बिहार चुनाव से पहले मोदी सरकार को आई जेपी की याद
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बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार को संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की याद आई है। आपातकाल लागू होने के 40 वर्ष पूरा होने की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में संस्कृति मंत्रालय के जेपी के जन्म स्थल सिताब दियारा में राष्ट्रीय स्मारक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इस राष्ट्रीय स्मारक के तहत एक वर्चुअल (आभासी) संग्रहालय के अतिरिक्त एक अनुंसधान-अध्ययन संस्थान की भी स्थापना की जाएगी।
इस संस्थान में गांधीवादी विचारधारा, प्रजातंत्र, राष्ट्र निर्माण में पंचायतों के सशक्तिकरण और खादी पर अध्ययन और अनुसंधान होगा। इसके अलावा इसी परिसर में लोकनायक खादी गौरव संवर्धन केंद्र भी खोला जाएगा, जहां महिलाएं खादी के तिरंगे का निर्माण करेंगी।
'किसी से नहीं ली जेपी की सुध'
कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देने के क्रम में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद यह बताना नहीं भूले की इससे पहले वाजपेयी सरकार केकार्यकाल के दौरान ही लोकनायक को भारत रत्न से सम्मानित करने के अलावा उनकी जन्मशती मनाई गई थी।
प्रसाद ने तो इस दौरान संपूर्ण क्रांति में भाग लेने वाले पार्टी विरोधी नेताओं पर सियासी हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि संपूर्ण क्रांति में हिस्सा लेने वाले कई अन्य नेता भी राज्यों और केंद्र की सत्ता में रहे।
मगर किसी ने उस दौरान जेपी की सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। उल्लेखनीय है कि आपातकाल की याद दिलाने के लिए केन्द्र सरकार इसकी 40वीं वर्षगांठ को जोर-शोर से मना रही है।
लालू नीतीश पर सियासी निशाना
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और मोदी सरकार ने बिहार से जुड़ी हस्तियों की विरासत पर मजबूत दावा पेश कर रही है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को उनकी किताबों के जरिए अचानक याद करने वाली पार्टी और सरकार ने अब जेपी की विरासत पर भी दावा ठोक दिया है।
बुधवार को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जेपी के गांव सिताब दियारा के लाला के टोला में राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना संबंधी प्रस्ताव पर सहमति की मुहर लगा दी गई।
दरअसल अपने इस प्रयास से पार्टी बिहार में अपने प्रतिद्वंद्वी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सियासी निशाना साधना चाहती है।
लालू और नीतीश जेपी क्रांति में गए थे जेल
उल्लेखनीय है कि लालू और नीतीश न केवल आपातकाल के दौरान संपूर्ण क्रांति में हिस्सा ले कर जेल गए थे, बल्कि दशकों तक कांग्रेस विरोध की राजनीति की थी। अब जबकि सूबे में राजग विरोधी राजद-जदयू के गठबंधन में कांग्रेस का शामिल होना तय है, ऐसे में पार्टी की योजना जेपी के बहाने लालू-नीतीश को घेरने की है।
कैबिनेट की बैठक के बाद गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्मारक के लिए जल्द ही डीपीआर तैयार किया जाएगा। स्मारक की स्थापना के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि आपातकाल देश के प्रजातंत्र का एक काला अध्याय है। करीब 4 दशक पहले कांग्रेस ने आपातकाल थोपकर प्रजातंत्र, लोगों के मौलिक अधिकारों की हत्या करने की कोशिश की थी। चूंकि उस दौरान लोकनायक की अगुवाई में ही देश आपातकाल के चक्रव्यु से बाहर आ पाया था।