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मोदी सरकार ने स्वामी के मामले पर मारी पलटी

Thu, 19 Nov 2015 04:17 PM IST
Updated Thu, 19 Nov 2015 04:17 PM IST
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modi govt take u turn at subramanian swamy issue

केंद्र की मोदी सरकार अपनी ही पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के किताब मामले में अपने पूर्व में दिए अपने उस बयान से पीछे हट गई है, जिसमें उसने स्वामी पर मुकदमा चलाने को सही बताया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उस बयान को वापस करने की गुहार लगाई है।

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केंद्र सरकार ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह तथ्यों के आधार पर दिया गया केवल बयान था ना कि सरकार का कोई नजरिया। इस हलफनामे में कहा गया है कि स्वामी की किताब को लेकर कोई अवधारणा नहीं थी। यह मामला तो अदालत में विचाराधीन है।
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सरकार ने साफ किया कि स्वामी द्वारा कानून के प्रावधानों को चुनौती देने का वह समर्थन करती है। मालूम हो कि स्वामी ने टेरेरिज्म इन इंडिया नामक किताब लिखी है।
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आरोप लगाया गया है कि इस किताब में लिखी बातों से समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलने का खतरा है। इस संबंध में एक अदालत द्वारा गैरजमानती वारंट जारी करने के बाद स्वामी ने भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए(विभिन्न समुदाय के बीच वैमनस्यता फैलाने) को चुनौती दी है।

क्या था पूरा मामला

modi govt take u turn at subramanian swamy issue

इस पहले केंद्र सरकार स्वामी की याचिका के खिलाफ आ गई थी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्वामी पर हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने के आरोप में लगाए गए अभियोग को सही करार दिया था।

केंद्र ने स्वामी की उस याचिका को रद्द करने की अपील की थी जिसमें उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच घृणा और दुश्मनी की वजह बनने वाले भाषणों और लेखों पर लागू दंडात्मक प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।

गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया था कि आईपीसी की धारा 153ए की संवैधानिकता को बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उल्लंघन बताकर चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया जाए क्योंकि यह धारा केवल उनको दंडित को कहता है जिनके कार्यों से विभिन्न वर्गों के बीच घृणा या दुश्मनी को बढ़ावा मिले या फिर विभिन्न वर्गों के बीच सद्भाव बनाए रखने का खतरा हो।

हलफनामे में भाजपा नेता द्वारा लिखी गई एक किताब का भी जिक्र किया गया था जिसमें उन्होंने भारत के समुदायों के खिलाफ भड़काऊ बातें कही हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी अपने भड़काऊ भाषणों के चलते असम के करीमगंज में एक अदालती मामले का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इससे बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है। साथ ही उन्होंने आईपीसी की धारा 153ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी हुई है।

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