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इंदिरा की पुण्यतिथि से एक दिन पहले सिखों को मुआवजा

Thu, 30 Oct 2014 08:56 PM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 08:56 PM IST
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Modi government pledged to compensate victims of 1984 riots.

केंद्र सरकार ने सांप्रदायिक, आतंकी या नक्सली हिंसा के पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को तीन से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है।

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साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों के 3,325 पीड़ितों के प्रत्येक परिजन को अतिरिक्त पांच लाख रुपये देने की घोषणा की गई है। यह राशि सिखों को मिलने वाले मुआवजे से अतिरिक्त होगी।
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बृहस्पतिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक में पीड़ितों के बारे में चर्चा के बाद यह फैसला लिया। अभी तक इस तरह की हिंसा में मारे जाने वाले लोगों के परिवार या हिंसा में किसी व्यक्ति के स्थायी रूप से अपंग हो जाने की सूरत में मुआवजे के तौर पर सरकार की ओर से तीन लाख रुपये दिए जाते थे।
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गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के अलावा पीड़ित के परिवार को अगर कहीं और से भी मदद मिलती है, तब भी वह इस स्कीम के जरिए मुआवजा लेने का हकदार है।

मोदी के ऐलान के सियासी मायने

Modi government pledged to compensate victims of 1984 riots.

सरकार 2011-12 में सांप्रदायिक, आतंकी या नक्सली हिंसा के 204 मामलों में पीड़ितों को 6.12 करोड़ और 2012-13 में हिंसा के 133 मामले में 3.99 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर वितरित कर चुकी है।

वहीं 2013 से इस साल जुलाई तक राज्य सरकारों की तरफ से हिंसा से प्रभावित पीड़ितों के बारे में प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण इस अवधि में अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।

इसके अलावा सिख विरोधी दंगे के पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए पिछले तीन महीनों से नरेंद्र मोदी सरकार को कई सिख संगठनों से याचिकाएं मिली थीं और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 30वीं पुण्यतिथि पर सरकार ने यह घोषणा की।

ताजा मुआवजे से केंद्र सरकार पर 166 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। एक अधिकारी के मुताबिक कुछ हफ्तों में ही यह राशि आवंटित कर दी जाएगी।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिखों के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई थी। 2006 में यूपीए सरकार ने सिखों के लिए 717 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें से प्रत्येक पीड़ित के परिजनों को 3.5 लाख रुपये दिए गए थे।

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