नरेंद्र मोदी को दिखने लगी हार, खुद ही दे बैठे सबूत!
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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में भले भाजपानीत एनडीए के पूर्ण बहुमत तक पहुंचने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि चुनावी राजनीति में सारा खेल आंकड़ों का है।
मोदी को भी शायद इस बात का इल्म हो गया कि 16 मई के बाद शायद वो नतीजे हाथ में नहीं आएंगे, जिसकी उम्मीद वो कर रहे हैं। दरअसल, भाजपा के लिए 272 का जादुई आंकड़ा छूना आसान कतई नहीं है।
यही वजह है कि वो अब चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाएं खंगालने को लेकर खुला रुख दिखा रहे हैं। मोदी ने एक इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं कि चुनाव प्रचार में वो जिन पर हमला बोल रहे हैं, नतीजों के बाद उनसे भी हाथ मिलाया जा सकता है।
ममता, जयललिता पर डाले डोरे
टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने यूं तो कई मुद्दों पर जवाब दिए, लेकिन जिस बात पर सबसे ज्यादा निगाह गई, वो उन राजनीतिक दलों से हाथ मिलाने को लेकर है, जो फिलहाल मोदी के कट्टर दुश्मन बने हुए हैं।
बसपा प्रमुख मायावती, टीएमसी नेता ममता बनर्जी और एआईडीएमके सुप्रीमो जे जयललिता पर हमला करने और उनके हमले सहने से बेपरवाह भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने ऐसा ही कुछ इशारा किया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान तल्ख आलोचना का यह मतलब कतई नहीं है कि इन राजनीतिक दलों के साथ चुनावों के बाद कोई गठबंधन नहीं किया जा सकता है।
'हमलों का मतलब विकल्प बंद नहीं'
जब नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि क्या चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे पर हमले बोलने का यह मतलब नहीं है कि चुनावों के बाद इन दलों से हाथ मिलाने की संभावना खत्म हो जाती है, उन्होंने कहा, "यह दरवाजा खुले रखने की रणनीति भी तो हो सकती है।"
जब इस बारे में और कुरेदा गया, तो उन्होंने आगे कहा, "मुझे जो भी स्पष्टीकरण देना था, मैं दे चुका हूं। यह विकल्प खुले रखने की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है।"
और पूछने पर उन्होंने मामला दबाने की कोशिश की। मोदी ने कहा, "अब इस बारे में और कुछ कहने के लिए बाकी नहीं रह गया है। जो कहना है, वो 12 मई के बाद बोलूंगा।"
नतीजों के बाद दिखेगी असल राजनीति
गुजरात के मुख्यमंत्री ने यह अंदाजा देने की कोशिश भी की कि चुनाव प्रचार की गर्माहट में जो वाकयुद्ध होता है, उसका यह मतलब नहीं है कि चुनाव बाद का गठबंधन उसी से तय होता है।
उन्होंने कहा, "राजनीति इस आधार पर नहीं की जाती कि चुनाव प्रचार के दौरान क्या-क्या कहा गया।" मोदी ने हालांकि जोर दिया कि भाजपा सबसे ज्यादा चुनाव पूर्व सहयोगियों के साथ मैदान में उतरी है और एनडीए को अपने बूते सरकार बनाने का बहुमत मिलेगा।
मोदी ने कहा, "देश के इतिहास में पहली बार भाजपा 25 दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन संग लड़ाई में है। यहां तक कि एनडीए के शासन के वक्त भी हमने चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं था। कांग्रेस ने इतने बड़े पैमाने पर कभी गठबंधन नहीं किया।"
राहुल ने ममता-मोदी पर ली चुटकी
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी और ममता के बीच जारी जंग में कूदने का फैसला किया। उन्होंने एक तरफ ममता बनर्जी की तारीफ कर उन पर डोरे डालने की कोशिश की, वहीं अपना वोटबैंक बचाने का प्रयास भी किया।
उन्होंने कहा कि ममता शब्द में पहले म का मतलब है ममता बनर्जी और दूसरे म से मोदी बना है। यानी ममता और मोदी, दोनों एक-दूसरे से मिले हुए हैं और चुनाव बाद यह सामने आ जाएगा।
हालांकि, ममता बनर्जी ने हाल में बयान दिया था कि वो किसी भी कीमत पर चुनाव बाद एनडीए के पाले में नहीं जाएंगी। उनका कहना है, "भीख मांगी जाएगी, तो भी मैं उनके साथ नहीं जाऊंगी।"
प्रियंका पर हमले की वजह बताई
जब चुनाव बाद के गठबंधन के बारे में पूछा गया, तो नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सवाल प्रासंगिक नहीं है, क्योंकि भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा, "भाजपा को बहुमत मिलेगा और हम राजीव गांधी सरकार के बाद अब तक की सबसे मजबूत और स्थाई सरकार बनाएंगे।"
मोदी ने प्रियंका वाड्रा पर हमले को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर कोई शख्स सक्रिय राजनीति में न होने के बावजूद उन पर लगातार हमले बोलेगा, तो उन्हें जवाब देना ही होगा।
उन्होंने कहा, "अगर आप मेरे खिलाफ गंभीर इल्जाम लगा रहे हैं, तो मैं जवाब भी नहीं दूंगा? क्या मुझे जवाब नहीं देना चाहिए?" उन्होंने 'नीच राजनीति' वाले बयान को जाति से जोड़ने को भी सही ठहराया।
'मुझे गांधी परिवार से कोई दिक्कत नहीं'
नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो गुजराती पढ़े हैं और इस शब्द के यही मायने निकलते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि गांधी परिवार को लेकर उनके मन में कोई बुरी भावना नहीं है।
मोदी ने कहा, "आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब सोनिया गांधी के बीमार होने की खबर सामने आई थी, तो कोई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नहीं बल्कि मैंने सबसे पहले उनकी रिकवरी का संदेश भेजा था।"
भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने कहा कि देश को उन लोगों को शरण देने के लिए तैयार रहना चाहिए, जो हिंदू परंपरा में यकीन रखते हैं और दुनिया के दूसरे हिस्सों में उन्हें तड़पाया जा रहा है।