देसी गायों के संरक्षण के लिए मोदी सरकार ने दिए 150 करोड़
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मोदी सरकार ने देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और गोशालाओं की मदद के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया है।
इसके तहत गोकुल ग्राम बनाए जाएंगे। सरकार ने देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए 12 सूत्री कार्यक्रम चलाया जाएगा।
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का कहना है कि देश में 83 फीसदी गाय देसी नस्ल की हैं, अगर इन पर ध्यान दिया जाए तो देश में दूध की नदियां बहेंगी।
150 करोड़ का बजट मंजूर
राधा मोहन सिंह ने बताया कि अभी तक पशुपालन के लिए कई योजनाएं थीं, लेकिन देसी नस्ल की गायों को लेकर कोई गाइडलाइन तक नहीं थी।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के जरिए देसी गाय के संरक्षण के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। इसके लिए इस साल 150 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है।
गोकुल ग्राम की स्थापना इस मिशन का अहम घटक होगा। सहकारी समूह, स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) और ट्रस्टों को देसी नस्ल की 1,000 गाय वाले गोकुल ग्राम स्थापित करने में मदद की जाएगी। यहां कम से कम 40 फीसदी गाय ऐसी होंगे, जो दूध देना बंद कर चुकी हैं। इससे गायों की उपेक्षा रोकने में मदद मिलेगी।
गुलाबी क्रांति के जवाब में गोकुल ग्राम योजना
ये गोकुल ग्राम दूध के अलावा गोमूत्र, गोबर से जुड़े उत्पादों को भी बढ़ावा देंगे। राज्यों के जरिए इस मिशन को लागू करने के लिए कृषि मंत्रालय ने आगामी 16 सितंबर को राज्यों के पशुपालन और कृषि मंत्रियों की बैठक बुलाई है।
बजट में देसी नस्ल के पशुओं के लिए 500 करोड़ रुपये की योजना का ऐलान किया गया था। इसके तहत देसी नस्ल की गाय के लिए इस साल 150 करोड़ रुपये का मिशन शुरू किया गया है।
भाजपा ने न सिर्फ अपने चुनावी घोषणा-पत्र में यह वादा किया था, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में मीट के बढ़ते निर्यात (गुलाबी क्रांति) और उसके पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।
'देसी नस्ल के प्रजनन केंद्र खुलेंगे'
कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान ने बताया कि अगर अभी भी देसी नस्ल की गायों को बचाने के प्रयास नहीं किए गए थे, हम सिर्फ किताबों में देसी गाय देखेंगे।
हाल के वर्षों में आंधाधुंध क्रास-ब्रीडिंग से स्थानीय नस्ल की गाय की पहचान खतरे में पड़ गई है। गोकुल मिशन के तहत देसी नस्ल के प्रजनन केंद्र और श्रेष्ठ जर्म प्लाज्म वाली गोशालाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों को देसी नस्ल के पशु पालने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।