मोदी-ओबामा की केमिस्ट्री पर हर निगाह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान यूं तो सभी की निगाहें समझौतों, अमेरिकी नेताओं के बयानों और निवेश के मुद्दे पर रहेगी।
मगर जानकारों की मानें तो इस यात्रा की सबसे अहम बात यह होगी कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और मोदी के बीच ‘पर्सनल केमिस्ट्री’ यानी व्यक्तिगत दोस्ती कायम हो पाती है। यही ‘केमिस्ट्री’ ही भविष्य में भारत और अमेरिका के संबंधों का रुख और रफ्तार काफी हद तक तय करेगी।
यह पहला मौका है, जब ओबामा और मोदी एक-दूसरे से मिलेंगे। सितंबर 29 को वो वाइट हाउस मे डिनर करेंगे और अगले दिन शिखर वार्ता होगी। ओबामा से उनकी मुलाकात के दौरान व्यापार से लेकर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर चर्चा होगी।
मगर वाशिंगटन डीसी के जाने माने थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट की तन्वी मदान का कहना है कि अगर दोनों नेता एक दूसरे पर अच्छा ‘फर्स्ट इंप्रेशन’ जमा पाए तो आगे की दोस्ती पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
मोदी-अमेरिका के बीच पिछले 8 सालों से नहीं संबंध
मोदी और अमेरिका के बीच 2005 से लेकर 2013 तक कोई आधिकारिक संबंध नहीं थे। तन्वी मदान का कहना है मोदी के मन में कहीं न कहीं यह शंका है की उन्हें वाशिंगटन डीसी में शायद उतना सम्मान न मिले।
अगर ये शंका दूर हो जाती है तो इससे काफी अंतर पैदा होगा। भले ही विदेश नीति दो देशों के बीच होती है, लेकिन दोनों नेताओं की आपसी दोस्ती इस क्षेत्र में बहुत फर्क पैदा कर सकती है।
अमेरिका की विदेश नीति को करीब से जानने वाले अमेरिकी सांसद व विदेश मामलों की समिति की उपनेता इलियट एंगल कहते हैं, ‘इतिहास बताता है कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध समय की धारा बदल सकते हैं।
‘पर्सनल केमिस्ट्री’ के लिहाज से ओबामा और मोदी के बीच पहली मुलाकात काफी अहम होगी।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों नेता एक-दूसरे पर अनुकूल छाप छोड़ेंगे और पुरानी कड़वाहटों को भुला दिया जाएगा।
आज अमेरिका रवाना होंगे मोदी
नई दिल्ली। पांच दिन की अमेरिकी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को रवाना होंगे। अपनी यात्रा के दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से वार्ता के अलावा 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की महासभा को संबोधित करेंगे।
इसके अलावा नरेंद्र मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, नेपाल के पीएम सुशील कोइराला और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। हालांकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। इस दौरान वह कॉरपोरेट जगत की कई हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे।
क्यों है अहम ‘पर्सनल केमिस्ट्री’
पिछले कुछ साल में भारत और अमेरिका की सरकारों ने यह सीखा है कि कई बार एक-दूसरे के साथ काम करना आसान नहीं होता क्योंकि लोकतंत्र में सरकारें कई तरह की सीमाओं में काम करती है।
ऐसे में अगर नेताओं में व्यक्तिगत तौर पर अच्छे संबंध हों तो वो एक-दूसरे की मजबूरियों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और छोटी छोटी अड़चनें बड़ी होने से बच सकती हैं।