मोदी के रोड शो की ये 10 बातें आपको नहीं पता होंगी!
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इसे नमो की टीम गुजरात का मैनेजमेंट कहें या लोगों में मोदी को देखने की ललक, उनके नामांकन जुलूस में भारी भीड़ उमड़ी। इतनी संख्या का अनुमान तो खुद पार्टी के पदाधिकारियों ने भी नहीं लगाया था। रोड शो के रूट पर हर तरफ केसरिया ही केसरिया नजर आ रहा था। बनारस की सियासत से जुड़े पुराने लोगों का कहना है कि अब तक किसी भी प्रत्याशी के नामांकन में इतनी भीड़ नहीं देखी गई।
हालांकि इस भीड़ में दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड और दक्षिण भारत के कुछ प्रदेशों से आए कार्यकर्ता भी शामिल थे। मोदी के रोड शो को मलदहिया चौराहे से नदेसर स्थित मिंट हाउस तक (करीब ढाई किलोमीटर) का रूट तय करने में एक घंटे चालीस मिनट लगे।
हम आपको इस जुलूस के दौरान हुई ऐसी 10 बातें बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद आपको कहीं पढ़ने-सुनने को न मिला हो।
'मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं'
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के वाराणसी संसदीय क्षेत्र के दो प्रस्तावक नामांकन के बाद मायूसी के साथ पैदल ही लौटे। नामांकन के करीब घंटे भर पहले ही प्रस्तावक वीरभद्र नाविक और अशोक कुमार बुनकर को वीआईपी की तरह कचहरी स्थित नामांकन स्थल के पास स्थित एक क्लब में ले आया गया था। जब नरेंद्र मोदी नामांकन स्थल पर पहुंचे तब अन्य प्रस्तावकों के बाद इन दोनों को भी वहां ले जाया गया।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी प्रस्तावकों के साथ वे भी बाहर आए, लेकिन इसके बाद मंजर बदल गया। दो प्रस्तावक तो वहीं से लग्जरी वाहन से निकल गए, जबकि वीरभद्र और अशोक को साथ आए महानुभाव वहीं छोड़कर निकल गए यह कहते हुए कि रुकिए! अभी आ रहा हूं। कुछ देर उनके आने का इंतजार करने के बाद ये दोनों प्रस्तावक वहीं समीप स्थित एक अधिवक्ता की चौकी पर बैठ गए और कहने लगे कि ‘मतलब निकल गया तो पहचानना भूल गए।’
अधिवक्ता संजय मिश्र और कुछ अन्य अधिवक्ताओं ने समझाया कि जल्दबाजी में ऐसी घटना हो गई होगी, इसे गंभीरता से न लें। वहां बैठे कुछ अन्य ने उन्हें अपनी बाइक से घर छोड़ने को कहा, लेकिन फिर दोनों प्रस्तावक मायूसी के साथ पैदल ही घर लौट गए।
ऊपर खड़ी रही ट्रेन, नीचे से गुजरा काफिला
रोड शो के दौरान नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक भी देखने को मिली। नमो की एक झलक पाने के लिए भीड़ ने अंधरापुल रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमा लिया। इसकी वजह से मोदी का काफिला गुजरने के दौरान ही अंधरापुल पर इंदौर-पटना एक्सप्रेस आकर रुक गई। ट्रेन के रुकने से सुरक्षा में लगे अधिकारियों के पसीने छूट गए।
आनन-फानन में फोर्स ट्रेन की बोगियों में दाखिल हुई। यात्रियों और सामान की चेकिंग की गई। इस दौरान ट्रैक को खाली करा कर ट्रेन को आगे बढ़ाया गया। मोदी का रोड शो दोपहर 12:30 बजे अंधरापुल से होकर गुजर रहा था। इसी समय इंदौर-पटना एक्सप्रेस पुल से गुजर रही थी। ट्रैक खाली न होने की वजह से ट्रेन को रोकना पड़ा। इसी समय मोदी का वाहन अंधरापुल से गुजर रहा था।
