मोदी ने शरीफ से पूछी दिल छू लेने वाली बात
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हर किसी को हतप्रभ करते हुए अचानक पाक प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच इस बार रिश्तों की खास केमिस्ट्री देखने को मिली। मोदी पाकिस्तान से लौट आए लेकिन उनकी यात्रा का असर अब तक भी देखा जा रहा है।
पाक प्रधानमंत्री मोदी की दी हुई पगड़ी को नातिन के शादी समारोह में पहनकर पहुंचे तो मोदी भी रिश्तों की इस जुंबिश को आगे ले जाने के ख्वाहिशमंद दिख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पाक में मुलाकात के दौरान मोदी ने नवाज शरीफ से पूछा कि क्या हम यूरोपियन नेताओं की तरह नहीं हो सकते, जो तमाम मौकों पर एक दूसरे से मिलते रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की बर के अनुसार मोदी और शरीफ की मुलाकात के दौरान वहां मौजूद विश्वस्त सूत्र ने बताया कि मोदी और शरीफ इस बात पर सहमत दिखे की दोनों देशों के बीच हमेशा बने रहने वाले तनाव के माहौल को अब कुछ कम किया जाए।
खासकर दोनों नेता इस बात पर जोर देते दिखे की दोनों पडोसियों के बीच संवाद की प्रक्रिया हर हाल में जारी रहे। इसके लिए दोनों नेता अपने स्तर पर भी पूरा प्रयास करेंगे।
दोनों देशों के एनएसए में लगातार होती रहेगी बातचीत
इसके लिए बड़ी जिम्मेदारी दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों को सौंपी गई है। तय हुआ है कि परिस्थितियां चाहे कितनी विपरीत हों दोनों देशों के एनएसए के स्तर पर संपर्क हमेशा बना रहेगा, उनमें बातचीत लगातार होती रहेगी।
हालांकि इससे पूर्व भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नसीर खान जंजुआ बैंकाक में हुई बातचीत में निजी फोन नंबर और ईमेल आईडी की अदला बदली कर चुके हैं। उन्हें विभिन्न मुद्दों पर एक दूसरे से बातचीत करने और मुलाकात करने की ताकीद दी गई है।
वहीं पाकिस्तान सरकार के एक सूत्र ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लगभग 50 मिनट तक चली बातचीत काफी सौहार्द्रपूर्ण रही। हालांकि इस दौरान जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। सूत्र के अनुसार दोनों देश के नेताओं के बीच ऐसी मुलाकात पहले कभी नहीं देखी गई।
दोनों नेताओं के बीच पूरी बातचीत बेहद सकारात्मक रही, सूत्र के अनुसार, इस बातचीत के बाद शरीफ बिल्कुल तनावमुक्त दिख रहे थे, बातचीत के दौरान उन्होंने पंजाबी मिजाज अपनाए रखा। ऐसे लग रहा था जैसे दो दोस्त एक दूसरे से मिल रहे हों।
तीन-तीन महीने का प्लान बनाकर काम करेंगे विदेशी सचिव
वहीं दूसरी तरफ दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों देशों के विदेश सचिव तीन से छह महीने के प्लान पर काम करें। संभवतः 15-16 जनवरी को जब दोनों देशों के विदेश सचिव इस्लामाबाद में मिलें तब इस पर चर्चा हो।
तीन महीने के प्लान को इसलिए तवज्जो दी गई है कि जब आगामी 31 मार्च और 1 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट को होस्ट करेंगे तब दोनों नेताओं की एक दूसरे से मुलाकात हो सकती है।
जिसके बाद अगले तीन महीने के लिए और मसौदा तैयार किया जा सकता है। ऐसे में यह प्लान अगले साल अक्टूबर नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में कोई ठोस परिणाम की बुनियाद तैयार कर सकता है।
सूत्र के अनुसार विदेश सचिव एस जयशंकर इसको लेकर सभी सचिव और विभागों से संभावित नए क्षेत्रों को समझने के लिए बैठक कर सकते हैं। ताकि इस्लामाबाद पहुंचने से पहले इस मुद्दे पर ढंग से होमवर्क किया जा सके।