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मोदी-जिनपिंग मुलाकात: जानिए चार खास बातें

Fri, 19 Sep 2014 03:53 PM IST
Updated Fri, 19 Sep 2014 03:53 PM IST
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modi jinping meeting

चीनी राष्ट्रपति भारत में मेहमान बन कर आए, भारत उनकी मेहमाननवाजी कर रहा था तो दूसरी ओर चीनी सेना भारत में घुसपैठ कर रही थी। मीडिया में भी लगातार इस बात की चर्चा थी। सवाल ये था कि मोदी, जिनपिंग से इस बारे में बात करेंगे? और करेंगे तो उनका रुख क्या रहेगा?

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लेकिन मोदी ने ना केवल बात की बल्कि प्रेस कांफ्रेंस में भी तीन बार सीमा विवाद और घुसपैठ के मुद्दे का जिक्र किया। भारतीय मीडिया ने भी उनके इस रुख की तारीफ की। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने चीनी नेतृत्व के सामने इतना मुखर होकर सीमा पर घुसपैठ के बारे में जिक्र किया।
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मोदी और जिनपिंग की बातचीत लगातार की जा रही चीनी सैनिकों द्वारा घुसपैठ पर ही केंद्रित रही। सीमा विवाद को जोर-शोर से उठाने का ही नतीजा था कि जिनपिंग को कहना पड़ा कि इसकी वजह से रिश्तों में खटास नहीं आनी चाहिए। मोदी ने भी कहा कि सीमा विवाद जितनी जल्दी हो, सुलझा लिया जाए।
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बुधवार से ही लद्दाख में डटे हुए चीनी सैनिकों के रुख को देखकर अहमदाबाद में गर्मजोशी से जिनपिंग का स्वागत करने वाले मोदी को बृहस्पतिवार की वार्ता में कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ा। बुधवार को भी मोदी ने अहमदाबाद में यह मसला उठाया था।

उम्मीद से कम रहा चीनी निवेश, हुए महत्वपूर्ण समझौते

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माना जा रहा था कि चीन भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करेगा लेकिन जब पिटारा खुला तो उसमें से 20 अरब डॉलर के निवेश की बात निकली। चीन ने अगले पांच साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। कारोबारी, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग के 12 समझौतों पर मोदी ने कहा कि शांति से ही भारत-चीन के व्यापारिक रिश्तों को रफ्तार मिलेगी।

पांच साल के कारोबारी और आर्थिक विकास योजना पर भारत की ओर से वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण और चीनी वाणिज्य मंत्री गाओ हुचेंग ने दस्तख्त किए। चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन बढ़ कर 35 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले साल दोनों के बीच 66.4 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था।

चीन रेल में भारी निवेश के साथ चेन्नई-मैसूर लाइन सहित अन्य सेक्टर में भी तेज गति की रेल बिछाने के लिए भारत की मदद करेगा। चीन के पर्यटकों को भारत आने की सुविधा देने का संकेत देते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अगला साल विजिट इंडिया इयर घोषित कर दिया है। इससे साफ है कि चीन भारत की यात्रा के लिए अपने वीजा नियमों में छूट देगा।

चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा: कांग्रेस का मोदी पर निशाना

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चीनी घुसपैठ को मुद्दा बना कर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और यूपी में सत्तारूढ सपा ने ने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि पीएम, चिनपिंग को ढोकला खिला रहे हैं जबकि चीनी सैनिक सीमा में घुसपैठ कर रहे हैं।

कांग्रेस के नेता राजीव सातव ने ट्वीट किया कि,"हमारे जवान चीनी गोलीबारी में घायल हो रहे हैं जबकि हमारे पीएम चीन के राष्ट्रपति को ढोकला खिला रहे हैं।" एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि,"चीन सीमा पर सड़कों का निर्माण करा रहा है, 56 इंच का सीना कैसे 56 मिलीमीटर का रह गया है।"

दूसरी ओर उपचुनाव के नतीजों से उत्साहित सपा ने भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमला बोला। सपा की ओर से बोलते हुए रामगोपाल यादव ने कहा कि,"चीन को उसी की भाषा में जबाव दिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि,"जब तक हम बल प्रयोग नहीं करेंगे, चीन बाज नहीं आएगा।"

तिब्बती शरणार्थियों का विरोध, दलाई लामा का बयान

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चीनी राष्ट्रपति भारत आए तो तिब्बत के लोगों ने उनका विरोध किया। बुधवार को शुरु किया गया विरोध प्रदर्शन गुरुवार को तेज हो गया। प्रदर्शनकारी युवक-युवतियां होटल से कुछ दूरी पर स्थित सेंट मार्टिन रोड पर पेट्रोल पंप तक पहुंच गए और चीनी राष्ट्रपति वापस जाओ के नारे लगाने लगे।

यहां पर एक युवक बिजली के पोल पर काफी ऊंचाई तक चढ़ गया। उसके हाथ में तिब्बत का झंडा और कुछ बैनर थे। पुलिसकर्मियों ने युवक को काफी मशक्कत के बाद नीचे उतारा। चीनी राष्ट्रपति दिल्ली में जहां-जहां गए, तिब्बती लोग पुलिस को गच्चा देकर वहीं प्रदर्शन के लिए पहुंचते रहे।

हाईकोर्ट ने भी भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ शांति पूर्ण प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया।

तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ की है। निर्वासित आध्यात्मिक नेता ने उन्हें खुले दिमाग वाला और यथार्थवादी शख्स करार दिया है। दलाईलामा ने कहा कि चीन और भारत के रिश्ते आपसी विश्वास पर कायम हैं और इससे न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया को फायदा होगा। दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत की समस्या भारत की समस्या है क्योंकि 1950 से पहले उत्तरी सीमा पर एक भी सैनिक तैनात नहीं था और वहां पूरी शांति थी।

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