भ्रष्टाचार पर मोदी का 'नया डंडा', आप भी जानिए
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भ्रष्टाचार को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक कानून में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दे दी। इसके तहत भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की अधिकतम अवधि पांच साल से बढ़ाकर सात साल किए जाने का प्रावधान है।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में प्रस्तावित संशोधनों में घूसखोरी के अपराध में रिश्वत देने और लेने वाले दोनों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सजा के प्रावधानों को न्यूनतम छह महीने की बजाय तीन साल और अधिकतम पांच साल से बढ़ाकर सात साल किया गया है।
साथ ही नौकरशाही को काम करने की छूट देने के लिए अनजाने या गलती से लिए गए फैसलों से हुए नुकसान या गड़बड़ी जैसे मामलों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है। भ्रष्टाचार के मामलों के जल्द निपटारे के लिए भी कानून में संशोधन किया गया है।
संशोधन में इस तरह के मामलों को निपटाने की दो साल की समय सीमा तय करने का प्रावधान है। यानी दो साल के भीतर मुकदमा खत्म करके इस तरह के मामलों को जल्द निपटाने का प्रस्ताव किया गया है। मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को मंजूर किए गए संशोधन भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक 2013 का हिस्सा होंगे, जो राज्यसभा में लंबित है।
संपति की कुर्की भी अब हो जाएगी आसान
भ्रष्टाचार से मिलने वाले होने वाले लाभ को रोकने के लिए संपत्ति की कुर्की का अधिकार अब जिला अदालतों के बजाय निचली अदालतों यानी विशेष न्यायाधीश को दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली कई बार कह चुके हैं कि 27 साल पुराना यह कानून ईमानदारी से फैसला लेने में बाधक है। उनका मानना है कि यह कानून परीक्षा पर खरा नहीं उतर पाया। खासकर यह कानून अलग अलग तरीकों से व्याख्या करने के लिए खुला हुआ है। इसमें भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की अलग अलग तरीके से व्याख्या करने की गुंजाइश छोड़ दी गई है।
सरकार का कहना है कि पिछले चार साल में भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों से जुड़े मामलों के निपटारे में औसतन आठ साल से अधिक समय लगा। इसलिए अब दो साल के भीतर मुकदमा खत्म हो, इसका प्रस्ताव रखा गया है। संशोधन में सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की ओर से किए जाने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए व्यक्तियों से लेकर कारोबारी संस्थाओं को प्रावधान के दायरे में लाया जा सकता है।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
1. सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपये निरंतर जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इससे करीब 20 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को तत्काल राहत मिलेगी।
2. आपदाओं से निपटने और राहत कार्यों को सुचारु ढंग से अंजाम देने के लिए एनडीआरएफ की बटालियन की संख्या बढ़ा दी गई है। कैबिनेट ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की दो अतिरिक्त बटालियन को एनडीआरएफ में परिवर्तित किए जाने को अपनी मंजूरी दी।
3. भारत-बांग्लादेश भू सीमा समझौते से संबंधित बिल को भी दी गई मंजूरी। इस समझौते से असम को बाहर रखने का फैसला किया गया है।
4. सरकार ने गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में नरमी लाने के बाद किसानों को एक और राहत प्रदान की है। सरकार ने बेमौसम बारिश से प्रभावित गेहूं की खरीद के समय किसानों से वसूली गई मूल्य कटौती को भी लौटाने का फैसला किया है।
5. घरेलू चीनी उत्पादकों को आयातित सस्ती चीनी से राहत देने के लिए सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करने का निर्णय लिया है।