सुरक्षा के मद्देनजर पुलिसकर्मी भागकर पास की बोगियों में घुस गए। ट्रैक पर खड़े लोगों को खदेड़ा गया। करीब तीन मिनट तक खड़े रहने के बाद ट्रैक खाली कराकर ट्रेन को आगे बढ़वाया गया। इसी समय चौकाघाट फ्लाईओवर पर भी लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। फ्लाईओवर के नीचे से मोदी गुजर रहे थे। फ्लाईओवर पर पुलिस तैनात थी लेकिन भीड़ को हटाने में वह नाकाफी साबित हुई।
'प्लीज मोदी जी को देख लेने दीजिए'
तिरसठ साल की उम्र में नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि काशी की गलियों में ऐसे ‘एक्शन हीरो’ के रूप में नजर आने लगी है, जिसकी झलक पाने की बेकरारी छात्राओं, युवतियों में भी है और बच्चों में भी। गुरुवार को बीएचयू के महिला महाविद्यालय के अलावा अन्य विभागों की छात्राओं की जुबानी कुछ ऐसा ही जाहिर हुआ। सोमनाथ की धरती से बाबा विश्वनाथ की नगरी को अपनी कर्मस्थली बनाने पहुंचे मोदी की झलक पाने के लिए बीएचयू महिला महाविद्यालय के अलावा दूसरे विभागों की छात्राओं में होड़ मची थी।
लंका चौराहे के पश्चिमी छोर पर बने मीडिया के प्लेटफार्म के पास महिला महाविद्यालय की छात्राएं आगे बढ़ने के लिए धक्कामुक्की कर रही थीं। उनकी ख्वाहिश थी कि वे किसी तरह मोदी की झलक पा सकें। रस्सा तानकर खड़े सुरक्षा कर्मी समर्थकों को मालवीय प्रतिमा की ओर बढ़ने से रोक रहे थे। मीडिया के लिए बने मंच पर भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया था कि लोग उसके टूटने की आशंका से डरे हुए थे। बीएचयू की छात्राएं मंच पर चढ़ने के लिए बार-बार आग्रह कर रही थीं। जब किसी ने नहीं सुनीं तब वह खुद साहस दिखाती हुईं उस मंच पर चढ़ गईं। मना करने पर उनका कहना था कि ‘प्लीज मोदी जी को देख लेने दीजिए।’
11:15 पर मोदी जब मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए मंच पर चढ़े तब वो छात्राएं उन्हें देख इतनी खुश हुईं कि नमो-नमो के नारे भी लगाए। गणित विभाग में एमएससी की छात्रा पूर्णिमा यादव बोलीं- क्या पर्सनालिटी है तो उनकी सहेली महिला महाविद्यालय की प्रतिभा सेठ ने कहा कि क्वालिटी भी है यार... सच में कितने फास्ट हैं ये। इनके बारे में जितना सुना था, उससे भी बढ़कर दिख रहे हैं। झुककर समर्थकों का अभिवादन करते मोदी के व्यक्तित्व के प्रति प्रियाश्री और चांदनी की भी ऐसी ही राय थी। उधर, बनारस की संकरी गलियों में बच्चे भी ‘वोट फार पीएम’ वाली सिर पर टोपी लगाए मोदी-मोदी करते नजर आए।
कमांडो के घेरे में रहे मोदी, मोबाइल नेटवर्क बाधित
काशी विद्यापीठ के मैदान पर बने हेलीपैड पर उतरते ही नरेंद्र मोदी को एनएसजी कमांडो ने सुरक्षा घेरे में ले लिया। कमांडो के घेरे में ही वह सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा तक गए। सुरक्षा दस्ते के साथ ही मोदी कचहरी तक गए।
मोदी के वाहन के साथ ही मोबाइल जैमर चल रहा था। इसके चलते रोड शो के साथ चल रहे लोगों का मोबाइल नेटवर्क बाधित था। हालांकि जैमर की फ्रीक्वेंसी कम कर दी गई थी।
मोदी को जेड प्लस की सुरक्षा के साथ ही गृह मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा भी दी गई है। मोदी के आगमन के पूर्व ही सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारी एवं कमांडो दस्ता वाराणसी पहुंच गया था। सुरक्षा अधिकारी पल-पल पर नजर रखे हुए थे। एटीएस, एलआईयू एवं गुजरात पुलिस के अधिकारी भी रोड शो के समय आसपास ही मौजूद थे।
रास्ते बंद, मरीज-तीमारदार बेहाल
