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मोदी के एक्शन प्लान से पवित्र होगी गंगा?

Tue, 09 Sep 2014 11:44 AM IST
Updated Tue, 09 Sep 2014 11:44 AM IST
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Modi government ready with action plan for namami gange project.

गंगा को निर्मल बनाने के अपने विजन ‘नमामि गंगे’ अभियान का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगाज कर दिया है।

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प्रधानमंत्री ने गंगा पुनरोद्धार को व्यापक जल आंदोलन में तब्दील करने का आह्वान करते हुए इस दिशा में काम करने वाली सभी संस्थाओं की ताकत को एक विशेष एक्शन प्लान के तहत एकजुट करने की बात कही है ताकि इन सभी वर्गों की एकजुट ताकत को गंगा सेवा में लगाया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमामि गंगे अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सोमवार को बुलाई गई अपनी पहली उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह राय जाहिर की।

गंगा पुनरोद्धार पर हुई इस बैठक में शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू, सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, जल संसाधन और गंगा पुनरोद्धार मंत्री उमा भारती, पर्यावरण व वन राज्यमंत्री प्रकाश जावड़ेकर और वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सरकार के तमाम आला अधिकारी मौजूद थे।
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प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता निर्मल गंगा होनी चाहिए। इसके लिए हमें यह करना होगा कि गंगा में हम प्रदूषित जल का प्रवाह किसी भी सूरत में नहीं होने दें।
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500 शहरों में पीपीपी मॉडल

Modi government ready with action plan for namami gange project.

उन्होंने कहा कि इस दिशा में हमें देशभर में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के साथ स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करनी होगी, जो गंगा के तटों को श्रृंखलाबद्ध दायरे में बांट कर प्रदूषण फैलाने से रोकने के लिए अभियान चलाए।

मोदी ने ठोस कचरा प्रबंधन और दूषित पानी प्रबंधन के अपने दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए देश के 500 शहरों में पीपीपी मॉडल के आधार पर कचरा निष्पादन आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

इस दिशा में पीएम ने गंगा के तटों पर बसे शहरों को पहली प्राथमिकता में लेने की बात कही। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए लोगों से मिले सुझावों का भी बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गंगा के पुनरोद्धार और इसे निर्मल बनाने के अभियान को पर्यावरण बचाने के एक बड़े मिशन के रूप में भी तब्दील किया जा सकता है क्योंकि देश की लगभग आधी आबादी इससे जुड़ी है।

पीएम ने कहा कि ऐसा हुआ तो पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर भी न केवल ध्यान खींचा जा सकेगा बल्कि विशेषज्ञ की मदद भी हासिल की जा सकेगी।

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