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बिना नेता प्रतिपक्ष ही सरकार करेगी अहम नियुक्तियां

Mon, 08 Sep 2014 08:11 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Mon, 08 Sep 2014 08:11 AM IST
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Modi government will appoints without Opposition leader.

सरकार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के बगैर ही सीवीसी, एनएचआरसी और लोकपाल जैसी संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों को नियुक्त करने का फैसला किया है।

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इन पदों पर नियुक्ति से संबंधित चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष अहम सदस्य होता है, लेकिन वर्तमान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष है ही नहीं।

इस संबंध में हाल ही में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखा था। सचिवालय ने सूचित किया कि सदन में विपक्ष के नेता के रूप में किसी को मान्यता नहीं दी गई है।
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इसके बाद सरकार विपक्ष के नेता के बगैर ही संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ेगी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन कांग्रेस को यह पद देने की मांग खारिज कर चुकी हैं।
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लोकसभा में नहीं है कोई नेता प्रतिपक्ष

Modi government will appoints without Opposition leader.

नियमों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष का नेता पद हासिल करने के लिए विपक्ष के सबसे बड़े दल के पास सदन के कुल 543 सदस्यों में 10 फीसदी यानी 55 सदस्य होने चाहिए। लेकिन कांग्रेस के सांसदों की संख्या केवल 44 है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष का होना अनिवार्य नहीं है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति के सुझाव पर राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों की नियुक्ति करते हैं।

समिति में गृह मंत्री और विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं। हालांकि केंद्रीय सतर्कता कानून 2003 में आगे कहा गया है कि नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में चयन समिति में विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता को शामिल किया जा सकता है।

इसी कानून में यह भी कहा गया है केवल चयन समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति होने के कारण नियुक्ति को अवैध नहीं करार दिया जाएगा।

सूचना आयुक्त के मामले में है पेंच

Modi government will appoints without Opposition leader.

कुछ इसी तरह की व्यवस्था मानवाधिकार संरक्षण कानून 1993 में है। उसमें भी यही कहा गया है कि चयन समिति के सदस्य की गैर मौजूदगी में नियुक्ति अवैध नहीं मानी जाएगी।

लोकपाल और लोकायुक्त कानून 2013 में भी यही कहा गया है कि अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति चयन समिति में सदस्य नहीं होने कारण अवैध नहीं मानी जाएगी।

प्रमुख सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में सरकार के सामने दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है।

इन पदों पर नियुक्ति से जुड़े कानून में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में अगर विपक्ष का नेता नहीं है तो विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता को बतौर नेता प्रतिपक्ष माना जाएगा।

बहरहाल सरकार ने नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी में नए सीआईसी की नियुक्ति टाल दी है।

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