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'ड्यूटी पर जान देने वाले पुलिसकर्मियों को शहीद का दर्जा नहीं'

Sat, 14 Nov 2015 03:15 AM IST
Updated Sat, 14 Nov 2015 03:15 AM IST
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modi government said in supreme court

ड्यूटी पर कर्तव्य निर्वाह के दौरान मौत होने पर अर्द्ध सैनिक बलों व पुलिसकर्मियों को भी आर्मी, नेवी व एयरफोर्स की तरह शहीद का दर्जा देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने यू टर्न ले लिया।

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सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि ड्यूटी के दौरान कर्तव्य का पालन करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
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गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि इस मुद्दे पर वह गंभीर है और सक्रियता से इन जवानों को शहीद का दर्जा देने पर विचार किया जा रहा है।
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न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट्ट व न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ के समक्ष रक्षा मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि अर्द्धसैनिक बलों को सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों के समान नहीं माना जा सकता।

ऐसे में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को ड्यूटी में कर्तव्य निर्वाह करते हुए मरने पर शहीद का दर्जा देना गलत होगा। सरकार ने यह जवाब अधिवक्ता अभिषेक चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया है।

सरकार ने एक याचिका के जवाब में हाईकोर्ट को दी जानकारी

modi government said in supreme court

याची ने अदालत से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार, कार्मिक व ट्रेनिंग विभाग व रक्षा मंत्रालय को यह निर्देश दिया जाए कि अर्द्धसैनिक बलों व पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत होने पर आर्मी, नेवी व एयरफोर्स की तरह शहीद का दर्जा दिया जाए। इन्हें भी आर्मी, नेवी व एयरफोर्स के सामान मुआवजा व अन्य सुविधाएं दी जाएं।

याचिका में आग्रह किया गया है कि अर्द्धसैनिक बलों व पुलिसकर्मियों में ड्यूटी पर मौत होने वाले लोगों का अब तक का रिकॉर्ड रखा जाए और भविष्य में उसे सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया जाए। याचिका में बताया गया है कि पिछले 53 सालों में अब तक 31,895 अर्द्धसैनिक बलों व पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है बावजूद इसके उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा सरकार ने इन लोगों के पारिवारिक सदस्यों के ज्ञापन पर कहा है कि इन लोगों को शहीद का दर्जा प्रदान करने की कोई नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि उक्त जवान ड्यूटी के दौरान रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर करते हैं ऐसे में इनको भी शहीद का दर्जा प्रदान किया जाना जरूरी है।

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