BJP ने फाइनल कर दी मोदी की सीट?
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भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने पर सस्पेंस कायम है। मोदी को राज्य की वाराणसी सीट से चुनाव मैदान में उतारने पर पार्टी में आम राय नहीं बन पा रही।
इसी उधेड़बुन के बीच मोदी के लिए गुजरात में अहमदाबाद पूर्व लोकसभा सीट नए सिरे से तालाशी गई है। हालांकि मोदी वाराणसी से चुनाव मैदान में उतरेंगे या नहीं, इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
मगर सियासी गुणाभाग करने में जुटे पार्टी के रणनीतिकार मोदी के केवल गुजरात से ही लड़ने की संभावना को खारिज नहीं कर रहे हैं।
पार्टी के बड़े नेताओं की भी यही है राय
गुजरात से ही चुनाव लड़ाने के पक्षधर पार्टी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि मोदी को वाराणसी से खड़ा कर चुनाव के दौरान बेवजह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा खड़ा नहीं करना चाहिए।
आम आदमी पार्टी (आप) जहां उत्तर प्रदेश में मोदी के खिलाफ अपने संयोजक अरविंद केजरीवाल को उतारने की तैयारी कर रही है।
वहीं भाजपा वाराणसी में मोदी के खिलाफ पार्टी विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण की आशंका को भी नकार नहीं रही है।
केजरीवाल की चुनौती का भी असर है!
दरसअल वाराणसी सीट पर जातिगत समीकरण मिश्रित हैं। खासतौर से अगर इस सीट पर केजरीवाल मोदी को चुनौती देते हैं तो पार्टी विरोधी मतों का उनके पक्ष में ध्रुवीकरण नई समस्या खड़ी कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि इस सीट पर मुसलमान, यादव और दलित वोटों का कुल योग 50 फीसदी से ज्यादा है। अगर अंत समय में सपा और बसपा ने आखें बंद कर ली और इन वोटों का केजरीवाल के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ तो मोदी को न चाहते हुए भी इस सीट पर खुद ध्यान केंद्रित करना होगा।
ऐसे में भाजपा की चुनाव प्रचार की रणनीति गड़बड़ा सकती है। हालांकि फिलहाल सपा की योजना इस सीट पर मुख्तार अंसारी की पत्नी को खड़ा करने की है।
किसने दी ईस्ट अहमदाबाद से चुनाव लड़ने की सलाह?
नई परिस्थितियों में पार्टी के रणनीतिकारों का एक बड़ा वर्ग मोदी को गुजरात से ही चुनाव लड़ने की सलाह दे रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक दरअसल रणनीतिकार नहीं चाहते कि मोदी ऐसी सीट से चुनाव लड़ें जहां उनका प्रचार के लिए जाना जरूरी हो जाए।
चूंकि इस बार पार्टी का पूरा चुनाव अभियान मोदी पर ही केंद्रित है, इसलिए उनके लिए बेहद आसान अहमदाबाद पूर्व सीट तलाशी गई है। चूंकि इस सीट पर बीते विधानसभा चुनावों में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा मत मिले थे, इसलिए यहां मोदी को प्रचार के लिए भी नहीं आना होगा।