पर्यावरण प्रेमियों पर बरसी पीएम मोदी की कृपा, साइकिल से संसद आने वाले सांसद बने मंत्री
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इसी महीने शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के दौरान भाजपा सांसदों में साइकिल की सवारी की होड़ शुरू हो सकती है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए सत्र के दौरान साइकिल से संसद आने-जाने वाले तीनों सांसदों अर्जुन मेघवाल, अनिल माधव दवे और मनसुख लक्ष्मणभाई मंडाविया को मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल कर इस दिशा में प्रयास करने वालों की पीठ थपथपाई है।
साइकिल की सवारी के जरिए पहले से ही चर्चा में रहे तीनों सांसद पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी बेहद मुखर रहे हैं। शपथ लेने के लिए तीनों सांसद संसद की तरह ही राष्ट्रपति भवन भी साइकिल से ही पहुंचे। खासबात यह है कि विस्तार में पदोन्नति पाने वाले एक मात्र राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर के पास भी पर्यावरण मंत्रालय का ही जिम्मा था।
विस्तार के बाद सियासी गलियारे में पीएम मोदी के इस पर्यावरण प्रेम की खासी चर्चा भी हो रही है। हालांकि सच्चाई यह है कि जावड़ेकर को प्रधानमंत्री ने बड़ी परियोजनाओं को मंत्रालय से संबंधित अनुमति की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने का ईनाम दिया है। विस्तार में जगह पाने वाले तीनों सांसद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपने निजी प्रयासों से भी चर्चा में रहे हैं।
ये सभी सांसद अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी हैं। नर्मदा अभियान से जुड़े रहे अनिल माधव दवे की पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रबंधन पर कई पुस्तकें लिख चुके हैं। आईएएस अधिकारी रहे दलित समुदाय के मेघवाल संविधान के बेहतरीन जानकार हैं। इसी प्रकार मनसुख लक्ष्मण भाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गुजरात में कई सफल प्रयोग के कारण चर्चा में रहे हैं।
साइकिल ने बदला राष्ट्रपति भवन का नजारा
बीते साल इन सांसदों की साइकिल सवारी ने संसद का नजारा बदला था। मंगलवार को बारी राष्ट्रपति भवन की थी। एक तरफ साइकिल पर सवार हो कर राष्ट्रपति भवन जाते सांसद तो उनके साथ दौड़ लगाते निजी सुरक्षाकर्मी और समर्थकों की भीड़ सबका ध्यान खींच रही थी।
साइकिल सवार सांसद जब राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो एकबारगी सुरक्षा तंत्र भी हतप्रभ था। पहली बार भवन के कार पार्किंग एरिया में तीन साइकिल ऑडी, मर्सिडीज के बीच शान से खड़ी नजर आई। राष्ट्रपति भवन की पार्किंग पहली बार साइकिल की उपस्थिति का गवाह बनी।
गौरतलब है कि सांसदों की साइकिल पार्किंग के लिए पिछले साल संसद के सचिवालय को नई व्यवस्था करनी पड़ी थी। बताते हैं कि आजादी के बाद शुरुआती दौर में कई सांसद साइकिल-बस से संसद आते थे। इस बीच इसकी जगह कार ने ली ली। मगर जब तीन सांसदों ने नई मुहिम छेड़ी तो इनके साइकिल की पार्किंग के लिए संसद में कार पार्किंग के बीच ही जगह बनानी पड़ी।