नरेंद्र मोदी के बीएचयू आगमन को लेकर सुबह आठ बजे से ही लंका की ओर के बीएचयू द्वार को सुरक्षा व्यवस्था के चलते आवागमन बंद कर दिया गया था। एक तरफ लंका चौराहे पर भीड़ जमा थी तो दूसरी ओर बीएचयू गेट से लेकर एमएमवी तक छात्र-छात्राओं की भीड़। पुलिस न तो कैंपस से किसी को बाहर जाने दे रही थी और ना ही बाहर से किसी को अंदर आने दे रही थी। ऐसे में बीएचयू अस्पताल आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी हुई।
वाहनों का आवागमन बंद होने से दूर-दराज से आने वाले कुछ मरीज व उनके तीमारदार वापस लौट गए, तो कुछ ने प्राइवेट अस्पतालों की शरण ली। भभुआ (बिहार) से इलाज के लिए आई रामादेवी (45) को काफी मिन्नतों के बाद भी पुलिस ने जब बीएचयू अस्पताल नहीं जाने दिया तो निराश होकर परिजनों के साथ लौट गई। इसी तरह कई मरीज लंबा रास्ता तय कर अस्पताल पहुंचे, लेकिन जाम में उन्हें घंटों पसीना बहाना पड़ा। दोपहर बारह बजे तक लगभग यही स्थिति थी।
इसके अलावा मोदी का कारवां मलदहिया से कुछ दूर ही आगे बढ़ा था कि अंधरापुल पर ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई। इसकी वजह से स्टेशन जाने वाले यात्रियों को वाहन छोड़कर पैदल जाना पड़ा। भीड़ के सामने असहाय पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के बजाए मूक दर्शक बनी एक तरफ खड़ी रही।
समर्थकों ने फाड़े कैलाश के पोस्टर, रेलिंग तोड़ी
मोदी के रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपा प्रत्याशी कैलाश चौरसिया के पोस्टर फाड़ डाले। मलदहिया पर कई जगहों पर रोड डिवाइडर की रेलिंग भी तोड़ दी। डिवाइडर को कुछ दिन पहले ही पेंट किया गया था। साथ ही रेलिंग भी दुरुस्त की गई थी।
नरेंद्र मोदी का रोड शो मलदहिया चौराहे से आगे बढ़ा तो कार्यकर्ता एक-दूसरे से आगे निकल मोदी के वाहन के पास पहुंचने की जुगत में डिवाइडर पर चढ़ गए। डिवाइडर पर लगी लोहे की रेलिंग को कार्यकर्ताओं ने तोड़ डाली।
कुछ दूर आगे बढ़े तो सड़क किनारे लगे कै लाश चौरसिया के पोस्टर को समर्थकों ने फाड़ दिया। हालांकि पार्टी के बड़े नेता कार्यकर्ताओं को ऐसा करने से मना कर रहे थे।
कचहरी में बेरोकटोक पहुंचे आम लोग
मोदी के नामांकन के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था के प्रशासन के दावे के बावजूद लोग आम दिनों की तरफ बेरोकटोक कचहरी पहुंचे। सुबह 10 बजे कचहरी खुलने से पहले ही तमाम लोग यहां अधिवक्ताओं की चौकियों पर आकर जम गए थे। इनमें अधिकतर लोग नामांकन के दौरान मोदी का दीदार करना चाहते थे।
नामांकन स्थल के आसपास स्थित आफिसों से भी लोग मोदी को देखने के लिए बेरोकटोक यहां पहुंचे। जिला पंचायत रोड पर पहले की तरह आम लोग आते-जाते रहे, किसी को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था। स्थिति यह रही कि नामांकन स्थल के पास बैरिकेडिंग तक भी आम लोग पहुंच गए थे। बता दें कि कलक्ट्रेट और दीवानी कोर्ट परिसर में पहले भी आतंकी वारदात हो चुकी है। फिर मोदी के नामांकन को लेकर विशेष सर्तकता बरते जाने के निर्देश थे।
इसके बावजूद आम लोगो के आने जाने पर नजर रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मोदी के नामांकन के कारण सेंट्रल और बनारस बार ने जिला जज को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि यातायात व्यस्था जगह जगह अवरुद्ध है। आम वादकारियों के पहुंचने में दिक्कतों को देखते हुए उनके मामलों में प्रतिकूल आदेश न पारित किया जाए।
नामांकन स्थल से चंद कदम की दूरी पर हंगामा
