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मोदी के गुप्त मंत्र के आस पास घूमता चुनाव

Mon, 21 Apr 2014 11:19 AM IST
Updated Mon, 21 Apr 2014 11:19 AM IST
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modi hidden mantra in j&k elections

कश्मीर की तीन सीटों पर होने वाले मतदान से पहले नरेंद्र मोदी के गुप्त मंत्र के बहाने चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अलगाववादी भी अवाम में अपना आधार पुख्ता करने के लिए अपने हिसाब से नमो के नाम का इस्तेमाल करने लगे हैं।

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अलगाववादी गुटों में वर्चस्व की नई जंग छिड़ गई है। क्षेत्रीय दल वोट बैंक पुख्ता करने के लिए नमो विरोध की रणनीति पर चल रहे हैं तो अलगाववादी इसी मंत्र का उपयोग चुनाव बहिष्कार के लिए करना चाहते हैं।
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इस सियासत से इतर अवाम का गुस्सा भी स्वाभाविक रूप से प्रकट हो रहा है और उधर, आतंकी अपनी मौजूदगी का अहसास कराने का कोई मौका नहीं चूकते।

नमो मंत्र का ले रहे सहारा

modi hidden mantra in j&k elections

हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने नमो द्वारा कश्मीर समस्या पर बातचीत के लिए दो दूत भेजने की बात कहकर अपनी अहमियत का अहसास कराया। साथ ही इशारों में प्रतिद्वंद्वी मीरवाइज उमर फारूक से मोदी के रिश्ते बताकर उनकी जड़ों को हिलाने की भी कोशिश की।

मोदी द्वारा दूत भेजने की बात से भाजपा इनकार कर रही है। मीरवाइज भी इस पर बिफर पड़े हैं। दरअसल हाल के दिनों में उदारवादी हुर्रियत नेता मीरवाइज ने कश्मीर पर अटल बिहारी वाजपेयी की पहल की खुले दिल से सराहना की थी।

वह चुनाव बहिष्कार पर भी नरम दिखे। इससे गिलानी को उन पर हमले का मौका मिला। दरअसल यह अलगाववादियों के बीच वर्चस्व की जंग है जिसमें अब नमो मंत्र का सहारा लिया जा रहा है। सियासी दलों का अलग नमो राग है।

आवाम का गुस्सा झेल रहे नेता

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद को कश्मीर में मोदी का अमित शाह कहा तो पीडीपी गुजरात दंगे के दौरान उमर के केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहने का मुद्दा उठा रही है।

अनंतनाग में 24 अप्रैल को चुनाव है जहां पीडीपी प्रत्याशी महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के नुमाइंदों को समान रूप से आवाम का गुस्सा झेलना पड़ा है।

कुलगाम में महबूबा के काफिले पर पथराव हुआ तो नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) नेता रियासत सरकार के मंत्री अकबर अहमद लोन पर बांडीपोरा में यही स्थिति झेलनी पड़ी। श्रीनगर में 30 अप्रैल को मतदान है और वहां नेकां नेताओं के घर लगातार हमले हुए। इस जंग में मतदान प्रतिशत घटने के आसार हैं।

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