विपक्ष की शरण में क्यों पहुंची मोदी सरकार?
आर्थिक सुधारों के लिए लाए गए अध्यादेशों को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार अब विपक्ष को मनाने पर उतर आई है। अर्थव्यवस्था में रफ्तार लाने के लिए सरकार ने छह अध्यादेश जारी किए हैं लेकिन विपक्ष के सहयोग के बिना इन्हें कानूनी जामा पहुंचाना मुश्किल है। यही वजह है सरकार संसद के बजट सत्र से एक दिन पहले विपक्ष के दरवाजे पर पहुंची है।
सरकार ने अपने एजेंडों के सवाल पर विपक्ष का मन टटोला है। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बजट सत्र से एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक में अध्यादेशों पर सहयोग की मांग की गई। संसदीय कार्य मंत्री वैंकेया नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सहयोग मांगा। लेकिन मुलाकात के दौरान सोनिया गांधी ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर सवाल उठा कर इस मुद्दे पर सरकार के साथ दो-दो हाथ करने की तैयारी का संदेश दे डाला।
सर्वदलीय बैठक में भी विपक्षी दलों ने इस अध्यादेश पर चिंता जाहिर की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सत्र को सुचारु रूप से चलाना सभी पार्टियों की जिम्मेदारी है, वहीं नायडू ने कहा कि सरकार संसद में विपक्ष के सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इस बैठक में 42 नेताओं ने विचार रखे। इनमें कांग्रेस, वाम दल, जद (यू ) सहित करीब आधा दर्जन दलों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर खुल कर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए शीत सत्र के बाद कई अध्यादेश लाए जाने पर चिंता जाहिर की। खासतौर पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर विपक्ष ही नहीं अपनों से भी घिरी सरकार ने नाराज पक्षों के सुझावों के अनुरूप इसके कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि आर्थिक सुधारों से जुड़े इन अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने के मामले में सरकार के सामने कई अड़चनें आ गई हैं। एक तो सरकार के पास उच्च सदन में बहुमत नहीं है, दूसरा दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद नई ऊर्जा से भरा विपक्ष सरकार के खिलाफ गोलबंद हो गया है। सरकार की मुश्किल यह है कि अगर इन अध्यादेशों को इसी सत्र में कानूनी जामा नहीं पहनाया गया तो सभी स्वत: निरस्त हो जाएंगे। सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं के तेवर और नायडू के समक्ष कांग्रेस अध्यक्ष की भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर जताई गई चिंता ने साफ कर दिया है कि सत्र में मोदी सरकार की राह आसान नहीं रहने वाली।
नरम रुख अपनाने पर मजबूर
सरकार ने शीत सत्र के बाद छह अध्यादेश जारी किए हैं। कोयला खदान, बीमा कानून संशोधन, भूमि अधिग्रहण में स्वच्छ एवं पारदर्शी मुआवजा पुनर्वास एवं पुनरुद्धार (संशोधन), नागरिकता (संशोधन), मोटर वाहन (संशोधन) और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संबंधी अध्यादेश विपक्ष के सहयोग के बगैर निरस्त हो सकते हैं।
कठिन है डगर
आर्थिक सुधारों से जुड़े अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने के मामले में सरकार के सामने कई अड़चनें हैं। सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है। इसके अलावा दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद नई ऊर्जा से भरा विपक्ष उसके खिलाफ लामबंद हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि पूरे देश की निगाहें बजट सत्र पर हैं। सत्र से लोगों की व्यापक अपेक्षाएं हैं। ऐसे में सत्र को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। जहां तक मुद्दों की बात है तो सरकार बहस के लिए तैयार है।
जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने बताया कि कृषि हमारा सबसे बड़ा उद्योग है। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश खेती और किसान के साथ धोखा है। हम इस मामले में कोई समझौता नहीं करने वाले। हम संसद से सड़क तक सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह अध्यादेश किसानों के लिए ठीक नहीं है। यह उस निचले तबके के साथ सियासी धोखा है जिसे हमारी सरकार ने सहारा दिया है। इस अध्यादेश के समर्थन का तो सवाल ही नहीं है।
इनेलो नेता दुष्यंत चौटाला ने चेताया कि सरकार यह न समझे कि हम भूमि अधिग्रहण अध्यादेश मामले में किसी झांसे में आने वाले हैं। इस अध्यादेश को किसी कीमत पर कानूनी जामा नहीं पहनाने देंगे।