'आपदा का समय है, मोदी को हराना जरूरी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साहित्य जगत में अपनी बेबाक प्रतिक्रियाओं के लिए पहचाने जाने वाले कवि और पत्रकार विष्णु खरे बनारस संसदीय सीट पर नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी से व्यथित हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मोदी के खिलाफ लड़ रहे मजबूत दावेदार की पैरोकारी करते हुए जनता को विकल्प सुझाने के पक्षधर हैं।
इसी के चलते कबीरचौरा मूलगादी मठ में आयोजित सांप्रदायिक फासीवाद विरोधी मंच के कन्वेंशन के दौरान उनको अहसमति के स्वर भी सुनने को मिले। इसके बावजूद जर्मन, फ्रेंच सहित तमाम विदेशी भाषाओं के जानकार और हिंदी कविता को अपने अनुवाद के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने वाले विष्णु खरे ने अपना विचार नहीं बदला।
वह दो टूक शब्दों में कहते हैं, "इस समय हिंदुस्तान और बनारस आपदा ग्रस्त है। यह ऐसा समय है कि केवल विरोध करने से काम नहीं चलेगा। वैचारिक प्रतिबद्धता ही काफी नहीं है। लोगों को सही राह दिखानी होगी। यहां से मोदी की जीत को मैं बुद्धिजीवियों की हार मानूंगा।" पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
'काशी एक मस्त शहर'
काशी की संस्कृति को किस रूप में देखते हैं?
जवाब: जिस तरह कत्था, चूना, पत्ता, सुपारी कुछ भी इस शहर का नहीं है लेकिन सब एक में घुलने-मिलने के बाद वह बनारसी पान बन जाता है। यहां की गंगा-जमुनी संस्कृति भी पान की ही तरह की है। जैसे-जैसे इसमें घुलते जाइए आनंद आता जाएगा। यह संसार का सबसे मस्त शहर है। एम्स्टर्डम की तरह यहां कई तरह की संस्कृतियों के लोग मिलकर रहते हैं।
यूरोप की तरह का खुलापन होने के कारण यह शहर विदेशियों को भी खूब भाता है। देश की सभी संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस शहर के लोगों की बोली बेहद मीठी है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपने एक नाटक में ऐसी मराठी लिखी है, जैसी महाराष्ट्र में भी नहीं लिखी जाती। वेद की विभिन्न शाखाओं के लोग या तो केरल में हैं या काशी में।
कैसा है चुनावी माहौल?
बनारस के चुनावी परिदृश्य को कैसे देखते हैं?
जवाब: बनारस का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। नरेंद्र मोदी गुजरात से जीतकर प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन बनारस से जीतकर वह देशव्यापी स्वीकृति का डंका पीटना चाहते हैं। यूं तो मोदी की सरकार बनते दिख नहीं रही है। भाजपा के भीतर से भी मोदी विरोधी स्वर उभर रहे हैं। काशी केवल धर्म, श्मशान घाट और गांजा-भांग का केंद्र नहीं, बल्कि राजनीति की धुरी है।
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में किसी शहर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। इस शहर को अपनी महत्ता साबित करने के लिए मोदी को पराजित करना होगा।
मोदी को हराना क्यों जरूरी है?
जवाब: यहां से जीतने के बाद मोदी इस्तीफा देंगे और दोबारा चुनाव होंगे। कोई स्थानीय प्रत्याशी लड़ेगा और चुना जाएगा। ऐसी कवायदों को दोहराने की जरूरत ही क्या है। दुनिया भर की निगाहें बनारस के चुनाव पर टिकी हैं।
हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद का इससे बेहतर कोई मौका नहीं है। दोनों को मिलकर फासीवादी शक्तियों को हराना चाहिए। यह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिटमस टेस्ट का अवसर है।
'कांग्रेस को समर्थन'
केवल कांग्रेस प्रत्याशी ही क्यों?
जवाब: मैं समझता था कि आम आदमी पार्टी देश का भविष्य है लेकिन उसने दिल्ली की जनता के साथ धोखा किया। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद लाखों समर्थकों को सदमा पहुंचा है। इन समर्थकों को भाजपा और कांग्रेस का ताना अलग से सहना पड़ रहा है। आप को बनारस में ज्यादा सफलता नहीं मिलने वाली है।
कबीर मठ में आपने मंच से कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने की अपील क्यों की?
जवाब: मोदी हार जाएं तो संसार का सबसे खुश व्यक्ति मैं होऊंगा। यह वास्तविक राजनीतिक क्षण है। ग्रास रूट लेवल पर कॉमन सेंस से काम लेना होगा। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय बनारस के लिए आपदा हो सकते हैं लेकिन वह मोदी की तरह राष्ट्रीय आपदा नहीं हैं।
वह मेरे लिए आदर्श नहीं हैं लेकिन जीतने वाले लग रहे हैं लिहाजा उनकी पैरोकारी कर रहा हूं। दीगर पार्टियों को भी चाहिए कि दिल पर पत्थर रखना पड़े तो भी कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दें। बुद्धिजीवियों को भी खुलकर सामने आना चाहिए। यह छायावादी नहीं यथार्थवादी लड़ाई का समय है।