झारखंड और जम्मू में मोदी मैजिक, घाटी में फेल
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झारखंड और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजों से एक बार फिर साबित हो गया है कि देश में फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी का मैजिक कायम है।
झारखंड में भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है, वहीं जम्मू-कश्मीर में बनी त्रिशंकु विधानसभा में भी भाजपा के लिए रोशनी की किरण दिख रही हैं। राज्य के जम्मू क्षेत्र में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है।
हालांकि, घाटी की वादियों में कमल नहीं खिल पाया। राज्य में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन वह बिना बैसाखी के सत्ता सुख हासिल नहीं कर पाएगी। परिणाम आते ही भाजपा और पीडीपी के शीर्ष नेताओं की ओर से सकारात्मक संकेत देने वाले बयान आए हैं।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने विकास और गुड गवर्नेंस के मुद्दों पर जीत हासिल करने की बात कहकर इशारों में अपनी खुली सोच सामने कर दी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी तीनों विकल्पों की बात कह कर सरकार बनाने के साफ संकेत दिए हैं।
उधर, झारखंड में स्पष्ट बहुमत से खिली भाजपा में मुख्यमंत्री के नाम पर कयासों के शुरू हुए दौर में पार्टी के गैर आदिवासी नेता रघुवर दास सबसे आगे चल रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा
उम्मीद के मुताबिक रियासत में त्रिशंकु विधानसभा दिख रही है। पीडीपी 28 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रहकर भी वोट प्रतिशत में सबसे आगे है। मतदाताओं ने एक बार फिर गठबंधन सरकार के लिए जनादेश दिया है।
रियासत के तीनों संभागों में नतीजों का मिजाज बिलकुल अलग-अलग रहा है। जम्मू संभाग में जहां भाजपा की आंधी चली वहीं कश्मीर में पीडीपी का बोलबाला रहा। उसने नेशनल कांफ्रेंस के गढ़ श्रीनगर में भी सेंध लगाई है।
जम्मू में भाजपा को पिछले चुनाव में मिलीं 11 सीटों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक 25 सीटें मिली हैं। नेशनल कांफ्रेंस की सीटें 28 से घटकर 15 पर सिमट गई हैं जबकि कांग्रेस का ग्राफ 17 से गिरकर 12 पर अटक गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सोनवार से चुनाव हार गए। वीरवाह की जीत ने उनकी प्रतिष्ठा रख ली। पीडीपी के संरक्षक और मुख्यमंत्री पद के चेहरा मुफ्ती मोहम्मद सईद अनंतनाग से चुनाव जीते हैं। लद्दाख ने सबसे अलग तेवर दिखाते हुए चार में से तीन सीटें कांग्रेस को दी है।
पीडीपी सबसे बड़ा दल
हालांकि भाजपा राज्य में मिशन 44 को हासिल करने का सपना पूरा नहीं कर पाई है। लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा है कि पार्टी वहां सरकार का नेतृत्व करने, सरकार में शामिल होने या किसी को बाहर से समर्थन देने संबंधी सभी विकल्पों पर विचार करेगी। बुधवार को होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भाजपा ने कश्मीर और लद्दाख में एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। मोदी की रैलियां भी उन क्षेत्रों में हुईं, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। घाटी में भाजपा प्रत्याशियों को मिले वोट भी उम्मीद से कम रहे।
भाजपा जम्मू में अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित है। मोदी ने रियासत में 9 रैलियां की थीं। पिछले विधानसभा चुनाव में पैंथर्स पार्टी को तीन सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार उसका खाता नहीं खुल पाया।
भाजपा को सबसे अधिक 23 प्रतिशत वोट मिले हैं। पीडीपी को 22.7 फीसदी, नेकां को 20.8 फीसदी, और कांग्रेस को 18 फीसदी वोट मिले हैं।
चुनाव नतीजे की खास बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव में भाजपा के वोटों में कमी आई है। पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा तो इस साल के लोकसभा चुनाव के मुकाबले नौ फीसदी कम वोट हासिल हुए हैं।
44 की चकरघिन्नी
पहला विकल्प
पीडीपी-28
भाजपा-25
कुल- 53 (पूर्ण बहुमत)
सवाल- क्या पीडीपी और भाजपा एक साथ आएंगी। गठबंधन की स्थिति में
दूसरा विकल्प
भाजपा - 25
नेकां - 15
कुल - (स्पष्ट बहुमत)
सवाल- चुनाव के दौरान एक दूसरे पर तीखे वार करने वाली भाजपा और नेकां साथ आएंगी।
संभावना- नेकां के साथ गठबंधन कर भाजपा मुख्यमंत्री का पद हासिल कर सकती है, तो वहीं उमर अब्दुला को देर-सबेर केंद्र में समायोजित किया जा सकता है।
तीसरा विकल्प
पीडीपी- 28
कांग्रेस- 12
कुल - (स्पष्ट बहुमत)
सवाल- दोनों दल पहले भी गठबंधन में रह चुके हैं। कांग्रेस ने भाजपा को रोकने के लिए पीडीपी को समर्थन देने का संकेत भी दे दिया है।
भाजपा के ज्यादा करीब हैं ‘अन्य’
किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने के कारण ‘अन्य’ की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा और पीडीपी में से किसी के भी नेतृत्व में अगर सरकार बनती है तो कम से कम चार अन्य के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
