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मोदी की हिचकिचाहट को राजनाथ, गडकरी ने मिटाया

Thu, 10 Jul 2014 11:09 AM IST
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Jul 2014 11:09 AM IST
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Modi hesitation on Shah, Rajnath-Gadkari make way

भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष बने अमित शाह को भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दाहिना हाथ माना जाता है और दोनों को एक दूसरे पर अगाध विश्वास है,लेकिन पार्टी अध्यक्ष पद के लिए मोदी की पहली पसंद जेपी नड्डा थे। नड्डा के अलावा भाजपा महासचिव ओ.पी. माथुर भी मोदी की पसंद थे।

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शाह को लेकर मोदी की पहली हिचक थी कि सरकार और सगंठन दोनों के शीर्षस्थ पद पर एक ही राज्य (गुजरात) के दो व्यक्तियों का होना उचित होगा। दूसरे क्या इससे यह संदेश तो नहीं जाएगा कि सरकार के बाद संगठन भी पूरी तरह नरेंद्र मोदी के प्रभाव में आ गया है।
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लेकिन जब निवर्तमान अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व अध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अमित शाह के नाम पर जोर दिया तो मोदी भी राजी हो गए। जबकि पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने किसी वरिष्ठ नेता को भाजपा की कमान सौंपने पर विचार कर रहा था, लेकिन इस मद्दे पर संघ नेतृत्व की खींचतान की वजह से आखिरकार संघ को भी शाह के नाम पर मुहर लगानी पड़ी।

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जेपी नड्डा और ओपी माथुर भी थे रेस में

Modi hesitation on Shah, Rajnath-Gadkari make way

लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद संघ और भाजपा नेतृत्व में राजनाथ सिंह की भूमिका को लेकर गहरा मंथन हुआ। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राजनाथ पार्टी अध्यक्ष रहकर संगठन के जरिए सरकार और सत्ता पर अपनी समानांतर पकड़ बनाए रखना चाहते थे, जबकि मोदी उन्हें सरकार में लेने को इच्छुक थे।

उन्होंने अपनी यह इच्छा संघ नेतृत्व को भी बताई। संघ नेतृत्व ने राजनाथ को सरकार में शामिल होने और मोदी के बाद वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद राजनाथ गृह मंत्री बने।

संघ सूत्रों के मुताबिक सर संघचालक मोहन भागवत नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन गडकरी ने सरकार में जाने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भाजपा के नए अध्यक्ष की तलाश शुरु हुई और संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व से संभावित नाम मांगे।

राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने संभाला मोर्चा

Modi hesitation on Shah, Rajnath-Gadkari make way

सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और नितिन गडकरी की बैठक हुई। इसमें संभावित नामों की चर्चा हुई और मोदी ने जे.पी. नड्डा और ओम माथुर के नाम सुझाए।

तब राजनाथ और गडकरी ने अमित शाह का नाम लिया। तब मोदी ने अपने और शाह के एक ही राज्य से होने की बात कही। लेकिन राजनाथ और गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री तो अब उत्तर प्रदेश से सांसद हैं। जबकि अमित जी की संगठन क्षमता और कार्यकर्ताओं में लोकप्रियता को देखते हुए अगर उन्हें पार्टी की कमान सौंपी जाएगी तो महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और अगले साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिलेगी।

दूसरी तरफ संघ नेतृत्व में भाजपा संगठन को वैचारिक धार देने और सरकार पर नजर रखने वाले प्रभावशाली संगठन के रूप में विकसित करने पर मंथन चल रहा था। इसलिए एक राय संघ के किसी वरिष्ठ नेता को भाजपा में भेजकर पार्टी अध्यक्ष बनाने की भी आई। इसके लिए संघ के सह सरकार्यवाह और चर्चित नेता इंद्रेश कुमार के नाम पर विचार हुआ।

काफी मंथन के बाद हुआ फैसला

Modi hesitation on Shah, Rajnath-Gadkari make way

संगठन में उनकी अच्छी पकड़ और काम करने की क्षमता को देखते हुए संघ की धार की बैठक में इस पर गंभीर मंथन हुआ। लेकिन संघ के एक अन्य वरिष्ठ नेता जो संघ में खासे प्रभावशाली हैं और राजनीतिक मामलों में उनका सीधा दखल है, इससे सहमत नहीं हुए।

उन्होंने यह कहकर कि सरकार और संगठन में समन्वय के लिए पार्टी अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति हो जो प्रधानमंत्री का भरोसेमंद भी हो, इंद्रेश का रास्ता रोक दिया। तब संगठन में वैचारिक आधार मजबूत करने के लिए दो वरिष्ठ नेताओं राम माधव और शिव कुमार को पार्टी में भेजने का फैसला किया गया।

इसके बाद मोदी से निकटता, राजनाथ और गडकरी के समर्थन और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता और संगठन क्षमता को देखते हुए अमित शाह के नाम पर संघ नेतृत्व ने अपनी मुहर लगा दी।

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