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रजनीकांत-मोदी की मुलाकात के मायने क्या?

Tue, 15 Apr 2014 01:37 PM IST
Updated Tue, 15 Apr 2014 01:37 PM IST
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modi meeting with rajnikant

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत से मुलाकात की है। मोदी ने कहा कि यह राजनीतिक मुलाकात नहीं थी और उन्होंने रजनीकांत को तमिल नववर्ष की बधाई दी जो सोमवार से शुरू हो रहा है। लेकिन चुनाव के इस मौसम में करोड़ों प्रशंसकों वाले सुपरस्टार से मुलाकात यूं ही नहीं हो सकती। बीबीसी हिंदी के लिए संदीप सोनी ने इस मुलाक़ात के अर्थ समझने के लिए वरिष्ठ पत्रकार इमरान क़ुरैशी से बातचीत की।

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मोदी और रजनीकांत की इस मुलाक़ात के क्या मायने निकाले जाएं?
इसका एक ही अर्थ निकाला जा सकता है कि बीजेपी बहुत शिद्दत से तमिलनाडु में सफलता पाने की कोशिश कर रही है। इस वक्त पार्टी का डीएमडीके, पीएमके और एमडीएमके के साथ गठबंधन है जिसका मुक़ाबला जयललिता की एआईडीएमके और करुणानिधि की डीएमके के साथ है।
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बीजेपी की कोशिश है कि किसी तरह रजनीकांत मोदी का नाम आगे करें। क्योंकि रजनीकांत का क़द तमिलनाडु में बहुत बड़ा है- एक तरह से जयललिता से भी बड़ा है।

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क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा?

modi meeting with rajnikant
क्या रजनीकांत ने कभी किसी पार्टी का समर्थन या विरोध किया है?
1996 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जयललिता के ख़िलाफ़ बात की थी, जिसमें एआईडीएमके ही नहीं खुद बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रही जयललिता अपनी सीट भी हार गई थीं।

उसके बाद से उन्होंने किसी के ख़िलाफ़ नहीं बोला। उनके बहुत बड़े फ़ैन्स एसोसिएशन हैं और उनसे रजनीकांत ने हमेशा यही बोला कि सही उम्मीदवार को वोट दें लेकिन यह कभी नहीं कहा कि कौन उम्मीदवार सही है और कौन ग़लत। लेकिन 2004 में रजनीकांत ने प्रधानमंत्री पद के लिए लालकृष्ण आडवाणी का समर्थन किया था लेकिन उसका कुछ ख़ास असर नहीं हुआ था और डीएमके को अधिकतर सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

तमिलनाडु में बीजेपी की तैयारी

modi meeting with rajnikant

तमिलनाडु में बीजेपी की ज़मीन कितनी मजबूत है?
बीजेपी का तमिलनाडु में कोई आधार नहीं है। इसीलिए उन्होंने विजयकांत की डीएमडीके, वाइको की एमडीएमके और रामदास की पीएमके और दो छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है।

इस 'रेन्बो एलायंस' को छोटी पार्टियों की वजह से कुछ समर्थन मिल सकता है और शहरी क्षेत्रों में मोदी का जो 'अंडर-करंट' है (ग्रामीण क्षेत्रों में यह नहीं है- हां नाम सुन रहे हैं लोग), वह वोट में कैसे बदलेगा यह शायद 16 तारीख को ही पता चलेगा।

तमिलनाडु में मोदी की तैयारी

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शनिवार को चेन्नई में जयललिता की रैली की ख़ास बातें क्या रहीं?
इस रैली की ख़ास बात यह थी कि इसमें जयललिता ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर हमला किया। कांग्रेस और यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ तो वह दो-ढाई सालों से लगातार बोल रही हैं लेकिन कल की रैली में उन्होंने पहली बार बीजेपी पर हमला किया।

इसका मतलब यह निकाला जा सकता है अगर चुनाव के बाद एनडीए सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभरता है तो जयललिता उसके साथ नहीं जाएंगी। मोदी और रजनीकांत की मुलाकात की ख़ास बात यह है कि जिस तरह रजनीकांत ने आडवाणी का समर्थन किया था उस तरह मोदी का नहीं किया है।

लेकिन बीजेपी का जो समर्पित कार्यकर्ता है, जिसने जिस तरह से सोशल मीडिया या अन्य मीडिया को दोहन किया है उसे देखते हुए लगता है कि सोमवार दोपहर तक शायद पूरे तमिलनाडु में मोदी और रजनीकांत की फ़ोटो फैल जाएगी।

लेकिन इसका मतदाता पर क्या असर पड़ेगा, रजनीकांत और मोदी की मुलाक़ात क्या वोट में तब्दील हो पाएगी? इस सवाल का जवाब तो शायद 16 तारीख को ही मिलेगा!

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