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लमो ने बढ़ाई नमो की चिंता, सरकार को संसद ठप होने के डर

Fri, 19 Jun 2015 04:56 PM IST
एम संजय/ अमर उजाला, दिल्ली
एम संजय/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 19 Jun 2015 04:56 PM IST
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modi is also upset by shusma and vasundhra case

एक साल पूरा कर चुकी नरेंद्र मोदी सरकार को विपक्ष से ज्यादा अपनों के मोर्च पर जूझना पड़ रहा है। ललित मोदी प्रकरण पहले ही सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आपातकाल को लेकर दिए गए बयान ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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इन सियासी हालात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं। हालांकि सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सियासी दबाव को दूर करने के लिए सरकार अभी कोई बड़ा कदम उठाने के पक्ष में नहीं है।
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बदलाव को लेकर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले प्रधानमंत्री को बिहार चुनाव के संपन्न होने का इंतजार है। पार्टी नेता भी यह मान रहे हैं कि दिल्ली में हार के बाद बिहार चुनाव भाजपा के लिए जीवन मरण सरीखा है।
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ललित मोदी की भेंट चढ़ सकता है अगला सत्र

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इसलिए पीएम की नजर बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर हैं। सूबे के परिणाम पार्टी के पक्ष में हो या नहीं। लेकिन दोनों ही सूरत में सरकार और संगठन में बड़े बदलाव की चर्चा है।

सरकार के कामकाज में ताजगी के लिए मोदी जहां कैबिनेट में फेरबदल करेंगे। वहीं संगठन चुनावों के जरिए राज्य से लेकर केंद्र के पार्टी पदों पर उनके पसंदीदा लोगों को स्थान मिलेगा।

सरकार के रणनीतिकार सशंकित हैं कि संसद का मानसून सत्र ललित मोदी विवाद की भेंट चढ़ सकता है। लेकिन इस मामले पर विपक्षी दलों के अलग-अलग सुर को भी सरकार के रणनीतिकार राहत की बात मान रहे हैं।

सरकार को नए मुद्दे का इंतजार!

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वहीं ललित मोदी विवाद में वसुंधरा का नाम आने से भी राहत मिली है। उनकी दलील है कि वसुंधरा का नाम आने के बाद सियासी दबाव केंद्र से हटकर राज्य की ओर फोकस हो गया है। इस बीच सरकार को अन्य मुद्दे उभरने का इंतजार है।

उन्हें लगता है कि दूसरा कोई बड़ा मुद्दा सामने आने के बाद ललित मोदी विवाद से मीडिया का ध्यान हट जाएगा। सरकारी सूत्रों की मानें तो सुषमा हो या वसुंधरा दोनों ही नेताओं पर अभी कोई गाज गिराने की तैयारी नहीं है। वसुंधरा राजे के बचाव में अभी न उतरना रणनीति का हिस्सा है।

पार्टी आलाकमान का आकलन है कि ललित मोदी से राजे के संबंध गहरे रहे हैं। ऐसे में पार्टी भांप लेना चाहती है कि राजे के खिलाफ ललित मोदी और कौन-कौन से कागजात सामने रख सकते हैं। अंतिम तस्वीर साफ होने के बाद ही पार्टी आलाकमान राजे के बचाव की रणनीति तैयार करेगा।

वैसे राज्य इकाई को कहा गया है कि वह राजे के पक्ष में बयान दे। वहीं सुषमा मामले में आर्थिक लेन-देन का मामला नहीं होने के पीएमओ की संतुष्टि के बाद ही सरकार और संगठन के नेता खुलकर उनके बचाव में उतरे।

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