मोदी ने मुस्लिमों को लेकर तैयार की खास रणनीति
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अटल-आडवाणी की छाया और युग से पूरी तरह बाहर आ चुकी भाजपा में अब आम चुनाव बाद मुस्लिम राजनीति भी नई करवट लेगी।
पुराने मुस्लिम चेहरों के इतर नए चेहरों पर दांव लगा कर पार्टी की योजना इस बिरादरी के पिछड़े तबके यानी पसमांदा मुसलमानों को साथ लाने के लिए लंबी कसरत करने की है।
खास बात यह है कि पिछडे़ मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने के लिए आम चुनाव के बाद बड़े स्तर पर कवायद शुरू करने की योजना खुद पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की है।
साबिर अली को मिल सकती है नई जिम्मेदारी!
यही कारण है कि तमाम विवाद के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने जदयू के पूर्व सांसद साबिर अली का अध्याय अभी बंद नहीं किया है। माना जा रहा है कि आम चुनाव के बाद न केवल उनकी पार्टी में वापसी होगी, बल्कि उन्हें ही पसमांदा मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने का जिम्मा भी दिया जाएगा।
नीतीश ने भी शुरू में समूची मुस्लिम बिरादरी के बदले पसमांदा मुसलमानों पर दांव लगा कर अपने विरोधी लालू प्रसाद के मुस्लिम मतों में सफलतापूर्वक सेंध लगाई थी। दरअसल भाजपा में अब तक जो भी गिने चुने मुस्लिम नेता रहे हैं, सभी अगड़ी जातियों से हैं।
हालांकि सिकंदर बख्त से ले कर शाहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी और नजमा हेपतुल्ला जैसे नेताओं ने पार्टी में अपनी पहचान जरूर बनाई, मगर ये सभी नेता मुस्लिम मतों को लुभा नहीं कर पाए। वहीं वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर भी आम चुनाव बाद पार्टी की मुस्लिम राजनीति के प्रमुख चेहरा होंगे।