हनीमून पीरियड खत्म, मोदी लगाएंगे मंत्रियों की क्लास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए नया साल 2015 जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का वक्त है। देश की जनता को तमाम सतरंगी सपने दिखाकर सत्ता में पहुंचे मोदी को भी अहसास होने लगा है कि अब उनका हनीमून पीरियड खत्म हो गया है और आने वाले समय में उन्हें जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। इसलिए उन्होंने अपने प्रयास अभी से ही शुरू कर दिए हैं। सरकार के कामकाज की गति बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने सोमवार, 5 जनवरी को मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है। इस दिन वे अपने मंत्रियों की पूरी टीम से मुलाकात करेंगे।
बताया जा रहा है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना और आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा की है। सीमा पर तनाव और देश पर मंडराते आतंकी खतरे ने सरकार की परेशानी बढ़ा रखी है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेश को आकर्षित कर पाना मुश्किल माना जा रहा है। वैसे तमाम आर्थिक सुधार के कदम उठाकर सरकार ने अपनी मंशा जता दी है कि वह देश के विकास के लिए किसी हद तक आगे बढ़ने को तैयार है। कहा जा रहा है कि बैठक में मोदी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा वे अपने आइडिया और भावी एजेंडे को भी उनके सामने रखेंगे।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों के ढीले-ढाले रवैये से नाराज हैं। विभागों के कामकाज में बदलाव के बावजूद भी सरकार वह रफ्तार नहीं पकड़ पाई है, जैसा मोदी चाहते हैं। पीएम के निर्देश के बावजूद अब भी कई राज्य मंत्री अपने आला मंत्री से काम को तरस रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पीएम अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ अलग से भी मुलाकात करेंगे।
आलोचना नहीं होगी तो ठहर जाएगा लोकतंत्र: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में आलोचना की संस्कृति की हिमायत की है। उन्होंने लोकतंत्र के ‘शुद्धीकरण’ में आलोचना के महत्व पर जोर देते हुए मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखने की भी सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने इसे मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है।
एक मराठी अखबार के कार्यक्रम में हिस्सा लेने कोल्हापुर आए मोदी ने कहा कि अगर आलोचना नहीं होगी तो लोकतंत्र ठहर जाएगा। पानी जब बहता है तभी साफ रहता है वरना ठहर जाने पर यह गंदा हो जाता है। इसलिए लोकतंत्र के शुद्धीकरण के लिए आलोचना सबसे अच्छा रास्ता है। आलोचना का महिमामंडन होना चाहिए क्योंकि यह सच को परखने और गलते रास्ते की ओर भटकाव से रोकने में मदद करती है। मीडिया यह काम कर सकता है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि आजकल आलोचना नहीं होती और इस वजह से सरकार में बैठे लोग बर्बाद होते रहते हैं।
मीडिया को आलोेचना करने का संकल्प लेने की नसीहत देते हुए मोदी ने कहा कि इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। वैसे आरोप लगाना आसान होता है। आलोचना जितनी धारदार होगी और गवर्नेंस भी उतना ही बेहतर होगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जो दावा करती है, लोग उसे मानने को तैयार नहीं होते। वे दूसरे स्रोतों से सच जानना चाहते हैं। यह लोकतंत्र की ताकत है, जहां संवाद और संचार की बेहद अहमियत है।
सरकारी बैंकों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई तो हस्तक्षेप होगा: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी बैंकों के कामकाज में दखल न देने का वादा किया है लेकिन उन्होंने इन बैंकों को जवाबदेह भी बनने को कहा है। पीएम ने कहा है अगर इन बैंकों ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम नहीं दिया तो आम लोगों के हित में हस्तक्षेप किया जा सकता है।
पुणे में हुए बैंकरों के दो दिन के सम्मेलन ‘ज्ञान संगम’ में मोदी ने बैंकों को परंपरागत बैंकिंग से परहेज करने की अपील की और कहा कि बैंकों को कर्ज देने में ऐसे क्षेत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो लोगों के लिए रोजगार पैदा करे।
संगम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकिंग सेक्टर में नए सुधारों पर जोर दिया, जबकि आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बैंकों को अपने डूबे हुए कर्जों को उगाहने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें एक साल के अंदर बैंकिंग सिस्टम के अंदर मौजूदा एनपीए को खत्म कर देना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके। बैंकरों ने सरकार को यह सुझाव दिया कि सार्वजनिक बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से घटा कर कम करनी चाहिए।
सरकार सार्वजनिक बैंकों के कारोबारी फैसलों का पूरा समर्थन करेगी और इस क्षेत्र में सुधार को आगे बढ़ाएगी। - अरुण जेटली, वित्त मंत्री
बैंकों को अपने एनपीए से निजात पाना होगा ताकि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके। - रघुराम राजन, गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक