संघ की अनदेखी कर इस एजेंडे पर आगे बढ़ेगी मोदी सरकार
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केंद्र की मोदी सरकार आर्थिक सुधारों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऐतराज को दरकिनार कर आगे बढ़ने की तैयारी में है। श्रम कानून में सुधार संबंधी बिल संसद से पास कराकर सरकार ने अपना पहला कदम बढ़ा भी दिया है।
आर्थिक सुधार के लगभग 6 मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताने के बाद संघ ने निर्णय का अधिकार सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है। संघ के विभिन्न संगठनों ने बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने, श्रम कानून में सुधार, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश, जीएम फसलों के ट्रायल जैसे मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई थी।
हालांकि सरकार ने आर्थिक सुधारों के मामले में तेजी से आगे बढ़ने का फैसला किया है। भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में शामिल एक नेता का कहना है कि सरकार को जनादेश मिला है इसलिए संघ ने भी कुछ मुद्दों पर आपत्ति जताने के बाद निर्णय का हक सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है।
संघ ने 6 मुद्दों पर जताई है आपत्ति
संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि देश विकास और बदलाव चाहता है। देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने हैं। उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र में निवेश का दायरा बढ़ाने वाले बिल का प्रारूप सरकार अगले हफ्ते कैबिनेट बैठक में लाएगी।
उन्होंने कहा कि बीमा बिल को इसी सत्र में संसद से पारित कराने के लिए सरकार प्रयासरत है। सरकार के रणनीतिकार विभिन्न बिलों पर अब विरोधी दलों को मनाने में जुट गए हैं। संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस बीमा बिल का विरोध करने के बजाए संसद में इसके समर्थन में खड़ी नजर आएगी अथवा बहिष्कार कर सरकार की राह आसान बनाएगी।
बताया जा रहा है सरकार ने बीमा बिल पर कांग्रेस के सुझावों को मानने का मन बना लिया है। उधर बसपा प्रमुख मायावती पहले ही बीमा संशोधन बिल का विरोध न करने का बयान दे चुकी हैं।