जब एक इंटरव्यू के दौरान रो पड़े प्रधानमंत्री मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक इंटरव्यू के दौरान भावुक हो गए। मशहूर टाइम मैगजिन को इंटरव्यू देने के दौरान एक प्रश्न के जवाब में मोदी रो पड़े। उनकी आंखों में आंसू तब आया जब उन्होंने अपने बचपन और गरीबी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अपनी गरीबी से ही मैंने सबक लिया।
टाइम मैगजिन में छपे इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने खुद पर लग रहे सत्तावादी होने के आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह तानाशाही में भरोसा नहीं करते।
मोदी ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र हमारे डीएनए में है। अगर मुझे लोकतांत्रिक मूल्य, समृद्धि, सत्ता और शोहरत में से किसी एक को चुनना पड़े तो मैं बिना किसी हिचकिचाहट के लोकतांत्रिक मूल्य को चुनूंगा।
मोदी ने कहा, ‘अगर आप मुझसे पूछे कि भारत को चलाने के लिए तानाशाही की जरूरत है या नहीं तो मेरा जवाब ना होगा।’
सत्तावादी होने के आरोपों पर पीएम ने तोड़ा मौन
टाइम ने मोदी से पूछा था कि क्या भारत को चलाने के लिए चीन जैसे शासन की जरूरत है। हालांकि मोदी के इस जवाब को घरेलू राजनीति में उन पर लग रहे तानाशाही के आरोपों से जोड़कर भी देखा जा सकता है।
विपक्ष लंबे समय से उन पर तानाशाही रुख अपनाने का आरोप लगाता रहा है। टाइम को दिए अपने लंबे साक्षात्कार में पीएम ने कई मसलों पर बेबाक राय रखी।
मोदी ने अमेरिका को भारत का स्वाभाविक सहयोगी करार दिया। वहीं, पीएम ने चीन के साथ रिश्तों पर भी संतोष जताया। पीएम ने आतंकवाद पर एक वैश्विक समझौते की वकालत की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में भेद नहीं किया जाना चाहिए। उनका इशारा पाकिस्तान की ओर था।
मोदी ने कहा कि आतंकवाद किसी भी प्रकार का हो उसकी निंदा होनी चाहिए। मोदी ने कहा कि उनका और उनकी सरकार का दर्शन सबका साथ, सबका विकास है।
बकौल मोदी इसकी सरकार के लिए एक ही पवित्र किताब है वह है भारत के संविधान की किताब। देश की एकता और अखंडता उनकी प्राथमिकता में है। सभी धार्मिक समूहों और समुदायों के एक समान अधिकार हैं।