मोदी सरकार का एक साल, स्मृति से हुए कई सवाल
मोदी सरकार के पहले एक साल में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का कामकाज निशाने पर रहा है। आईआईटी और केंद्रीय विद्यालय जैसे नामी उच्च शिक्षण संस्थान से लेकर मंत्रालय के अधिकारियों की नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में रही।
नेशनल बुक ट्रस्ट, बनारस हिंदू युनिवर्सिटी, यूजीसी इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्ट्रोकिल रिसर्च (आईसीएचआर) जैसे कई बड़े संस्थानों में संघ से जुड़े लोगों की हुई नियुक्तियों को लेकर भी ईरानी विपक्ष और शिक्षा जगत से जुड़े आलोचकों के लगातार निशाने पर रहीं।
आमतौर पर विवाद से दूर ही रहने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी के निदेशक पद को लेकर मोदी सरकार में विवाद काफी बढ़ गया।
दिल्ली आईआईटी के निदेशक आरके शेवगांवकर ने पांच महीने पहले दिसंबर में इस्तीफा दिया था। अभी भी मानव संसाधन मंत्रालय ने उनके इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया है, जबकि शेवगांवकर मंत्रालय से लगातार इस पद से मुक्त करने के लिए कह रहे हैं।
विपक्ष ने ईरानी पर निशाना साधा
मानव संसाधन मंत्रालय पर उनके काम में दखलअंदाजी करने का आरोप था। विपक्ष ने ईरानी पर निशाना साधा था। इसके बाद रोपड़, भुवनेश्वर और पटना की आईआईटी के निदेशक पदों की नियुक्तियों पर विवाद सबसे ज्यादा गरमाया।
निदेशक पदों की नियुक्तियों का लेकर गठित सर्च पैनल के अध्यक्ष पद से अनिल काकोदकर ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि बाद में उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया।
मगर विवाद की लपटें बढ़ चुकी थीं। बाद में ईरानी की अध्यक्षता में पैनल द्वारा छह घंटे में 36 आवेदकों के इंटरव्यू लेकर निदेशकों का चयन करना भी विवादों में रहा। कई आलोचकों ने सवाल उठाया कि इसका मतलब एक आवेदक को जांचने के लिए पैनल ने सिर्फ दस मिनट दिए, फिर बेहतर चयन की गुंजाइश कैसे हो सकती है।
चर्चा में रहीं संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियां
संघ से जुड़े लोगों को नियुक्त करने को लेकर मंत्रालय साल भर चर्चा में रहा। नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव शर्मा, बनारस हिंदू युनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी, यूजीसी सदस्य इंद्र मोहन कपाही, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्ट्रोकिल रिसर्च (आईसीएचआर) के अध्यक्ष सुदर्शन राव और इसके कई सदस्य संघ से जुड़े हैं।
उधर, मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अमरजीत सिन्हा का मंत्रालय के सांख्यिकी संकाय में भेजना तो सबसे ज्यादा विवादों में रहा है। तो ईरानी के ओएसडी संजय काचरू की नियुक्ति को पीएमओ की ओर से मंजूरी नहीं देने का मामला चर्चा का विषय रहा।