अचूक हो सकता है मोदी का मिडिल क्लास फार्मूला

अहमदाबाद/समीर शर्मा Updated Wed, 12 Dec 2012 01:00 AM IST
modi middle class formula may be infallible
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात के मध्य वर्ग (मिडिल क्लास) को रिझाने का फार्मूला अचूक हो सकता है। परिसीमन के बाद 20 नई शहरी सीटें और बढ़ गई हैं। ऐसे में भाजपा की रणनीति में कुल 74 शहरी सीटों को खास जगह मिली है।

गुजरात में वर्ष 2001 में शहरी जनसंख्या 11 प्रतिशत थी, लेकिन वर्ष 2011 की जनगणना में शहरी जनसंख्या बढ़कर करीब 45 प्रतिशत हो गई। शहरी क्षेत्रों में मजबूत भाजपा, बढ़ी हुई सीटों का फायदा उठाना चाहती है। इसी कारण भाजपा के घोषणा पत्र में भी मध्य वर्ग को आकर्षित करने का पूरा प्रयास किया गया है। साथ ही, एक चौथाई से भी बड़ा वोट बैंक होने के कारण भाजपा युवाओं को भी पूरी तवज्जो दे रही है।

गुजरात में 182 विधानसभा सीटों में 74 शहरी तथा 108 ग्रामीण सीटें हैं। ग्रामीण सीटों में करीब 50 सीटों में जनजातीय व भीतरी ग्रामीण क्षेत्र आते हैं और इन पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में रहती है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा अधिकतर शहरी सीटों पर एक तरफा और बची हुई 58 ग्रामीण सीटों में आधी से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करती आई है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस चुनाव में शहरी सीटों की संख्या बढ़ने से भाजपा को बड़ा फायदा होगा। इन सब पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घोषणा पत्र में मध्य वर्ग के हितों का ध्यान रखते हुए 22 लाख लोगों को शहरी क्षेत्रों में आवास,  बीपीएल के वर्गीकरण में आय सीमा बढ़ाने, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जैसी कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं।

इधर, चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात के कुल 38077454 मतदाताओं में11405672 मतदाता 18 से 29 वर्ष के  हैं। भाजपा ने करीब 30 प्रतिशत के इस बड़े वोट बैंक के लिए  रोजगार, सरकारी भर्ती में प्रवेश में दो साल और बढ़ाने, यूथ पॉलिसी, मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना जैसी घोषणाएं  की हैं। यहां गुजरात विकास के नारे का शहरी युवाओं पर प्रभाव दिख रहा है। अब देखना यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भाजपा के घोषणा पत्र से इत्तफाक रखते हैं या नहीं।

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