मोदी की 'खास' सौगात बनी दूर की कौड़ी
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केंद्र सरकार ने कागजातों के राजपत्रित अधिकारियों से सत्यापन की जगह स्वयं सत्यापन की सुविधा का ऐलान तो कर दिया है लेकिन इसे मूर्त रूप लेने में लंबा वक्त लगेगा।
सरकार इसके लिए अलग अलग विभागों, मंत्रालयों और राज्यों के साथ तालमेल बिठाकर कागजातों के सत्यापन संबंधी कानून में फेरबदल के लिए संशोधन तक लाने पर विचार कर रही है।
मंगलवार को अपने मंत्रालय की सौ दिनों की उपलब्धियां गिना रहे कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने माना कि स्वयं सत्यापन की सुविधा अभी लागू नहीं हुई है।
सरकार इसके लिए अधिसूचना जल्द जारी करेगी लेकिन यह संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा कि वह आम लोगों को यह सुविधा किस हद तक देना चाहती है।
सत्यापन संबंधी कानून में बदलाव का मामला
कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह भी साफ किया कि सुरक्षा, सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती व बंदूक के लाइसेंस जैसे मामलों से संबंधित कागजात में स्वयं सत्यापन की छूट नहीं होगी। कार्मिक मंत्री ने कहा कि इस सुविधा से दरअसल लोगों और सरकार के बीच विश्वास का भाव पैदा होगा।
न्यूनतम सरकार के साथ अधिकतम शासन के पीएम मोदी के मूल मंत्र के साथ कार्मिक मंत्रालय ने कई नई पहल की हैं। सरकार ने फैसला किया है कि अधिकारियों के रिटायर हो जाने के बाद भी उनके तजुर्बे का इस्तेमाल किया जाएगा।
सिंह ने कहा कि बदलते आर्थिक-सामाजिक परिवेश में अब लोग लंबी जिंदगी जी रहे हैं। अब रिटायरमेंट के बाद लोग कम से कम दस साल तक स्वस्थ रहते हैं। ऐसे में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि सामाजिक और पारिवारिक तौर पर भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहे।
इसी क्रम में मंत्रालय ने विकलांग बच्चों के अधिकारी माता पिता को विभागीय ट्रांसफर से मुक्त करने का भी फैसला लिया है।