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फर्स्ट क्लास में नौकरशाह नहीं कर सकेंगे हवाई सफर

Thu, 30 Oct 2014 09:59 PM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 09:59 PM IST
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Modi govt austerity drive: Bans first class air travel for bureaucrats, freezes appointments.

अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मोदी सरकार ने अब सरकारी खर्चों में कटौती का फैसला किया है। नए फैसलों के तहत सरकार के मंत्री और नौकरशाह अब अपने विमान सफर में फर्स्ट क्लास का इस्तेमाल नहीं करेंगे और न ही उन्हें पांच सितारा होटलों में बैठक करने की इजाजत होगी। सार्वजनिक उपक्रमों के अफसरों पर भी यह नियम लागू होगा।

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नए वाहनों की खरीद और नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। एक साल से ज्यादा वक्त से खाली पड़े पदों पर भी बहाली बेहद जरूरी होने पर ही होगी। सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी तक सीमित रखना चाहती है और यही वजह है कि वह खर्चे घटाने के लिए ये कदम उठा रही है। सरकार की ओर से जारी मेमोरेंडम में कहा गया है कि अफसरों को विभिन्न श्रेणी में हवाई यात्रा करने की इजाजत देते वक्त खर्च का ध्यान रखा जाएगा।
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लेकिन फर्स्ट क्लास में कोई बुकिंग नहीं होगी। बैठक करने के लिए यात्रा करने के बजाय वीडियो कांफ्रेंसिंग को तरजीह देनी होगी। वित्त मंत्रालय के मुताबिक सेना, अर्द्धसैनिक बलों और रक्षा संगठनों के लिए नए वाहन खरीदे जाएंगे लेकिन दूसरे विभागों में नए वाहनों की खरीद नहीं होगी। नए फैसलों के तहत बेहद जरूरी सम्मेलन और सेमिनार ही आयोजित होंगे।
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विदेश में कारोबार को बढ़ावा देने वाली प्रदर्शनी, सम्मेलन या सेमिनार के अलावा दूसरे कार्यक्रमों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। हर श्रेणी की हवाई यात्रा में सबसे कम दर वाले टिकट ही खरीदे जाएंगे। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं में कोई मुफ्त टिकट नहीं मिलेगा।

राजकोषीय घाटा कम करने की तैयारी

Modi govt austerity drive: Bans first class air travel for bureaucrats, freezes appointments.

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि गैर आयोजन खर्च में दस फीसदी की कटौती के फैसले में ब्याज भुगतान, कर्ज अदायगी, रक्षा, पूंजीगत, वेतन, पेंशन और राज्यों को दिया जाना अनुदान शामिल नहीं है। जिन खर्चों में कटौती की गई है उनकी भरपाई के लिए गैर आयोजना खर्च के मद में अतिरिक्त फंड आवंटित नहीं होगा।

स्वायत्त संस्थाओं पर भी खर्च में कटौती के ये फैसले लागू होंगे और उन्हें बजट प्रावधनों से ज्यादा फंड आवंटित नहीं होगा। खर्च घटाने के कदमों को लागू करने का जिम्मा विभागों सचिवों पर होगा। इन विभागों के वित्तीय सलाहकारों को हर तिमाही में वित्त मंत्रालय के सामने रिपोर्ट पेश करनी होगी। गौरतलब है कि सरकार अर्थव्यवस्था के हालात सुधारने के लिए निवेश बढ़ाने और खर्च घटाने के उपाय कर रही है।

सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को सीमित करना बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 फीसदी था, जिसे 2013-14 के दौरान घटा कर 4.5 फीसदी पर ले आया गया। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान वह इसे जीडीपी के 4.1 फीसदी पर लाना चाहती है। सरकार का इरादा इसे वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान घटा कर जीडीपी के तीन फीसदी तक लाना है।

क्या है गैर आयोजना खर्च

Modi govt austerity drive: Bans first class air travel for bureaucrats, freezes appointments.

सरकारी खर्च के दो हिस्से होते हैं। एक आयोजना खर्च और दूसरा गैर आयोजना खर्च। गैर आयोजना खर्च या व्यय भी राजस्व और पूंजी खर्च में बंटे होते हैं।

राजस्व खर्च में भुगतान, सब्सिडी (खाद्य और खाद सब्सिडी), पारिश्रमिक और सरकारी कर्मचारियों को दिया जाना वाला वेतन आदि शामिल है। गैर आयोजना पूंजी खर्च में रक्षा खर्च, सार्वजनिक उपक्रमों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेश और विदेशी सरकारों को दिया जाना वाला खर्च शामिल है।

क्यों उठाया कदम?

सरकार की आमदनी से खर्च ज्यादा हो जाने पर राजकोषीय घाटे की स्थिति पैदा हो जाती है। यही वजह है सरकारें इसे काबू करने के लिए खर्चे घटाने का फैसला करती है। सरकार के लिए खर्च घटाने का सबसे आसान रास्ता गैर आयोजना व्यय में कटौती करने का होता है।

क्या हैं हालात?

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान सरकार का आयोजना व्यय 5.75 लाख करोड़ रुपये का है जबकि गैर आयोजना व्यय 12.19 लाख करोड़ रुपये का। बजट में निर्धारित कुल व्यय 17,94,892 करोड़ रुपये का है जो वित्त वर्ष 2013-14 के 15,90,434 करोड़ रुपये के संशोधित आकलन से कहीं ज्यादा है।

कसा शिकंजा

नौकरशाहों की फर्स्ट क्लास विमान यात्रा पर रोक
फाइव स्टार होटलों पर नहीं होगी बैठकें
बेवजह के सेमिनार और सम्मेलन नहीं होंगे
नई गाड़ियों की खरीद पर रोक
नई नियुक्तियों पर लगी रोक
एक साल से खाली पदों पर बहाली रुकी

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