बनारस में नामांकन का अशुभ मुहूर्त मोदी को हरा न दे!
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काशी के पंडितों के मुताबिक इस दिन भद्राकाल होगा। ऐसा माना जाता है कि भद्राकाल के रोज अगर कोई भी शुभ काम किया जाता है, तो वो पूर्ण नहीं होता है।
हालांकि, इस मुद्दे पर गुजरात के ज्योतिषियों की राय बिल्कुल जुदा है। उन्होंने मोदी के नामांकन के लिए 24 अप्रैल का दिन चुना है। गुजराती पंडितों की ओर से नामांकन के लिए मृत्युलोक की भद्रा का दिन सुझाए जाने से बनारस के पंडित हैरत में हैं।
वाराणसी नहीं गुजराती पंडितों पर भरोसा!
इससे पहले वाराणसी के ज्योतिषियों ने मोदी के नामांकन के लिए शुभ मुहूर्त 22 अप्रैल को निकाला था। इसे लेकर पार्टी ने तैयारी भी शुरू कर दी थी। बाद में गुजरात के पंडितों ने 24 अप्रैल की तारीख मोदी के नामांकन के लिए ज्यादा शुभ बताया।
मोदी ने भी वाराणसी के पंडितों की जगह गुजरात के पंडितों पर विश्वास जताया और उनकी बताई तारीख पर ही नामांकन का ऐलान हो चुका है।
इस मुद्दे पर ज्योतिषियों की राय पर गौर करें, तो पंचांग के मुताबिक 24 अप्रैल को नामांकन से पहले सुबह 8:35 पर ही भद्रा लग जाएगा। धनिष्ठा नक्षत्र दिन में 1:20 तक रहेगा। इसके बाद सतभिखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
इस दिन सुबह से ही मुत्युलोक में पड़े भद्रा से मुक्ति शाम 7:24 पर होगी। ऐसे में दिन भर भद्रा प्रभावी रहेगा। इस अवधि में सामान्यतः शुभ कार्य, शुभ संकल्प नहीं लिए जाते।
भद्राकाल से ऐसे बच सकते हैं मोदी
हालांकि ज्योतिषियों के मुताबिक इससे बचने के उपाय भी हैं। भद्रा के पहले नामांकन और पत्राचार का मुहूर्त मिलेगा। ऐसे में अगर मोदी परचे पर आठ बजे सुबह से पहले हस्ताक्षर कर दें तो इस दोष से बचा जा सकेगा।
महावीर पंचांग के संपादक रामेश्वर ओझा के मुताबिक उस दिन आवेदन और पत्र लेखन का मुहूर्त है। दोपहर के वक्त भद्राकाल के बावजूद अभिजीत मुहूर्त मिलेगा।
ऐसे में अगर मोदी सुबह आठ बजे से पहले परचे पर हस्ताक्षर कर देंगे तो दोष से बचा जा सकता है। परचा अभिजीत मुहूर्त में दाखिल किया जा सकता है।
क्यों हुई नामांकन में देर?
पार्टी कांग्रेसी उम्मीदवार अजय राय और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के नामांकन भरने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद मोदी के नामांकन की योजना बनाई गई। अब तक अजय पर्चा दाखिल कर चुके हैं और जल्द ही केजरीवाल भी ऐसा करने ज रहे हैं।
मोदी के रणनीतिकारों ने वडोदरा की तरह बनारस में भी नामांकन वाले दिन भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन करने का मन बनाया है, जिससे न केवल बनारस बल्कि पूर्वांचल की दूसरी सीटों पर भी असर छोड़ा जा सके। अब देखना है कि भद्राकाल से मोदी किस तरह निपटते हैं।