सज्जाद लोन पहले ही मोदी के मुरीद हो चुके हैं। उनके खिलाफ भाजपा ने कोई उम्मीदवार भी नहीं उतारा था। उनकी पार्टी को दो सीटें मिलीं हैं। उधमपुर से जीते भाजपा के बागी प्रत्याशी पवन गुप्ता को भी भाजपा के साथ जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इस तरह भाजपा ने तीन अन्य को एक तरह से साध लिया है।
घाटी में पीडीपी, जम्मू में भाजपा और लद्दाख में कांग्रेस
जम्मू कश्मीर चुनाव
दिग्गज जो जीते
मुफ्ती मोहम्मद सईद (पूर्व सीएम)
उमर अब्दुल्ला (सीएम)
सज्जाद लोन (पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता)
दिग्गज जो हारे
ताराचंद (डिप्टी सीएम )
हिना भट्ट (भाजपा नेता )
झारखंड
जीते
हेमंत सोरेन (निवर्तमान मुख्यमंत्री)
रघुवर दास : (भाजपा के सीएम पद के दावेदार)
स्टीफन मरांडी : (झामुमो के वरिष्ठ नेता)
सरयू राय : (भाजपा के वरिष्ठ नेता)
हारे
बाबूलाल मरांडी (पूर्व सीएम)
मधु कोड़ा : (पूर्व सीएम)
अर्जुन मुंडा : (पूर्व सीएम)
सुदेश महतो : (आजसू प्रमुख)
पीएम का कोट
जम्मू-कश्मीर के नतीजे लोकतंत्र में जनता के भरोसे को दिखाता है। उन्होंने भाजपा में विश्वास जताया है। उसके लिए उन्हें दिल से बधाई। झारखंड में जनता ने स्थायी सरकार के लिए वोट दिया है। राज्य की क्षमता के सदुपयोग के लिए ऐसा जरूरी था। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
उमर का कोट
हम पीडीपी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद मुझे फोन करें या फोन रिसीव करें। यदि लालू और नीतीश साथ आ सकते हैं तो हम क्यों नहीं। मैं मुफ्ती साहब के घर नहीं जा रहा हूं लेकिन वे 15 विधायकों वाली नेकां को नजरअंदाज नहीं कर सकते। - उमर अब्दुला, मुख्यमंत्री, जम्मू और कश्मीर
गुलाम नबी आजाद का कोट
हम हमेशा तैयार हैं। पहले भी हमारा पीडीपी और नेकां के साथ गठबंधन रह चुका है। एक चीज स्पष्ट है हम भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। - गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस नेता
जम्मू-कश्मीर में सारे विकल्प खुले : शाह
झारखंड और जम्मू-कश्मीर के नतीजों से उत्साहित भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान सफलता से आगे बढ़ रहा है। मोदी के प्रति देश की जनता का अपार समर्थन अब भी बरकरार है। केंद्र सरकार के छह महीने के कार्यकाल पर जनता ने मुहर लगा दी है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सारे विकल्प खुले हैं। सरकार बनाना है, सरकार में शामिल होना है अथवा किसी का बाहर से समर्थन करना है इस पर फैसला बुधवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में होगा।
सोच-विचार के बाद करेंगे फैसला : महबूबा
पीडीपी जल्दबाजी और महज नंबर गेम ध्यान में रखकर कोई फैसला नहीं करेगी। अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं आए हैं। अवाम ने जो भी फैसला किया है उसका वह स्वागत करती हैं।
प्रदेश में नई सरकार के गठन को लेकर अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किए जाने पर महबूबा ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार कर अवाम के हित में कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवाम ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन के खिलाफ जनादेश दिया है। फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।
कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की कोशिश में भाजपा
जम्मू-कश्मीर में भाजपा कांग्रेस को किसी भी कीमत पर सत्ता से दूर रखेगी। पार्टी का पहला लक्ष्य किसी भी तरह कांग्रेस को राज्य के सत्ता के खेल से बाहर करना है। पार्टी राज्य में मिशन 44 से चूकने के बाद फिलहाल नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के रुख को अच्छी तरह भांप लेना चाहती है।
पार्टी की दिली इच्छा अपने उस पहले विकल्प पर आगे बढ़ने की है, जिसके तहत अपनी अगुवाई में सरकार बनाने की है। हालांकि अपनी दिली इच्छा पूरी न हो सकने की स्थिति में पार्टी दूसरे दल की अगुवाई में बनने वाली सरकार में शामिल होने और अंत में बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर विचार करेगी।
हार की समीक्षा करेंगे राहुल, बुलाई बैठक
झारखंड और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार की समीक्षा के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को पार्टी महासचिवों की बैठक बुलाई है।
दरअसल, कांग्रेस के अंदरखाने चर्चा थी कि पार्टी को लगातार मिल रही हार के बाद भी हाईकमान की ओर से कोई समीक्षा बैठक नहीं बुलाई जा रही है।
मई में लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई थी। उसके बाद अक्टूबर में महाराष्ट्र और हरियाणा में पार्टी को हार मिलने के बाद कोई औपचारिक बैठक नहीं बुलाई गई।
अंदरखाने तो यह भी सवाल उठने लगे थे कि हाईकमान को हार की चिंता नहीं है। इसी कारण राहुल ने हार के तुरंत बाद बुधवार को बैठक बुलाकर पार्टी के अंदरखाने चल रही उठा पटक को थामने की कोशिश की है।