अब करुणानिधि ने दिखाई मोदी पर 'दया'
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पुरानी कहावत है कि सियासत में कोई रिश्ता स्थाई नहीं होता, इसलिए कब कौन, किसके साथ चला जाए, कहा नहीं जा सकता। जो आज दोस्त है, हो सकता है कल वही धुर विरोधी हो जाए और परसों धुर-विरोधी फिर दोस्त बन जाए।
लोकसभा चुनाव की आहट होते ही देश की राजनीति में रोज नए 'रिश्ते' जन्म लेने लगे हैं। कौन जाने चुनाव के बाद सत्ता की सीढ़ियों पर किस दल या नेता की जरूरत पड़ जाए।
डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने भाजपा के पीएम उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसके सियासी गलियारों में कई मतलब निकाले जा रहे हैं। और मतलब निकले भी क्यों ना, देश की सबसे बड़ी पंचायत का चुनाव जो नजदीक है।
आखिर क्या कहा करुणानिधि ने?
द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को कठोर परिश्रमी और अच्छा मित्र करार दिया है। मोदी की इस तारीफ को चुनाव से पहले भाजपा को द्रमुक के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
करुणानिधि ने यह बात तमिल के एक बड़े दैनिक अखबार दिनामलार को दिए इंटरव्यू में कही है। हालांकि उन्होंने भाजपा से गठबंधन की किसी संभावना से इनकार किया है।
अखबार की ओर से मोदी के बारे में उनकी निजी राय पूछे जाने पर द्रमुक ने कहा कि भाजपा नेता जिस तरह से रात-दिन चुनाव प्रचार में लगे हैं उससे यह लगता है कि वह बेहद कड़ी मेहनत करने वाले शख्स हैं। वह उनके अच्छे दोस्त भी हैं।
'क्या आपने मान लिया कि भाजपा सांप्रदायिक है'
करुणानिधि से पूछा गया कि पिछले दिनों द्रमुक के राज्य कांफ्रेंस में उनके उस बयान का क्या मतलब निकाला जाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी सांप्रदायिक ताकतों से गठजोड़ नहीं करेगी।
इस पर करुणानिधि ने उल्टे सवाल पूछा कि क्या आपने मान लिया है कि भाजपा सांप्रदायिक है। चुनाव बाद भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बनने के सवाल पर द्रमुक प्रमुख ने कहा कि अभी से यह अटकलें नहीं लगाई जा सकती कि लोकसभा चुनाव के बाद क्या होगा।
गठजोड़ से किया था इंकार
करुणानिधि के इस बयान को काफी अहमियत दी जा रही है क्योंकि उन्होंने दो महीने पहले ही पूर्व सहयोगी कांग्रेस के साथ भाजपा से भी गठजोड़ से इनकार कर दिया था।
हालांकि अखबार में दिए गए इंटरव्यू को डीएमके के संगठन सचिव टीकेएस एलेनगोवन को ज्यादा अहमियत नहीं दी है। उनका कहना है कि ये करुणानिधि की निजी राय है।