कचहरी स्थित नामांकन स्थल से मात्र दस कदम की दूरी पर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास लगे बैरियर पर पुलिस की चुस्त व्यवस्था मोदी के यहां पहुंचते ही डगमगाने लगी। खासकर तब मुश्किल खड़ी हो गई जब सेंट्रल बार अध्यक्ष के साथ मोदी के प्रस्तावकों को भी बैरियर पर रोक दिया गया।
हुआ यह कि जब मोदी नामांकन स्थल पर पहुंचे तब इसी बैरियर के पास एक क्लब में बैठे उनके प्रस्तावक शास्त्रीय गायक पं. छन्नूलाल मिश्र, रिटायर्ड न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय, नाविक वीरभद्र और बुनकर अशोक कुमार भाजपा के वाराणसी संसदीय क्षेत्र के लीगल प्रभारी सेंट्रल बार अध्यक्ष डा. नीलकंठ तिवारी के साथ अंदर प्रवेश करने लगे। सुरक्षा में लगे उपनिरीक्षक ने उन्हें जाने से रोक दिया। इस पर वहां बड़ी संख्या में मौजूद अधिवक्ता हंगामा करने लगे।
पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाए गए। इसके बाद प्रस्तावक गिरधर मालवीय और पं. छन्नूलाल मिश्र सहित अन्य प्रस्तावकों को अंदर जाने दिया गया, लेकिन सेंट्रल बार अध्यक्ष को फिर रोक दिया। हालांकि माहौल तल्ख होता देख बाद में उन्हें भी प्रवेश दिया गया। इस बैरियर पास पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी लचर दिखी।
विद्यापीठ में सुरक्षा घेरा तोड़ घुसे समर्थक
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को देखने के लिए समर्थकों ने सुरक्षा घेरा तोड़ अंदर घुस गए। गुरुवार को हेलीकाप्टर से उतरकर मोदी के खेल मैदान से बाहर आने के बाद पुलिस समर्थकों की भीड़ को रोक नहीं पाई और वह बैरिकेडिंग तोड़ अंदर आकर नारेबाजी करने लगी।
विद्यापीठ परिसर स्थित गांधी अध्ययनपीठ के पास समर्थकों की भीड़ रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। सुबह करीब 11:20 बजे पर विद्यापीठ कैंपस के खेल मैदान से खुली जीप में सवार होकर मोदी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ ही पटेल मूर्ति पर माल्यार्पण के लिए बढ़े।
जैसे ही मोदी सामने से आते दिखे समर्थक स्वागत में नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन समर्थक बैरिकेडिंग तोड़ मोदी की जीप के पीछे दौड़ पड़े। गेट खुला तो बाहर खड़े कार्यकर्ता भी अंदर आ गए। इस बीच हर कोई मोदी की तस्वीर को कैमरे में कैद करने के लिए परेशान रहा।
रोड शो के दौरान भगदड़, दो अचेत
नरेंद्र मोदी के रोड शो को पुलिस ने मिंट हाउस चौराहे पर रोक दिया। इसके बाद मोदी नामांकन के लिए कचहरी की ओर बढ़ गए। जुलूस में शामिल लोगों को कचहरी जाने से रोकने के लिए वरुणा पुल और पीसीएफ प्लाजा की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। इसकी वजह से मिंट हाउस चौराहे पर धीरे-धीरे भीड़ इकट्ठा होने लगी। दोपहर लगभग 1.15 बजे चौराहे पर लोगों का हुजूम जमा हो गया।
धूप और गर्मी से परेशान लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए भीड़ से निकलने का प्रयास करने लगे जिससे भगदड़ हो गई। इस भगदड़ में दो लोग बेहोश गए और एक का पैर टूट गया। तीनों को लेकर उनके साथी तुरंत ही ले गए। भीड़ ने पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग तोड़ दी।
लोग दुकानों में घुसने लगे तो दुकानदारों ने शटर गिरा दिए। भाजपा कार्यकर्ता पुलिस से बैरिकेडिंग हटाने की मांग करते रहे लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी। इस पर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी हुई। करीब पंद्रह मिनट के बाद स्थिति सामान्य हुई।