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भारत-चीन सीमा को लेकर मोदी का 'स्पेशल प्लान'

Fri, 01 Aug 2014 01:22 AM IST
Updated Fri, 01 Aug 2014 01:22 AM IST
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modi made special plan for india-china border

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों में लोगों को बसाने के रणनीतिक महत्व को भांपते हुए गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है।

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इसमें सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की मदद लेने को कहा गया है ताकि अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर में चीन सीमा से लगे इलाकों में बसी आबादी का पलायन रुके और लोग यहां बसने में दिलचस्पी लें। इसके लिए वित्तीय पैकेज के जरिये प्रोत्साहन देने की बात कही गई है।
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सरकार की इस मामले में गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया सकता है कि भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों से लोगों का पलायन रोकने और वहां बसने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर 5000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता निर्धारित की गई है। खास कर अरुणाचल प्रदेश में इस कवायद पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

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भारत-चीन सीमा पर बनेंगी 55 नई चौकियां

modi made special plan for india-china border

गृह मंत्रालय ने यहां सीमा के नजदीक आईटीबीपी की 55 नई चौकियां बनाने की मंजूरी दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अरुणाचल प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों, गृह मंत्रालय और पीएमओ के अधिकारियों के बीच बातचीत में इस परियोजना पर युद्ध स्तर पर काम शुरू करने की सहमति बनी है। मोदी सरकार अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा से सटे इलाके में 11 किलोमीटर की पट्टी को सेना और आईटीबीपी की मदद से सुरक्षित कर लेना चाहती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस इलाके में वित्तीय पैकेज का जोर रोजगार पैदा करने, स्वैच्छिक सेना के गठन और स्थानीय आबादी के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधा बहाल करने पर होगा। आईटीबीपी और सेना इस परियोजना में सहभागी होंगे क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

अधिकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय को इसकी योजना तैयार करने को कहा गया है और गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू इसमें पूरी तरह सक्रिय हैं। इसे मोदी के सामने फास्ट ट्रैक मंजूरी के लिए रखा जाएगा। साथ ही सरकार सीमा से सटे इलाकों में सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी एक पैकेज की योजना बना रही है। राजमार्ग और सड़क मंत्रालय इस पर काम कर रहा है।

पांच साल में बढ़ा पलायन

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इसी तरह की योजना लद्दाख में चीनी सीमा से सटे इलाके के लिए भी तैयार की गई है। हिमाचल और उत्तराखंड में भी ऐसी ही योजना है। सरकार ने हाल में सीमा पर सड़कों के विकास और सुरक्षा बलों के लिए चौकियों के निर्माण के लिए 24,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से पिछले पांच साल के दौैरान अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती इलाके से स्थानीय आबादी का पलायन हुआ है और खुले इलाके की वजह से चीनी घुसपैठ को बढ़ावा मिला है।

एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक कुछ साल पहले तक सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में खासी आबादी वाले गांव हुआ करते थे। चीनी घुसपैठ रोकने के लिए यहां फिर आबादी बसाने की जरूरत है।

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