सर्वसम्मति से भूमि अधिग्रहण बिल पर आगे बढ़ेगी मोदी सरकार
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मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण बिल के जरिए विपक्ष खासतौर से कांग्रेस को अपनी सियासत चमकाने का मौका नहीं देगी। सरकार की मंशा सर्वसम्मति के बाद ही इस विवादित बिल पर आगे बढ़ने की है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि सियासी मजबूरी के चलते उसने बिल पर बेशक अपनी रफ्तार सुस्त की है। मगर इसे पूरी तरह से ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। सपा और बसपा से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार भूमि अधिग्रहण बिल लाना चाहती है। वैसे सरकार के पास नए बिल का भी विकल्प है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि भूमि अधिग्रहण पर सरकार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सियासत चमकाने का अवसर नहीं देगी। अब जो भी फैसला होगा सर्वसम्मति के बाद ही होगा। बिल का फैसला राज्यों पर छोड़ने का दांव चल कर सरकार ने अपने ऊपर बने दबाव को कम किया है।
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मामले पर बनी संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल बढ़ाकर अगस्त के पहले हफ्ते तक का समय दिया है। जिससे भूमि अधिग्रहण बिल के इस मानसून सत्र में संसद से पारित होने के आसार बेहद कम रह गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा अधिक संशोधन आए तो सरकार नया बिल भी ला सकती है।
विपक्ष को नहीं देगी सियासत चमकाने का मौका
बताया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण बिल पर जारी सियासी जंग के बीच सपा और बसपा के बदले रुख से सरकार को राहत मिली है। इन दोनों दलों ने संकेत दिए हैं कि सरकार अगर मौजूदा भूमि अधिग्रहण बिल में कुछ बदलाव करे तो वे इसका समर्थन कर सकते हैं।
बताया जाता है कि मानसून सत्र के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के कवायद में सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को जमीन बिल पर आगे बढ़ना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी को भूमि अधिग्रहण बिल पर बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
वहीं बसपा ने भी बिल पर अपनी नरमी दिखाते हुए कहा है कि वह इस बिल को सशर्त समर्थन को तैयार है। हालांकि बिल पर सर्वसम्मति के जरिए आगे बढ़ने का संकेत पीएम मोदी बीते सप्ताह संपन्न हुई नीति आयोग की बैठक में ही दे चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि वे उनके सुझावों के मद्देनजर ही बिल पर आगे बढे़गें।
बताया जा रहा है कि ऐसा करके पीएम ने एक तीर से दो निशाना साधा है। पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर बिल को लेकर बने दबाव को कम किया है। तो उन राज्यों को भी कटघरे में घेर दिया है जो कि बैठक में बिल का समर्थन और बाहर में विरोध करते हैं।