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मोदी की बड़ी जीत, काले धन पर जी-20 भारत के साथ

Sun, 16 Nov 2014 10:01 PM IST
Updated Sun, 16 Nov 2014 10:01 PM IST
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Modi's big victory on black money issue in G-20.

जी-20 के मंच पर काले धन के मसले पर भारत के रुख को बड़ी कामयाबी मिली है।

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इस समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर सूचनाओं को साझा करने में पारदर्शिता और खुलापन लाने की दलील को सदस्य देशों से जबर्दस्त समर्थन मिला है। सदस्य देशों ने सूचना साझा करने के लिए 2017 तक नए तंत्र को क्रियान्वित करने पर अपनी मुहर लगा दी है।

दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी-20 सम्मेलन के अंतिम दिन मोदी ने काले धन से पैदा हुई चुनौती से निपटने के लिए करीबी वैश्विक सहयोग की बात कही।
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मोदी ने कहा कि नया तंत्र विदेश में जमा काले धन के बारे में सूचनाएं हासिल करने और उसे वापस स्वदेश ले जाने के लिए एक कारगर हथियार साबित होगा। इस तंत्र को भारत के समर्थन की घोषणा करते हुए उन्होंने दुनिया के देशों खासकर काले धन के पनाहगाह देशों से इस नई संधि के मुताबिक सूचनाएं साझा करने की अपील की।
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इसके साथ ही उन्होंने सूचनाओं के आदान-प्रदान में भारत के भरपूर सहयोग का भरोसा दिलाया। दुनिया की 85 फीसदी जीडीपी पर कब्जा रखने वाले देशों के संगठन जी-20 के मंच पर मोदी ने कर चोरी के मसले पर चिंता जताते हुए कहा कि पूंजी और तकनीक की बढ़ी गतिशीलता ने कर चोरी और अर्जित लाभ को कमतर दिखाने के नए-नए तरीके ईजाद किए हैं।

काले धन के पनाहगाह देशों से पीएम की अपील

Modi's big victory on black money issue in G-20.

सम्मेलन में ‘डिलिवरिंग ग्लोबल इकोनॉमिक रिसाइलेंस’ पर चर्चा के दौरान मोदी ने आशा व्यक्त की कि ‘बेस एरोजन एंड प्रॉफिट शेयरिंग’ (बीईपीएस) तंत्र विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की चिंताओं को पूरी तरह से दूर करेगा।

मोदी ने कहा कि हालांकि हर देश की अपनी घरेलू प्राथमिकताएं हैं लेकिन विश्व समुदाय को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में रेल मंत्री सुरेश प्रभु और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि मसौदा घोषणा पत्र में पारदर्शिता का जिक्र नहीं था लेकिन पीएम मोदी की मजबूत दलीलों के बाद इसे अंतिम घोषणापत्र में शामिल किया गया।

खाताधारकों की जानकारी साझा करेंगे जी-20 देश
जी-20 के सदस्य देशों ने वर्ष 2017 तक कर सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए नए तंत्र को क्रियान्वित करने पर अपनी मुहर लगा दी है। नए तंत्र से कर सूचनाएं हासिल करने में बड़ा बदलाव होगा।

सरकारें अपनी वित्तीय संस्थाओं से खाताधारकों के बारे विस्तृत जानकारी हासिल कर उन्हें वार्षिक आधार पर सदस्य देशों के साथ साझा कर सकेंगी। भारत कर चोरी के बारे में सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए इस तंत्र का लंबे समय से वकालत करता रहा है, जिससे कि काले धन की समस्या से निपटने में सहायता मिले।

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