्टॉकब्रोकर शाह की पहली मुलाकात 1980 के दशक में हुई, जब दोनों वॉलेंटियर हुआ करते थे।
रईस पिता के बेटे हैं शाह
अमित शाह के पिता अनिलचंद्र शाह एक रईस कारोबारी थे। शाह के पास बायो-केमेस्ट्री में स्नातक डिग्री है। वो आरएसएस के वॉलेंटियर रहे और साथ ही भाजपा की युवा इकाई एबीवीपी के नेता भी रहे।
स्टॉक ब्रोकर के रूप में काम करते वक्त वो भाजपा से जुड़े और लालकृष्ण आडवाणी के करीब आए। उन्हें जब गुजरात स्टेट फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड का चेयरमैन बनाया गया, तो इस पद को संभालने वाले वो सबसे युवा व्यक्ति थे। बाद में वो अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेविट बैंक के चेयरमैन भी बने।
'मोदी तक पहुंचने का रास्ता हैं शाह'
बीते कई साल में अमित शाह धीरे-धीरे मोदी के सबसे करीबी और राजनीतिक प्रबंधक में तब्दील हो गए। अगर भविष्य में मोदी की अगुवाई में कोई सरकार बनती है, तो गठीले बदन और दाढ़ी रखने वाले 50 वर्षीय शाह को अहम भूमिका मिलने की उम्मीद है।
भाजपा के एक नेता ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "पार्टी में यह बात सभी लोग जानते हैं कि मोदी तक पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता अमित शाह वाला है।"
विवादित बयान ने फिर फंसाया
अमित शाह इन दिनों के घेरे में हैं। दरअसल, उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक भाषण देते हुए अपने समर्थकों से कहा था, "अगर अपमान का बदला लेना है, तो ऐसा वोट के जरिए किया जा सकता है।"
पिछले साल अगस्त-सितंबर में साम्प्रदायिक दंगों की आंच झेलने वाले इलाके में यह बयान देने के बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को सुरक्षा और मुआवजा देती है, जिन्होंने हिंदुओं को मारा है।
पिछले साल मिला यूपी का जिम्मा
मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में भड़के इन दंगों में दो समुदाय के काफी लोग मारे गए थे, जबकि सैकड़ों के घर तबाह हो गए। कई लोगों को ठंड के दिन राहत कैंप में गुजारने पड़े, जहां हालात काफी खराब थे। भाजपा और सपा-बसपा के नेताओं पर भी हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे।
भाजपा ने मई, 2013 में अमित शाह को उत्तर प्रदेश का मुख्य रणनीतिकार नियुक्त किया था, जहां जीतना कितना जरूरी है, यह सभी जानते हैं। अगर मोदी को पीएम की कुर्सी तक पहुंचना है, तो भाजपा को हर हालत में इस सूबे में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। चुनावी नतीजे 16 मई को सामने आएंगे।
मोदी के सबसे बडे़ विश्वासपात्र
विरोधियों का कहना है कि अमित शाह ने मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए इस तरह का बयान दिया है। हालांकि, अमित शाह को इन बातों से शायद कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनके विवादों में घिरने का यह पहला मामला नहीं है। उनका ध्यान अपने खास मिशन पर है।
अमित शाह ने कहा, "मैं आपको सिर्फ इतना कह सकता हूं कि न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश भर में मोदी की लहर है।" चुनावी सर्वे के मुताबिक भाजपा यूपी की आधी से ज्यादा सीट जीत सकती है। हालांकि, दंगों से जुड़े दो उम्मीदवारों को टिकट देने को लेकर उसकी आलोचना हो चुकी है।
आलोचक भी मानते हैं लोहा
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "जाहिर है, वो हमारे सबसे समझदार रणनीतिकार और उत्तर प्रदेश के प्रभारी हैं। उन्हें उम्मीदवारों के नामांकन के लिए अहम जानकारी दी जा रही है।"
भाजपा के जिन नेताओं को अमित शाह का दूरी बनाकर रहना पसंद नहीं, वो भी उनकी समझदारी-राजनीतिक चतुरता के कायल हैं। साथ ही मोदी के प्रति उनकी वफादारी का भी काफी सम्मान होता है। और भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने भी इस वफादारी का पूरा मोल दिया है।
फर्जी एनकाउंटर से भी बदनाम हुए
फर्जी एनकाउंटर, स्नूपगेट कांड या भड़काने वाला कथित भाषण, मोदी ने शाह का हमेशा साथ दिया है। इन सभी में सबसे बड़ा मामला साल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी बीवी कौसर बी का तथाकथित फर्जी एनकाउंटर शामिल है। उस वक्त भी गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी थे।
तत्कालीन गुजरात सरकार में गृह राज्य मंत्री शाह पर साजिश रचने का आरोप लगा। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि यह रैकेट चलाने वाले शेख को ठिकाने के लिए किया गया फर्जी एनकाउंटर था। गुजरात पुलिस का दावा था कि शेख आतंकवादी है, जो मोदी को मारने आया था।
निर्दोष बताया, लेकिन इस्तीफा दिया
2010 में सीबीआई ने शाह पर हत्या, सबूतों को नष्ट करने की कोशिश और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा। हालांकि, शाह कहते रहे हैं कि वो निर्दोष हैं, लेकिन उन्होंने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
नरेंद्र मोदी खुद को भ्रष्टाचार मुक्त नेता के रूप में पेश कर रहे हैं, ऐसे में अमित शाह के खिलाफ लगे आरोपों का कोई खास जिक्र अब तक नहीं हुआ था। लेकिन उनके भाषण ने एक बार फिर निगाहें खींच ली हैं।
वंजारा की चिट्ठी ने मचाया तूफान
अमित शाह यूं काफी सख्त माने जाते हैं। गुजरात के गृह मंत्री के रूप में उनका आठ साल का कार्यकाल अपराध के खिलाफ तेज और सख्त रुख अपनाने के लिए जाना जाता है।
2004 में उनके पद पर रहते हुए एक बार फिर दो किशोर समेत चार लोगों को एक और तथाकथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया। पिछले साल पूर्व शीर्ष पुलिसकर्मी डी जी वंजारा ने जेल से लिखे एक पत्र से तहलका मचा दिया। इसमें उन्होंने शाह पर गंदे तरीके अख्तियार करने का आरोप लगाया।
फिर फंसे स्नूपगेट कांड में
अमित शाह एक बार फिर स्नूपगेट कांड में फंसे। इस कांड में उनके और पुलिसकर्मियों के बीच फोन पर हुई बातचीत का ब्योरा था। यह बातचीत समाचार वेबसाइट गुलेल ने जारी की थी। इसमें शाह कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को 'साहेब' के इशारे पर एक महिला का पीछे करने के लिए बोल रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि साहेब कोई और नहीं, बल्कि मोदी थे।
कांग्रेस का कहना है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए, जबकि मोदी सरकार सफाई देती रही कि यह सर्विलांस लड़की और उसके पिता के आग्रह पर मुहैया कराई गई सुरक्षा थी। शाह के मुताबिक यह कांग्रेस की साजिश है।