महिलाओं के लिए सरकार लाने वाली है 'खास प्लान'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनता से संपर्क साधने में तकनीक को अहम मान रही मोदी सरकार अब इसके जरिए आधी आबादी को सशक्त बनाने की कवायद कर सकती है।
खासतौर पर छोटे शहरों और कस्बों की युवतियों को रोजगार मुहैया कराने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बजट में इसकी झलक पेश होने की संभावना है।
दूसरी ओर दुष्कर्म और हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद के लिए सरकार बजट में नए प्रावधान कर सकती है। माना जा रहा है कि महिलाओं को नए क्षेत्रों में मौका देने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन बढ़ेगा।
सरकार का तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
दरअसल नई सरकार का तकनीक के इस्तेमाल पर जोर है। इसलिए कुछ ऐसी योजनाएं पेश होने की संभावना जताई जा रही है जिसमें आईटी के इस्तेमाल से महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया कराई जाए।
दसवीं पास कर चुकी युवतियों को सिलाई-कढ़ाई और स्वरोजगार के दूसरे प्रशिक्षण के अलावा उन्हें बीपीओ जैसे क्षेत्रों में कदम रखने का मौका मिल सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार को मोटी रकम खर्च करनी होगी, जिसकी उम्मीद बजट से लगाई जा रही है।
दूसरी ओर महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने दुष्कर्म पीड़ितों की मदद के लिए नई घोषणाएं की हैं। पुरानी योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें बेहतर बनाने पर मंथन भी किया जा रहा है।
एक ही छत के नीचे मिलेंगे पुलिस, डॉक्टर, वकील
बदायूं में दो युवितयों के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर खोलने की घोषणा की थी।
मंत्रालय का अनुमान है कि इस पर करीब 500 करोड़ की लागत आ सकती है। दुष्कर्म पीड़ित की मदद के लिए केंद्र सरकार की सहायता से तैयार होने वाले इन केंद्रों में एक ही छत के नीचे पुलिस, डॉक्टर और वकील की सहायता प्राप्त हो सकेगी।
इसके लिए बजट में राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान हो सकता है। वहीं 1000 करोड़ रुपये के निर्भया फंड को बढ़ाने की मांग भी की जा रही है। इसके अलावा विधवाओं की आर्थिक दशा में सुधार और बाल हित में भी फंड की जरूरत है, जिसकी उम्मीद बजट से की जा रही है।