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'अच्छे दिन' लाने के लिए मोदी सरकार ने बनाया नया प्लान

Wed, 19 Nov 2014 02:54 PM IST
Updated Wed, 19 Nov 2014 02:54 PM IST
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Modi government will transfer money directly to states

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार विकास की गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन राज्यों को सौंप सकती है। केंद्र की योजना है कि अब विकास कार्यों के लिए आवंटित धन सीधे राज्यों को सौंपा जाए और वही योजनाओं के क्रियान्वयन से जुडे फैसले लें।

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अगर सब कुछ ठीक रहा तो मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जवाहर लाल नेहरु राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं का जिम्मा राज्यों को दे सकती है। फिलहाल इनका प्रबंधन केंद्र के पास है। इन योजनाओं का बजट 6,60,506 करोड़ है।
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मनरेगा जैसी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में भेजे जाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय में इसी महीने हुई बैठक के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र द्वारा संचालित सभी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजे जाने की तैयारी है।
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उल्लेखनीय है कि ग्याहरवीं योजना के आखिर तक यानी 2012 तक राज्यों को दी जाने वाली कुल सहायता का 52 फीसदी हिस्सा केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं के मार्फत खर्च किया गया था।

तैयार हो रहा है नया योजना आयोग

Modi government will transfer money directly to states

इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान मौजूद रहे एक अधिकारी ने बताया कि राज्यों से उनके लिए फंड और उनके उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे जाने के बजाय नई योजना के तहत एक निश्चित राशि राज्यों के खाते में स्थानांतरित किए जाने की योजना चल रही है।

राज्यों को दिया जाने वाला धन कितना होगा और इसे किस पैमाने पर बांटा जाएगा इसका फैसला वह स‌मि‌ति करेगी, जिसे केंद्र सरकार योजना आयोग की जगह ले आ रही है। उल्‍लेखनीय है क‌ि योजना आयोग से जुड़े बीके चतुर्वेदी ने साल 2011 में केंद्रीय योजनाओं की खामियों को रेखांकित करते हुए एक रिपोर्ट सौंपी थी।

राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में भी केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं में राज्यों की राय को शामिल करने की मांग की गई थी। उस समय राज्यों की मांग थी ‌कि केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्यों को आवंटित होने वाला धन बिना किसी रूकावट के ट्रांसफर किया जाना चाहिए। इन योजनाओं के कार्यान्वयन में थोड़ी सहजता होनी चाहिए और सीएसएस योजनाओं की 100 फीसदी फंडिंग होनी चाहिए जिसमें राज्यों की बिल्कुल भी भागेदारी न हो।

चतुर्वेदी ने यह मांग भी की थी कि केंद्र द्वारा संचालित की जाने वाली योजनाओं की संख्या को 147 से घटाकर 59 किया जाना चाहिए। जून 2013 में मनमोहन सिंह की कैबिनेट ने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया था जिनमें ऐसी योजनाओं की संख्या को 66 तक सीमित किया गया था। हालांकि इसमें राज्यों को 10 फीसदी की छूट भी दी गई थी।

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